तमिलनाडु में नई सरकार के गठन के साथ ही मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने यह साफ संकेत दे दिया है कि उनकी राजनीति केवल जनसभाओं और बड़े वादों तक सीमित नहीं रहने वाली, बल्कि प्रशासनिक नियंत्रण और तेज फैसलों पर भी उनका पूरा फोकस रहेगा। शपथ ग्रहण के कुछ ही घंटों के भीतर मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की तैनाती और नए प्रशासनिक ढांचे के गठन ने यह संकेत दिया कि विजय अपनी सरकार को शुरुआत से ही “कमान केंद्रित मॉडल” पर चलाना चाहते हैं। राज्य की राजनीति में लंबे समय तक फिल्मी स्टार इमेज के साथ देखे जाने वाले विजय ने सत्ता संभालते ही नौकरशाही में जो तेजी दिखाई, उसने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। सवाल उठने लगे हैं कि क्या तमिलनाडु अब एक ऐसे प्रशासनिक दौर में प्रवेश कर रहा है जहां मुख्यमंत्री कार्यालय पहले से अधिक शक्तिशाली और निर्णायक भूमिका निभाएगा?
मुख्यमंत्री कार्यालय में दो बड़े आईएएस अधिकारियों की एंट्री
सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. पी. सेंथिलकुमार को मुख्यमंत्री का प्रमुख प्रशासनिक सहयोगी बनाया है। वे पहले स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत थे। अब उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय में “सचिव-1” और अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही जी. लक्ष्मी प्रिया को भी मुख्यमंत्री कार्यालय में “सचिव-2” नियुक्त किया गया है। वे पहले आदि द्रविड़ और जनजातीय कल्याण विभाग में सचिव थीं। प्रशासनिक अनुभव और फील्ड मैनेजमेंट में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। सरकार ने केवल अधिकारियों की पोस्टिंग ही नहीं की, बल्कि मुख्यमंत्री कार्यालय में दो अस्थायी आईएएस कैडर पद भी सृजित किए हैं। यह कदम बताता है कि विजय सरकार मुख्यमंत्री कार्यालय को एक शक्तिशाली निर्णय केंद्र के रूप में विकसित करना चाहती है, जहां से विभागों की मॉनिटरिंग और नीतिगत फैसलों की सीधी निगरानी होगी।
क्यों अहम मानी जा रही हैं ये नियुक्तियां?
तमिलनाडु की राजनीति में मुख्यमंत्री कार्यालय हमेशा प्रभावशाली रहा है, लेकिन विजय सरकार के शुरुआती फैसले यह संकेत देते हैं कि वे “हाई कमान शैली के शासन” की ओर बढ़ सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय को प्रशासनिक अनुभव नहीं है, इसलिए वे शुरुआती दौर में भरोसेमंद और अनुभवी नौकरशाहों की मजबूत टीम बनाकर शासन को स्थिर करना चाहते हैं। डॉ. सेंथिलकुमार को स्वास्थ्य प्रशासन में संकट प्रबंधन का अनुभव है। कोविड काल के दौरान उनकी कार्यशैली की चर्चा रही थी। वहीं लक्ष्मी प्रिया को सामाजिक कल्याण और जमीनी प्रशासन की समझ रखने वाली अधिकारी माना जाता है। ऐसे में एक अधिकारी नीति और सिस्टम मैनेजमेंट संभालेंगे, जबकि दूसरी अधिकारी सामाजिक योजनाओं और कल्याणकारी कार्यक्रमों की निगरानी कर सकती हैं।
विजय का प्रशासनिक मॉडल क्या होगा?
मुख्यमंत्री बनने से पहले विजय ने अपनी राजनीति को भ्रष्टाचार विरोध, पारदर्शिता और “जनता केंद्रित शासन” के इर्द-गिर्द खड़ा किया था। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने बार-बार कहा था कि सरकारी मशीनरी को जनता के प्रति जवाबदेह बनाया जाएगा। अब शुरुआती प्रशासनिक फैसलों को उसी दिशा में पहला कदम माना जा रहा है।सूत्रों के मुताबिक, विजय सरकार आने वाले दिनों में कई विभागों में व्यापक फेरबदल कर सकती है। विशेष रूप से गृह, राजस्व, नगर प्रशासन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विभागों में नई टीम तैयार करने की तैयारी चल रही है। सरकार का फोकस उन अधिकारियों पर रहने की संभावना है जिनकी छवि तेज, साफ और राजनीतिक विवादों से दूर रही है।
प्रोटेम स्पीकर का ऐलान भी राजनीतिक संकेत
प्रशासनिक बदलावों के साथ सरकार ने विधानसभा के लिए प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति भी कर दी। इसे केवल संवैधानिक प्रक्रिया भर नहीं माना जा रहा, बल्कि नई सरकार की राजनीतिक प्राथमिकताओं का हिस्सा भी समझा जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि विजय फिलहाल दो मोर्चों पर काम कर रहे हैं- एक तरफ वे अपनी “जनप्रिय” छवि बनाए रखना चाहते हैं, दूसरी ओर प्रशासनिक ढांचे पर मजबूत पकड़ बनाकर यह संदेश देना चाहते हैं कि उनकी सरकार केवल प्रतीकात्मक नहीं होगी।
क्या विजय की चुनौती अब शुरू हुई है?
फिल्मी दुनिया में अपार लोकप्रियता और चुनावी जीत के बाद अब विजय की सबसे बड़ी परीक्षा शासन क्षमता को साबित करने की होगी। चुनावी मंचों पर किए गए लोकलुभावन वादों, मुफ्त योजनाओं और आर्थिक दबावों के बीच सरकार को संतुलन बनाना होगा। ऐसे में मजबूत मुख्यमंत्री कार्यालय बनाना विजय की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। यह मॉडल सफल होता है या नहीं, यह आने वाले महीनों में पता चलेगा, लेकिन इतना तय है कि तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन के साथ प्रशासनिक शैली भी तेजी से बदलती दिखाई दे रही है। विजय ने अपने पहले ही दिन यह संदेश दे दिया है कि उनकी सरकार केवल राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि सत्ता संचालन की नई कार्यशैली भी लेकर आई है।
