
उत्तर प्रदेश की जातीय और गठबंधन की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला है। ओमप्रकाश राजभर की पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष प्रेम चंद्र कश्यप ने संगठन से इस्तीफा देकर मुकेश साहनी की अगुवाई वाली विकासशील इंसान पार्टी (VIP) का दामन थाम लिया। कश्यप लंबे समय से SBSP में सक्रिय थे और संगठन के मजबूत स्तंभ माने जाते थे, ऐसे में उनका जाना सीधे तौर पर राजभर की राजनीतिक पकड़ पर असर डालने वाला कदम माना जा रहा है।
अच्छे लाल निषाद भी VIP में शामिल
इस घटनाक्रम के साथ ही पूर्व मंत्री अच्छे लाल निषाद ने भी VIP पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। अच्छे लाल निषाद पहले जन अधिकारी पार्टी से जुड़े रहे हैं और निषाद समाज में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। दोनों नेताओं के एक साथ VIP में शामिल होने से पार्टी को उत्तर प्रदेश में नई राजनीतिक ताकत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, खासकर निषाद, कश्यप और अन्य पिछड़े वर्गों के बीच अपनी पैठ मजबूत करने के लिहाज से यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है।
सुभासपा की पकड़ और राजभर का आधार
ओमप्रकाश राजभर की SBSP की सबसे मजबूत पकड़ पूर्वांचल के जिलों—गाजीपुर, मऊ, बलिया, वाराणसी और आसपास के इलाकों में मानी जाती है। पार्टी का मुख्य आधार राजभर (OBC) समुदाय है, लेकिन इसके साथ ही यह अन्य पिछड़े वर्गों में भी अपनी पैठ बनाने की कोशिश करती रही है। राजभर खुद को पिछड़ों और वंचित वर्गों की आवाज के रूप में पेश करते हैं, यही वजह है कि गठबंधन की राजनीति में उनकी अहमियत बनी रहती है।
सीट बंटवारे को लेकर पहले से था तनाव
बताया जाता है कि 2024-25 के दौरान बिहार चुनावों को लेकर SBSP और NDA के बीच सीट बंटवारे पर तनाव की स्थिति बनी थी, जहां राजभर ने 4 से 5 सीटों की मांग की थी। इसी दौरान पार्टी के अंदर असंतोष और खींचतान की खबरें भी सामने आई थीं। ऐसे में प्रेम चंद्र कश्यप का पार्टी छोड़ना उसी असंतोष का परिणाम माना जा रहा है, जिसने अब खुलकर राजनीतिक रूप ले लिया है।
VIP पार्टी और ‘सन ऑफ मल्लाह’ की राजनीति
मुकेश साहनी विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के मुखिया हैं और उन्हें ‘सन ऑफ मल्लाह’ के नाम से जाना जाता है। उनकी राजनीति का मुख्य फोकस निषाद, मल्लाह, केवट, बिंद जैसी मछुआ और जल-आधारित समुदायों पर रहा है, जो सामाजिक रूप से अतिपिछड़े वर्ग (EBC) में आते हैं। साहनी खुद को इन वंचित समुदायों की आवाज के रूप में पेश करते हैं और इसी आधार पर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत कर रहे हैं।
पूर्वांचल में जातीय राजनीति का समीकरण
उत्तर प्रदेश का पूर्वांचल इलाका जातीय राजनीति का बड़ा केंद्र माना जाता है। यहां राजभर, निषाद, यादव, कुर्मी और दलित समुदायों का प्रभाव अलग-अलग सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाता है। छोटी-छोटी क्षेत्रीय पार्टियां इन्हीं जातीय समीकरणों के आधार पर अपनी रणनीति तय करती हैं। SBSP जहां राजभर वोट बैंक पर निर्भर रही है, वहीं VIP अब निषाद और मल्लाह समुदाय के जरिए अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
2027 चुनाव से पहले सियासी समीकरण
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए छोटी-छोटी जातीय और क्षेत्रीय पार्टियां अपनी ताकत बढ़ाने में जुट गई हैं। ये दल न सिर्फ अपने-अपने समुदायों में पकड़ मजबूत करना चाहते हैं, बल्कि बड़े राजनीतिक दलों के साथ संभावित गठबंधन में बेहतर स्थिति हासिल करने की कोशिश भी कर रहे हैं।
अब राजभर की प्रतिक्रिया पर नजर
इस पूरे घटनाक्रम के बाद जहां SBSP के भीतर बेचैनी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, वहीं VIP पार्टी को उत्तर प्रदेश में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का एक बड़ा मौका मिला है। अब सबकी नजर ओमप्रकाश राजभर की प्रतिक्रिया पर टिकी है, क्योंकि उनके करीबी नेता के जाने से पार्टी की संगठनात्मक मजबूती और आगामी चुनावी रणनीति दोनों पर सवाल खड़े हो गए हैं।
