आज के डिजिटल दौर में जहां मोबाइल और टैबलेट बच्चों के खेलने का नया जरिया बनते जा रहे हैं, वहीं यह आदत अब खतरे की घंटी साबित हो रही है। All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) के डॉक्टरों ने हाल ही में एक अध्ययन के आधार पर चेतावनी दी है कि कम उम्र में बढ़ता स्क्रीन टाइम बच्चों के मानसिक विकास पर गंभीर असर डाल सकता है और इससे ऑटिज़्म जैसे लक्षणों का खतरा भी बढ़ सकता है।


डॉक्टरों के अनुसार, जो बच्चे 1 साल की उम्र से ही मोबाइल स्क्रीन के संपर्क में आ जाते हैं, उनमें 3 साल की उम्र तक सामाजिक व्यवहार में कमी, बातचीत में देरी और ध्यान की समस्या जैसे संकेत देखे जा सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि शुरुआती वर्षों में बच्चों का दिमाग तेजी से विकसित होता है और इस दौरान स्क्रीन की जगह इंसानी संपर्क जैसे माता पिता से बातचीत, खेल कूद और भावनात्मक जुड़ाव ज्यादा जरूरी होता है।


इस बीच, कई माता पिता की मजबूरी भी सामने आती है। कामकाजी जिंदगी में व्यस्त रहने वाले अभिभावक अक्सर बच्चों को शांत रखने के लिए मोबाइल दे देते हैं। बेंगलुरु की रहने वाली एक मां ने बताया, “जब तक मैं घर का काम करती हूं, मेरा 2 साल का बच्चा मोबाइल पर कार्टून देखता रहता है। मुझे लगा यह सामान्य है, लेकिन अब डर लग रहा है।” यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि लाखों घरों की हकीकत बन चुकी है।


बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन से पूरी तरह दूर रखना चाहिए, जबकि बड़े बच्चों के लिए भी स्क्रीन टाइम सीमित होना जरूरी है। इसके बजाय बच्चों को आउटडोर गेम्स, किताबों और परिवार के साथ समय बिताने के लिए प्रेरित करना चाहिए, ताकि उनका शारीरिक और मानसिक विकास संतुलित तरीके से हो सके।


AIIMS की यह चेतावनी सिर्फ एक रिसर्च नहीं, बल्कि हर माता-पिता के लिए एक संकेत है कि अगर अभी से बच्चों की स्क्रीन आदतों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं।