मानव शरीर एक बहुत ही संतुलित तापमान पर काम करता है। सामान्य परिस्थितियों में शरीर का “कोर टेम्परेचर” लगभग 36.5°C से 37.5°C के बीच रहता है। इसी रेंज में दिमाग, दिल, किडनी और बाकी अंग सबसे बेहतर तरीके से काम करते हैं। जैसे ही बाहरी गर्मी इस संतुलन को बिगाड़ती है, शरीर उसे ठीक रखने की कोशिश करता है।

जब बाहर का तापमान लगभग 35°C से ऊपर जाता है, तो शरीर पसीना निकालकर खुद को ठंडा करने लगता है। पसीना वाष्पित होकर शरीर की गर्मी को कम करता है। अगर हवा में नमी बहुत ज्यादा हो, तो पसीना ठीक से सूख नहीं पाता और शरीर ज्यादा गर्म होने लगता है।

अगर शरीर का तापमान 38°C से 39°C तक पहुंच जाए, तो थकान, चक्कर, कमजोरी और डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण दिखने लगते हैं। यह स्थिति हीट स्ट्रेस (heat stress) कहलाती है। इस समय शरीर पर दबाव बढ़ जाता है, लेकिन अभी अंग स्थायी रूप से खराब नहीं होते।

जब शरीर का तापमान 40°C के करीब पहुंचता है, तो स्थिति गंभीर होने लगती है। दिमाग का नियंत्रण प्रभावित होने लगता है, व्यक्ति भ्रमित हो सकता है, बेहोशी भी आ सकती है। दिल की धड़कन तेज हो जाती है और ब्लड प्रेशर असंतुलित होने लगता है।

लगभग 41°C से 42°C के बीच शरीर के अंदर एंजाइम और प्रोटीन ठीक से काम करना बंद करने लगते हैं। यही वह बिंदु है जहां अंगों पर सीधा असर पड़ने लगता है। किडनी, लिवर और दिमाग जैसे महत्वपूर्ण अंग तनाव में आ जाते हैं।

अगर शरीर का तापमान 42°C से ऊपर चला जाए, तो यह जानलेवा स्थिति बन सकती है। इसे हीट स्ट्रोक कहा जाता है। इसमें शरीर का तापमान कंट्रोल सिस्टम फेल हो जाता है और तुरंत इलाज न मिलने पर अंग स्थायी रूप से खराब हो सकते हैं।

बहुत ज्यादा गर्मी में सिर्फ तापमान ही नहीं, बल्कि “वेट बल्ब टेम्परेचर” भी महत्वपूर्ण होता है। अगर यह लगभग 35°C के आसपास पहुंच जाए, तो मानव शरीर पसीना निकालकर भी खुद को ठंडा नहीं कर पाता, और बाहर रहना घातक हो सकता है।

लंबे समय तक गर्मी में रहने से शरीर में पानी और नमक की कमी हो जाती है। इससे खून गाढ़ा हो सकता है, जिससे दिल पर दबाव बढ़ता है और ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है। यह स्थिति भी अंगों के लिए खतरनाक हो सकती है।

बच्चे, बुजुर्ग और पहले से बीमार लोग गर्मी को कम सहन कर पाते हैं। उनके शरीर की तापमान नियंत्रण प्रणाली कमजोर होती है, इसलिए उनमें हीट स्ट्रोक का खतरा ज्यादा होता है।

कुल मिलाकर, मानव शरीर कुछ समय के लिए उच्च तापमान सह सकता है, लेकिन लगातार 40°C से ऊपर का शरीर तापमान और अत्यधिक आर्द्रता मिलकर बहुत जल्दी जानलेवा स्थिति पैदा कर सकते हैं। इसलिए गर्मी में हाइड्रेशन और ठंडे वातावरण में रहना बेहद जरूरी होता है।