IPL यानी इंडियन प्रीमियर लीग में हर मैच के बाद दिया जाने वाला ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ अवॉर्ड हमेशा चर्चा में रहता है। अक्सर दर्शकों के बीच यह सवाल उठता है कि आखिर यह फैसला कैसे लिया जाता है और कौन तय करता है कि किस खिलाड़ी का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। आमतौर पर लोग यही मानते हैं कि जिसने सबसे ज्यादा रन बनाए या सबसे ज्यादा विकेट लिए, वही इस अवॉर्ड का असली हकदार होता है, लेकिन असल प्रक्रिया इससे कहीं ज्यादा गहरी होती है।
दरअसल, इस अवॉर्ड का फैसला किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं लिया जाता, बल्कि मैच के दौरान मौजूद विशेषज्ञों और कमेंट्री टीम के सदस्य मिलकर यह निर्णय करते हैं। इस पैनल में पूर्व क्रिकेटर, विश्लेषक और ब्रॉडकास्ट टीम के सदस्य शामिल होते हैं, जो पूरे मैच को ध्यान से देखते हैं। मैच खत्म होने के बाद ये सभी आपस में चर्चा करते हैं और फिर उस खिलाड़ी का चयन करते हैं जिसने मुकाबले पर सबसे ज्यादा असर डाला हो।
सिर्फ आंकड़े नहीं, ‘इम्पैक्ट’ होता है सबसे बड़ा पैमाना
इस चयन प्रक्रिया में केवल आंकड़ों को ही महत्व नहीं दिया जाता, बल्कि यह देखा जाता है कि किस खिलाड़ी ने किस परिस्थिति में कैसा प्रदर्शन किया। कई बार ऐसा होता है कि कोई बल्लेबाज बड़ी पारी खेलता है, लेकिन उसका योगदान टीम को जीत दिलाने में निर्णायक नहीं होता, जबकि दूसरी ओर कोई खिलाड़ी कम रन बनाकर या कम विकेट लेकर भी मैच का रुख बदल देता है और वही ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ बन जाता है।
आईपीएल जैसे तेज और प्रतिस्पर्धात्मक टूर्नामेंट में मैच का हर पल अहम होता है। एक शानदार कैच, एक सटीक रन आउट या फिर दबाव भरे ओवर में की गई बेहतरीन गेंदबाजी पूरे मैच की दिशा बदल सकती है। यही वजह है कि बल्लेबाजी के साथ-साथ गेंदबाजी और फील्डिंग को भी बराबर महत्व दिया जाता है।
दिलचस्प बात यह है कि ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ के चयन के लिए कोई सख्त नियम तय नहीं है। हर मैच की परिस्थिति अलग होती है और उसी के अनुसार विशेषज्ञ अपना फैसला लेते हैं। यही कारण है कि कई बार यह निर्णय दर्शकों के लिए चौंकाने वाला भी साबित होता है।
कुल मिलाकर, आईपीएल में ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह उस खिलाड़ी को दिया जाता है जिसने अपने प्रदर्शन से मैच की दिशा तय की हो। इसलिए अगली बार जब यह अवॉर्ड दिया जाए, तो सिर्फ रन और विकेट नहीं, बल्कि पूरे मैच के प्रभाव को समझना जरूरी है—तभी इस फैसले की असली वजह साफ हो पाएगी।
