
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित एक बाल गृह से 10 बच्चों के अचानक गायब होने की खबर ने प्रशासन और पुलिस विभाग में हड़कंप मचा दिया है। खास बात यह है कि इस बाल गृह का उद्घाटन खुद बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने किया था। घटना सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
यह मामला मुजफ्फरपुर के मुशहरी थाना क्षेत्र के नरौली स्थित “वृहद आश्रय गृह” से जुड़ा हुआ है। इस परिसर में बाल गृह बालक संचालित किया जा रहा है, जहां अनाथ, बेसहारा और विशेष देखभाल की जरूरत वाले बच्चों को रखा जाता है। बताया जा रहा है कि यहां कुल 46 बच्चे रह रहे थे, जिनमें से 10 बच्चे अचानक लापता हो गए।
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। मुशहरी थाना पुलिस के साथ एसडीएम पूर्वी तुषार कुमार और डीएसपी पूर्वी-2 मनोज कुमार सिंह ने बाल गृह पहुंचकर जांच शुरू की। अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया और कर्मचारियों से पूछताछ की। हालांकि खबर लिखे जाने तक बच्चों के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई थी।
प्रशासन का मानना है कि बच्चे देर रात बाल गृह से बाहर निकले या फरार हुए हैं। फिलहाल पुलिस आसपास के इलाकों में तलाश अभियान चला रही है। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी बच्चों की खोज की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बच्चे खुद भागे हैं या इसके पीछे किसी और का हाथ है।
एसडीएम पूर्वी तुषार कुमार ने कहा कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। शुरुआती जांच में सुरक्षा व्यवस्था में कई कमियां सामने आई हैं। उन्होंने बताया कि बाल गृह में निगरानी और सुरक्षा को लेकर जरूरी इंतजाम पूरी तरह मजबूत नहीं थे। अब यह जांच की जा रही है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में बच्चे एक साथ कैसे गायब हो गए।
डीएसपी मनोज कुमार सिंह ने भी कहा कि पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण जानकारी मिली है और बच्चों की तलाश जारी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही बच्चों का पता लगाने की कोशिश की जाएगी। प्रशासन ने बाल गृह के कर्मचारियों और अधिकारियों से भी पूछताछ शुरू कर दी है।
यह घटना इसलिए भी ज्यादा चर्चा में है क्योंकि इस “वृहद आश्रय गृह” का उद्घाटन जनवरी 2025 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी “प्रगति यात्रा” के दौरान किया था। उस समय इसे बच्चों की सुरक्षा और बेहतर देखभाल के लिए आधुनिक सुविधा केंद्र बताया गया था। सरकार का दावा था कि यहां रहने वाले बच्चों को सुरक्षित माहौल, शिक्षा और जरूरी सुविधाएं दी जाएंगी। लेकिन अब 10 बच्चों के गायब होने की घटना ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बिहार में “वृहद आश्रय गृह” मुख्यमंत्री बाल आश्रय विकास योजना के तहत बनाए गए हैं। इनका उद्देश्य अनाथ, निराश्रित और जरूरतमंद बच्चों को सुरक्षित आश्रय देना है। ऐसे में इस तरह की घटना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर बाल गृह जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली जगह से बच्चे गायब हो सकते हैं, तो यह बेहद चिंता की बात है। लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
