बिहार सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार, राज्य के उपमुख्यमंत्रियों विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव को Z श्रेणी की सुरक्षा देने का फैसला किया है। गृह विभाग द्वारा शनिवार को जारी निर्देश के मुताबिक, Z सुरक्षा में 22 सुरक्षाकर्मी, जिनमें 4–6 कमांडो शामिल होते हैं, तैनात किए जाते हैं।इस फैसले ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।


निशांत कुमार न तो विधायक हैं और न ही सरकार में मंत्री। उनके राजनीति में सक्रिय होने की शुरुआत भी हाल ही में हुई है। अधिकारी दावा कर रहे हैं कि वह पूर्व मुख्यमंत्री के परिवार से हैं पार्टी गतिविधियों में सक्रिय हुए हैं जल्द ही राज्यभर में राजनीतिक दौरे पर निकलेंगे इन्हीं कारणों से उन्हें सुरक्षा देने की बात की गई है।

लेकिन विपक्ष इसे पारिवारिक विशेषाधिकार (VIP culture) का मामला बता रहा है।


RJD ने सीधा सवाल खड़ा किया है जब तेजस्वी यादव जैसे बड़े नेता, लगातार यात्रा करने वाले और जनसभाओं में भीड़ से घिरने वाले नेता को Z+ सुरक्षा नहीं दी गई, तो राजनीतिक तौर पर अनुभवहीन निशांत कुमार को Z सुरक्षा की जरूरत कैसे पड़ गई?

पार्टी नेताओं ने कहा कि तेजस्वी को चुनावों के दौरान भी अक्सर खतरे की चेतावनियां मिलती रही हैं, लेकिन सुरक्षा का स्तर कभी नहीं बढ़ाया गया।RJD ने आरोप लगाया कि यह फैसला नीतीश कुमार के बेटे को विशेष सुविधा देने का उदाहरण है, न कि सुरक्षा के तर्क पर आधारित कदम।


कांग्रेस ने भी इस फैसले पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा बिहार में कानून-व्यवस्था जैसी भी हो, सत्ता पक्ष के परिवार के लिए सुरक्षा हमेशा प्रायोरिटी रहती है।आम लोग और छात्रों को सुरक्षा देने की बात होती है तो सरकार चुप रहती है।कांग्रेस नेताओं ने तंज कसा कि प्रदेश में लगातार अपराध और असुरक्षा की घटनाएँ बढ़ रही हैं, लेकिन सरकार का ध्यान “VIP सुरक्षा और राजनीतिक परिवारों की सुविधा” पर ज्यादा है।


सरकार के नोटिफिकेशन में बताया गया:

पूर्व मंत्री श्रवण कुमार को Y+ सुरक्षा मिली

बीजेपी नेता विजय सिन्हा की Z+ सुरक्षा घटाकर Z कर दी गई सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा दोनों के पास पहले Z+ सुरक्षा थी

ये बदलाव शुक्रवार को हुई सुरक्षा समीक्षा बैठक के बाद लागू किए गए।


नीतीश कुमार को पहले से Z+ सुरक्षा मिली हुई है और राज्यसभा सदस्य बनने के बाद भी यह जारी रहेगी।विपक्ष का कहना है कि सरकार राजनीतिक परिवारों के लिए सुरक्षा बढ़ा रही है, जबकि सरकार का दावा है कि यह कदम सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है।लेकिन सच यह है कि तेजस्वी से तुलना

कांग्रेस का सीधा तंज और निशांत कुमार को मिली प्राथमिकता इन तीनों ने मिलकर इस फैसले को एक पूरी राजनीतिक बहस में बदल दिया है।