
मध्य पूर्व में पिछले दो महीनों से जारी तनाव और संघर्ष के बीच अब शांति वार्ता को लेकर बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। ईरान ने अमेरिका द्वारा दिए गए 14 सूत्रीय शांति प्रस्ताव पर अपना जवाब पाकिस्तान के जरिए भेज दिया है। इस खबर के सामने आने के बाद पूरी दुनिया की नजर खाड़ी क्षेत्र और खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट पर टिक गई है, क्योंकि यहां बढ़ता तनाव वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान इस पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने भी पुष्टि की है कि ईरान का जवाब अमेरिका तक पहुंचा दिया गया है। अब अमेरिकी प्रशासन इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच जल्द ही पाकिस्तान में शांति वार्ता हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार, ईरान ने अपने जवाब में सबसे पहले क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई रोकने और तनाव कम करने की मांग की है। ईरान का कहना है कि सिर्फ एक इलाके में नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में युद्ध और संघर्ष खत्म होना चाहिए। इसमें लेबनान समेत अन्य मोर्चों पर भी शांति की शर्त रखी गई है।
हालांकि अभी तक ईरान के जवाबी प्रस्ताव की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन खबरें हैं कि दोनों देश फिलहाल एक अस्थायी समझौते पर काम कर रहे हैं। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री यातायात को सामान्य बनाए रखना है।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचती है। अगर इस रास्ते में तनाव बढ़ता है, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
तनाव के बीच कई खाड़ी देशों ने ड्रोन हमलों के दावे भी किए हैं। संयुक्त अरब अमीरात ने कहा कि उसने ईरान से जुड़े दो ड्रोन हमलों को नाकाम किया है। वहीं कुवैत ने भी दावा किया कि उसकी हवाई सीमा में कई ड्रोन घुसे थे, जिन्हें रोक लिया गया। हालांकि ईरान ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
इसी बीच कतर के तट के पास एक जहाज में ड्रोन हमले के बाद आग लगने की खबर भी सामने आई। हालांकि इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। हालात को देखते हुए अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम का कहना है कि अब तक 61 जहाजों को सुरक्षित तरीके से होर्मुज स्ट्रेट से वापस भेजा जा चुका है। वहीं कुछ जहाजों को निष्क्रिय भी किया गया है। इसके बावजूद समुद्री मार्ग पर तनाव बना हुआ है।
तनाव के बीच राहत की बात यह रही कि कतर और पनामा के झंडे वाले दो मालवाहक जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार करने में सफल रहे। इनमें कतर एनर्जी का एलएनजी जहाज भी शामिल था, जो पाकिस्तान की ओर रवाना हुआ। बताया जा रहा है कि खाड़ी संकट शुरू होने के बाद यह पहला बड़ा एलएनजी जहाज था जिसने सुरक्षित रूप से यह रास्ता पार किया।
दूसरी तरफ ईरान की सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने अमेरिका को सख्त चेतावनी दी है। ईरान ने कहा है कि अगर उसके तेल टैंकरों या व्यापारिक जहाजों पर हमला हुआ, तो अमेरिकी सैन्य ठिकानों और युद्धपोतों को निशाना बनाया जाएगा।
ईरान ने फ्रांस और ब्रिटेन की उस योजना पर भी नाराजगी जताई है, जिसमें दोनों देश होर्मुज स्ट्रेट में अपने युद्धपोत तैनात करने पर विचार कर रहे हैं। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर ऐसा हुआ तो उसका “निर्णायक जवाब” दिया जाएगा।
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि अमेरिका ईरान की परमाणु गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि अगर कोई खतरनाक गतिविधि सामने आई, तो अमेरिका तुरंत कार्रवाई करेगा।
वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा कि बातचीत का मतलब आत्मसमर्पण नहीं होता, बल्कि यह देश के हितों की रक्षा का तरीका है। उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अपनी सुरक्षा से समझौता भी नहीं करेगा।
इसके अलावा ईरान के खार्ग द्वीप के पास समुद्र में तेल रिसाव की खबरें भी सामने आई हैं। कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि हजारों बैरल तेल समुद्र में फैल गया है। हालांकि ईरान ने इन खबरों को पूरी तरह गलत बताया है और कहा है कि जांच में किसी तरह के तेल रिसाव के सबूत नहीं मिले हैं।
