Rat Borne Infection: इसके शुरुआती लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि किसी को भी लगेगा कि यह मौसम बदलने से हुई साधारण बीमारी है। मरीज को बुखार, थकान, सिरदर्द, शरीर में दर्द और ठंड लगने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
Early Symptoms Of Hantavirus Infection: इस समय दुनियाभर में हंतावायरस के मामले सुर्खियों में हैं। अब तक इसके आठ मामले सामने आ चुके हैं और तीन लोगों की मौत हो चुकी है। यह एक ऐसा संक्रमण है, जिसके बारे में लोग तब तक ज्यादा बात नहीं करते, जब तक कोई इसकी चपेट में न आ जाए। यह संक्रमण भले ही रेयर हो, लेकिन बेहद खतरनाक माना जाता है। सबसे चिंता की बात यह है कि इसकी शुरुआत सामान्य वायरल बीमारी जैसी होती है, इसलिए लोग अक्सर इसे हल्के में ले लेते हैं। लेकिन कुछ ही दिनों में यह फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
क्या डेंगू, स्वाइन फ्लू या कोविड जैसे हो सकते हैं इसके लक्षण?
अमृता अस्पताल, फरीदाबाद के सीनियर कंसल्टेंट पल्मोनोलॉजिस्ट और स्लीप मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. प्रदीप बजाज ने TOI को बताया कि जब बुखार और शरीर में दर्द शुरू होता है, तो ज्यादातर लोग डेंगू, स्वाइन फ्लू या कोविड के बारे में सोचते हैं। हंतावायरस एक रेयर लेकिन जानलेवा संक्रमण है, जो कुछ ही दिनों में फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है और बहुत कम लोग इसके बारे में जानते हैं।
क्या यह खांसने, छींकने या हाथ मिलाने से फैलता है?
यह वायरस सामान्य रूप से एक इंसान से दूसरे इंसान में नहीं फैलता। यानी किसी के खांसने, छींकने या हाथ मिलाने से संक्रमण नहीं होता। हालांकि, इसका एक प्रकार ‘एंडीज वायरस’ इंसानों से इंसानों में फैल सकता है, लेकिन ऐसे मामले बेहद कम होते हैं।
डॉ. प्रदीप बजाज के अनुसार, यह संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित चूहों और कृन्तकों से फैलता है। वायरस उनके यूरिन, लार और मल में मौजूद होता है। जब लोग लंबे समय से बंद पड़े कमरों, गोदामों, खेतों या स्टोर रूम की सफाई करते हैं, तब धूल के साथ वायरस के कण हवा में फैल जाते हैं और सांस के जरिए शरीर में पहुंच जाते हैं।
क्या होते हैं इसके शुरुआती लक्षण?
इस संक्रमण के शुरुआती लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि अक्सर लोग इसे मौसम बदलने से हुई बीमारी समझ लेते हैं। मरीज को बुखार, थकान, सिरदर्द, शरीर में दर्द, ठंड लगना, उल्टी, मतली या पेट में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कई लोग इसे फ्लू या फूड पॉइजनिंग समझकर घर पर आराम करते रहते हैं। शुरुआत में बीमारी ज्यादा गंभीर नहीं लगती, इसलिए लोग खतरे को समझ नहीं पाते।
कब बढ़ने लगता है खतरा?
कुछ समय बाद मरीज को सांस लेने में दिक्कत, सीने में जकड़न, सूखी खांसी, दिल की धड़कन तेज होना और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम होने जैसी समस्याएं होने लगती हैं। फेफड़ों में पानी भरने लगता है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो जाता है। कई मामलों में मरीज की हालत इतनी तेजी से बिगड़ती है कि उसे आईसीयू और वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है।
इसका सबसे गंभीर रूप कौन सा है?
हंतावायरस का सबसे गंभीर रूप हंतावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (HPS) माना जाता है। रिसर्च के अनुसार, यह संक्रमण फेफड़ों और ब्लड वेसल्स में गंभीर सूजन पैदा कर सकता है। अमेरिकी संस्था CDC के मुताबिक, गंभीर मामलों में इसकी मृत्यु दर 35 से 40 प्रतिशत तक हो सकती है।
बचाव के लिए क्या करें?
डॉक्टरों का कहना है कि इस संक्रमण से बचाव ही सबसे बड़ा उपाय है। घर या गोदाम में चूहों की संख्या नियंत्रित रखना, उनके मल-मूत्र को सुरक्षित तरीके से साफ करना, बंद कमरों में हवा आने-जाने की व्यवस्था रखना और सफाई के दौरान मास्क व दस्ताने पहनना संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है।
Disclaimer:
यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें। स्वयं दवा लेने या इलाज करने से बचें।
