बिहार में एक बड़े क्रिप्टोकरेंसी घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें करीब 55 करोड़ रुपये की हेराफेरी सामने आई है। पुलिस ने इस मामले में एक संगठित गैंग को गिरफ्तार किया है, जो लंबे समय से लोगों को झांसा देकर ठगी कर रहा था।
पुलिस के अनुसार, आरोपी खुद को क्रिप्टो निवेश विशेषज्ञ बताकर लोगों को कम समय में ज्यादा मुनाफे का लालच देते थे। इसके लिए वे सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप और फर्जी वेबसाइट्स का इस्तेमाल करते थे। शुरुआत में निवेशकों को थोड़ा-बहुत मुनाफा दिखाकर भरोसा जीत लिया जाता था, जिसके बाद बड़ी रकम निवेश करवाई जाती थी।
जांच में खुलासा हुआ है कि यह गैंग मल्टी-लेयर नेटवर्क के जरिए काम करता था और देश के कई राज्यों में अपने तार फैला चुका था। ठगी की रकम को अलग-अलग खातों और डिजिटल वॉलेट्स में ट्रांसफर कर ट्रैकिंग से बचने की कोशिश की जाती थी।
पुलिस ने छापेमारी के दौरान आरोपियों के पास से लैपटॉप, मोबाइल फोन, बैंक दस्तावेज और फर्जी आईडी बरामद किए हैं। साथ ही कई बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है, जिनमें करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ था।
अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में और भी लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है। पुलिस अब गैंग के अन्य सदस्यों और पीड़ितों की पहचान करने में जुटी हुई है।
आम लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी अनजान क्रिप्टो स्कीम या जल्दी अमीर बनने के वादों पर भरोसा न करें और निवेश से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें।
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि डिजिटल निवेश के बढ़ते दौर में सतर्क रहना बेहद जरूरी है, वरना थोड़ी सी लापरवाही भारी नुकसान का कारण बन सकती है।
