आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन और इंटरनेट ने पोर्न सामग्री तक पहुंच बेहद आसान बना दी है। किशोरों से लेकर युवाओं और वयस्कों तक बड़ी संख्या में लोग पोर्न देखते हैं। लेकिन इसके साथ ही एक बहस लगातार तेज होती जा रही है- क्या पोर्न देखने से शरीर कमजोर होता है? क्या इससे टेस्टोस्टेरोन कम होता है? क्या यह यौन जीवन और मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है?
इन सवालों को लेकर वैज्ञानिकों, मनोवैज्ञानिकों और हेल्थ एक्सपर्ट्स की कई रिसर्च सामने आई हैं। मौजूदा अध्ययनों के मुताबिक, पोर्न देखने को लेकर कई धारणाएं पूरी तरह सही नहीं हैं, लेकिन इसके कुछ मानसिक और व्यवहारिक प्रभाव जरूर देखे गए हैं।
क्या पोर्न देखने से टेस्टोस्टेरोन कम होता है?
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक अब तक ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है कि पोर्न देखने से टेस्टोस्टेरोन स्थायी रूप से कम हो जाता है। कई रिसर्च में पाया गया कि यौन उत्तेजना के दौरान शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर थोड़े समय के लिए बढ़ सकता है। बाद में यह सामान्य स्तर पर लौट आता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पोर्न सीधे हार्मोन को खत्म नहीं करता, लेकिन जरूरत से ज्यादा उपयोग व्यक्ति की मानसिक स्थिति, नींद और व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। यही चीजें आगे चलकर ऊर्जा, आत्मविश्वास और यौन जीवन पर असर डाल सकती हैं।
ज्यादा पोर्न देखने से दिमाग पर पड़ सकता है असर
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार पोर्न देखने पर दिमाग में डोपामाइन नाम का केमिकल रिलीज होता है, जो खुशी और उत्तेजना से जुड़ा होता है। लगातार और अत्यधिक पोर्न देखने से दिमाग उसी स्तर की उत्तेजना का आदी हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, जरूरत से ज्यादा पोर्न देखने वाले लोगों में कुछ सामान्य लक्षण देखे गए हैं: बार-बार पोर्न देखने की इच्छा, पढ़ाई और काम में ध्यान की कमी, असली रिश्तों में रुचि कम होना, अपराधबोध और तनाव, अकेलेपन की आदत बढ़ना, नींद और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होना ! हालांकि डॉक्टर यह भी कहते हैं कि हर व्यक्ति पर इसका असर अलग-अलग हो सकता है।
क्या पोर्न से यौन संबंधों पर असर पड़ता है?
कुछ अध्ययनों में पाया गया कि अत्यधिक पोर्न देखने वाले लोगों में वास्तविक संबंधों के दौरान संतुष्टि कम हो सकती है। इसकी वजह यह मानी जाती है कि व्यक्ति का दिमाग कृत्रिम उत्तेजना का आदी हो जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक इससे कुछ लोगों में ये समस्याएं देखी गईं: पार्टनर से अवास्तविक अपेक्षाएं, रिश्तों में तनाव, यौन प्रदर्शन को लेकर चिंता, वास्तविक संबंधों में रुचि कम होना! हालांकि कुछ मनोवैज्ञानिक यह भी मानते हैं कि सीमित मात्रा में और आपसी सहमति से देखा गया कंटेंट कुछ कपल्स के बीच संवाद बेहतर करने में मदद कर सकता है।
“नोफैप” दावों पर क्या कहती है रिसर्च?
सोशल मीडिया पर “नोफैप” जैसे कैंपेन दावा करते हैं कि पोर्न और हस्तमैथुन छोड़ने से टेस्टोस्टेरोन बहुत बढ़ जाता है और शरीर में जबरदस्त बदलाव आते हैं। लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक इन दावों को लेकर अभी पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं हैं। कुछ छोटे अध्ययनों में अस्थायी बदलाव जरूर देखे गए, लेकिन लंबे समय तक टेस्टोस्टेरोन बढ़ने का ठोस सबूत नहीं मिला।
असली खतरा किन चीजों से?
डॉक्टरों का कहना है कि टेस्टोस्टेरोन कम होने के पीछे मुख्य कारण ये होते हैं: लगातार तनाव, खराब नींद, मोटापा, व्यायाम की कमी, शराब और नशा, अस्वस्थ जीवनशैली! विशेषज्ञों के मुताबिक, स्वस्थ दिनचर्या और मानसिक संतुलन शरीर के हार्मोन पर ज्यादा असर डालते हैं।
कब लें डॉक्टर की सलाह?
अगर किसी व्यक्ति को लगातार थकान, तनाव, यौन इच्छा में कमी, ध्यान भटकना या पोर्न देखने की आदत पर नियंत्रण न रहने जैसी समस्या हो रही है, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है।
विशेषज्ञ क्या सलाह देते हैं?
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार पोर्न की आदत को नियंत्रित करने के लिए ये तरीके मददगार हो सकते हैं: स्क्रीन टाइम कम करना, नियमित व्यायाम और योग, पर्याप्त नींद लेना, सोशल लाइफ और रिश्तों पर ध्यान देना, नई हॉबी विकसित करना, जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग लेना !
