कभी बिजनेस की दुनिया में अपने फैसलों से चर्चा में रहने वालीं, तो कभी सामाजिक मुद्दों पर बेबाक राय रखने वालीं नमिता थापर इस बार एक अलग वजह से सुर्खियों में हैं। एक छोटा सा वीडियो, जिसमें उन्होंने नमाज़ के स्वास्थ्य लाभ बताए, देखते ही देखते विवाद का कारण बन गया—और फिर शुरू हुआ ट्रोलिंग का सिलसिला।
मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा। नमिता के मुताबिक, यह आलोचना व्यक्तिगत हमलों में बदल गई। उन्होंने एक नए वीडियो के जरिए अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि पिछले कई हफ्तों से उन्हें लगातार गालियां दी जा रही हैं, यहां तक कि उनकी मां को भी अपशब्दों का सामना करना पड़ा।
उनकी नाराज़गी सिर्फ ट्रोल्स से नहीं, बल्कि उस सोच से भी है जो धर्म और महिलाओं के सम्मान को लेकर दोहरे मानदंड अपनाती है। नमिता कहती हैं कि उन्होंने हमेशा हर धर्म का सम्मान किया है। वह बताती हैं कि योग, सूर्य नमस्कार और अन्य स्वास्थ्य से जुड़े अभ्यासों पर भी उन्होंने पहले वीडियो बनाए हैं, लेकिन तब ऐसी प्रतिक्रिया नहीं आई।
उनका सवाल साफ है—अगर स्वास्थ्य के नजरिए से किसी भी धर्म की बात की जाए, तो उसे विवाद क्यों बना दिया जाता है? और जब बात महिलाओं के सम्मान की आती है, तो समाज चुप क्यों हो जाता है?
इस पूरे विवाद के बीच नमिता ने झुकने के बजाय खुलकर जवाब देना चुना। उन्होंने साफ कहा कि उन्हें अपने धार्मिक होने पर गर्व है और वह आगे भी अपनी बात रखती रहेंगी।

यह घटना सिर्फ एक सोशल मीडिया विवाद नहीं, बल्कि उस बदलते माहौल की झलक है जहां विचार रखना आसान नहीं रह गया है। नमिता की प्रतिक्रिया यह भी दिखाती है कि सार्वजनिक जीवन में रहने वालों के लिए निजी हमलों का सामना करना कितना चुनौतीपूर्ण हो सकता है—और फिर भी अपनी बात पर टिके रहना एक अलग तरह की हिम्मत मांगता है।
