गुजरात के अहमदाबाद से साइबर फ्रॉड का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें ठगों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर लोगों के आधार डेटा के साथ छेड़छाड़ की और बैंकिंग से जुड़ी ठगी को अंजाम दिया। इस मामले में साइबर क्राइम पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और पीड़ितों की तलाश कर रही है।
पुलिस के अनुसार, यह मामला 10 अप्रैल को सामने आया, जब थलतेज इलाके के एक व्यापारी ने शिकायत दर्ज कराई। उसने बताया कि उसके आधार कार्ड से जुड़ा मोबाइल नंबर बिना उसकी अनुमति के बदल दिया गया। इसके बाद उसके डिजिटल अकाउंट्स और बैंकिंग सेवाओं तक किसी अज्ञात व्यक्ति ने पहुंच बना ली। शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की और पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कानू परमार (32), आशीष वालंद (27), मोहम्मद कैफ पटेल (26) और दीप गुप्ता (29) के रूप में हुई है। पुलिस ने इन सभी को उनके घरों से गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि ये चारों एक संगठित गिरोह के रूप में काम कर रहे थे और हर व्यक्ति की अलग-अलग भूमिका थी।
पुलिस ने बताया कि आरोपी CSC (कॉमन सर्विस सेंटर) के जरिए आधार अपडेट किट हासिल करते थे। इन किट्स का इस्तेमाल कर वे अवैध तरीके से लोगों के आधार में दर्ज मोबाइल नंबर बदल देते थे। इसके बाद नया नंबर उनके कब्जे में होता था, जिससे वे OTP (वन टाइम पासवर्ड) हासिल कर लेते थे और पीड़ित के डिजिटल अकाउंट्स में घुस जाते थे।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि आरोपी AI तकनीक का इस्तेमाल कर रहे थे। वे लोगों की फोटो से “ब्लिंक वीडियो” यानी आंख झपकाने वाले छोटे वीडियो तैयार करते थे। इन वीडियो का इस्तेमाल बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन को धोखा देने के लिए किया जाता था। इससे वे KYC (Know Your Customer) प्रक्रिया को आसानी से पार कर लेते थे।
इस तकनीक की मदद से आरोपी DigiLocker, बैंकिंग ऐप्स और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में घुसपैठ करते थे। इसके बाद वे खातों की जानकारी बदलते, नए बैंक खाते खोलने की कोशिश करते और लोन लेने जैसी गतिविधियां भी करते थे।
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी डेटा लीक या अन्य अवैध तरीकों से लोगों का आधार डेटा, मोबाइल नंबर और फोटो हासिल करते थे। इसके बाद पूरे प्लान के तहत फ्रॉड को अंजाम दिया जाता था।
तकनीकी निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस ने इस गिरोह का पता लगाया और चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और मामले की जांच जारी है।
यह मामला इस बात की चेतावनी है कि साइबर अपराधी अब नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। अपने आधार से जुड़े मोबाइल नंबर, बैंकिंग जानकारी और OTP किसी के साथ साझा न करें। अगर कोई संदिग्ध गतिविधि नजर आए, तो तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क
करें।
