मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुए दर्दनाक बोट हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में कई लोगों की जान चली गई, लेकिन सबसे ज्यादा लोगों को उस तस्वीर ने भावुक कर दिया जिसमें एक मां अपने छोटे बेटे को सीने से लगाए नजर आई। अब इस घटना को लेकर बच्चे के पिता ने ऐसा खुलासा किया है जिसने सोशल मीडिया पर भी लोगों को हैरान कर दिया है।

यह हादसा 30 अप्रैल 2026 को जबलपुर में हुआ था। हादसे में चार साल के त्रिशान और उसकी मां की मौत हो गई थी। परिवार घूमने के लिए बोट राइड पर गया था, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा। अब हादसे के कुछ दिनों बाद बच्चे के पिता प्रदीप कुमार ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनके बेटे को जैसे पहले ही किसी अनहोनी का एहसास हो गया था।

प्रदीप कुमार ने एक इंटरव्यू में बताया कि उनका बेटा बोट में बैठने से पहले काफी डरा हुआ था। आमतौर पर बच्चे पानी और बोट राइड को लेकर उत्साहित रहते हैं, लेकिन त्रिशान बार-बार पानी में जाने से मना कर रहा था। पिता के मुताबिक बच्चे ने कहा था, “पापा पानी में नहीं जाना चाहिए, लोग पानी में डूब जाते हैं।” उस समय परिवार ने इसे बच्चे का सामान्य डर समझा और ज्यादा ध्यान नहीं दिया।

प्रदीप कुमार ने बताया कि बोट के अंदर भी उनका बेटा लगातार घबराया हुआ था। उन्होंने कहा कि जब वह बेटे को गोद में लेकर बैठे थे, तब अचानक बच्चे ने पूछा, “पापा, हम डूब रहे हैं क्या?” यह सुनकर उन्होंने बेटे को डांट दिया, क्योंकि उस समय मौसम सामान्य था और किसी को खतरे का अंदाजा नहीं था। लेकिन अब हादसे के बाद उन्हें लगता है कि शायद उनके बेटे को किसी अनहोनी का पहले ही एहसास हो गया था।

बेटे की यह बात अब पिता के दिल और दिमाग से नहीं निकल रही है। उन्होंने भावुक होकर कहा, “मुझे लगता है मेरे बेटे को कुछ दिख गया था।” सोशल मीडिया पर भी लोग इस घटना को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग इसे संयोग बता रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि बच्चों को कई बार ऐसी चीजों का एहसास हो जाता है जो बड़े समझ नहीं पाते।

त्रिशान की बड़ी बहन सिया ने भी बताया कि घर से निकलते समय उसका छोटा भाई पानी में जाने से मना कर रहा था। उसने कहा था, “पापा पानी में नहीं जाना चाहिए।” परिवार ने सोचा कि वह सिर्फ डर रहा है, लेकिन अब वही बातें सबको अंदर तक तोड़ रही हैं।

हादसे के बाद परिवार की जिंदगी पूरी तरह बदल गई है। प्रदीप कुमार और उनकी बेटी किसी तरह वापस दिल्ली लौट आए हैं, लेकिन घर का हर कोना उन्हें अपने बेटे और पत्नी की याद दिलाता है। उन्होंने बताया कि यात्रा पर ले जाए गए बैग अब तक वैसे ही रखे हुए हैं। उनकी पत्नी ने खुद उन बैग्स की पैकिंग की थी, लेकिन हादसे के बाद परिवार में किसी की हिम्मत नहीं हुई कि उन्हें खोल सके।

प्रदीप कुमार ने कहा, “जब भी उन सामानों को देखते हैं, उनकी यादें ताजा हो जाती हैं।” उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट से घर लौटने के बाद से अब तक बैग उसी हालत में पड़े हैं। बेटे और पत्नी का सामान खोलने की हिम्मत परिवार नहीं जुटा पा रहा है। हर छोटी चीज उन्हें उस दर्दनाक हादसे की याद दिलाती है।

यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि एक ऐसा दर्द है जिसने पूरे परिवार को तोड़ दिया है। सोशल मीडिया पर लोग परिवार के लिए संवेदना जता रहे हैं और बच्चे की बातों को सुनकर भावुक हो रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि बच्चों की बातों को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि कई बार उनकी मासूम बातें भी गहरे संकेत दे जाती हैं।

जबलपुर बोट हादसे की यह कहानी अब लोगों के दिलों को छू रही है। एक पिता का दर्द, बेटे की मासूम बातें और परिवार की टूटी हुई दुनिया ने हर किसी को भावुक करदिया है।