तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय मूल के कुख्यात ड्रग माफिया सलीम डोला को एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन के तहत हिरासत में लिया गया है। यह कार्रवाई तुर्की की सुरक्षा एजेंसियों और खुफिया तंत्र की संयुक्त कोशिशों का परिणाम मानी जा रही है। सलीम डोला लंबे समय से वैश्विक ड्रग तस्करी नेटवर्क का अहम हिस्सा था और उस पर आरोप है कि वह कई देशों में फैले सिंथेटिक ड्रग्स के कारोबार को संचालित कर रहा था।
जांच एजेंसियों के अनुसार, उसके नेटवर्क के तार भारत के मोस्ट वांटेड अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से जुड़े हुए हैं। माना जाता है कि वह दाऊद के आपराधिक नेटवर्क के लिए वित्तीय और लॉजिस्टिक सपोर्ट का काम करता था, खासकर ड्रग्स के जरिए होने वाली कमाई के माध्यम से। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह नेटवर्क सालाना हजारों करोड़ रुपये का अवैध कारोबार करता था और इसका प्रभाव एशिया, यूरोप और मिडिल ईस्ट तक फैला हुआ था।
सलीम डोला पहले भारत, खासकर मुंबई में सक्रिय था, लेकिन बाद में वह विदेश भाग गया और दुबई समेत कई देशों से अपना नेटवर्क संचालित करने लगा। उसके खिलाफ भारत में कई गंभीर मामले दर्ज हैं, जिनमें ड्रग तस्करी, संगठित अपराध और अवैध वित्तीय लेनदेन शामिल हैं। इंटरपोल ने उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी कर रखा था, जिसके चलते वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वांछित अपराधी था।
भारत की नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और अन्य जांच एजेंसियां लंबे समय से उसकी तलाश में थीं। उसकी गिरफ्तारी को भारतीय एजेंसियों के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है, क्योंकि इससे न सिर्फ ड्रग तस्करी के नेटवर्क को झटका लगेगा बल्कि अंडरवर्ल्ड के कई गहरे राज भी सामने आ सकते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल उसके प्रत्यर्पण का है। तुर्की से सीधे भारत लाना कानूनी रूप से जटिल हो सकता है, इसलिए कोशिश की जा रही है कि उसे किसी तीसरे देश, जैसे यूएई के जरिए भारत लाया जाए। अगर उसका प्रत्यर्पण सफल होता है, तो उससे पूछताछ में अंतरराष्ट्रीय ड्रग रैकेट और दाऊद गैंग के कई अहम कनेक्शन उजागर हो सकते हैं
