उत्तर भारत में तपती धूप और लू के बढ़ते कहर के बीच दिल्ली के Dr. Ram Manohar Lohia Hospital ने हीट स्ट्रोक से जूझ रहे मरीजों के लिए खास तैयारी की है। अस्पताल में एक स्पेशल यूनिट बनाई गई है, जहां ‘कोल्ड वॉटर इमर्शन’ तकनीक के जरिए गंभीर मरीजों को तेजी से राहत देने की कोशिश हो रही है। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब मौसम विभाग पहले ही भीषण गर्मी की चेतावनी दे चुका है।


इस यूनिट में इलाज का तरीका थोड़ा अलग है, लेकिन बेहद असरदार माना जा रहा है। मरीज को बर्फ से भरे ठंडे पानी के टब में रखा जाता है, जिसमें करीब 50 किलो तक बर्फ डाली जाती है। शरीर का तापमान तेजी से कम करने के लिए यह प्रक्रिया अपनाई जाती है, क्योंकि हीट स्ट्रोक में हर मिनट कीमती होता है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर समय रहते शरीर का तापमान नियंत्रित कर लिया जाए, तो गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।


अस्पताल ने सिर्फ इलाज ही नहीं, बल्कि इसकी पूरी प्रक्रिया को समझाने के लिए डेमो भी किया है। इसमें दिखाया गया कि मरीज को इस तरह टब में रखा जाता है कि उसका सिर बाहर रहे और बाकी शरीर ठंडे पानी में डूबा रहे। इलाज के दौरान लगातार मॉनिटरिंग की जाती है दिल की धड़कन, ऑक्सीजन लेवल और शरीर के तापमान पर खास नजर रखी जाती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, जब शरीर का तापमान 104–105 डिग्री फॉरेनहाइट तक पहुंच जाता है, तो स्थिति बेहद खतरनाक हो जाती है। ऐसे में शरीर की तापमान नियंत्रित करने की क्षमता जवाब देने लगती है। यही वजह है कि इस तकनीक के जरिए 25 से 35 मिनट के भीतर शरीर का तापमान करीब 38 डिग्री सेल्सियस तक लाने की कोशिश की जाती है। देरी होने पर मल्टी ऑर्गन फेलियर का खतरा बढ़ सकता है।


अस्पताल ने इमरजेंसी हालात को देखते हुए इन्फ्लेटेबल टब और फील्ड में इस्तेमाल होने वाली ‘टाको तकनीक’ भी तैयार रखी है। इसमें तिरपाल और बर्फ की मदद से मौके पर ही शरीर को ठंडा किया जाता है, ताकि मरीज को अस्पताल पहुंचने तक प्राथमिक राहत मिल सके।

डॉक्टरों की मानें तो कुछ लोग ज्यादा जोखिम में हैं जैसे सिक्योरिटी गार्ड, कंस्ट्रक्शन वर्कर, पुलिसकर्मी, गर्भवती महिलाएं और मीडियाकर्मी, जो लंबे समय तक धूप में रहते हैं। ऐसे में उनके लिए सतर्क रहना बेहद जरूरी है।