नई दिल्ली स्थित All India Institute of Medical Sciences (एम्स) ने एक बार फिर चिकित्सा जगत में अपनी उत्कृष्टता साबित की है। हाल ही में यहां विकसित की गई एक अनोखी स्पाइन सर्जरी तकनीक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिल रही है, जिससे गंभीर मरीजों के इलाज में नई उम्मीद जगी है।

इस नई तकनीक के जरिए डॉक्टर अब जटिल रीढ़ (स्पाइन) से जुड़ी बीमारियों का इलाज अधिक सटीकता और कम जोखिम के साथ कर पा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह विधि खासतौर पर उन मरीजों के लिए फायदेमंद है, जिनके लिए पारंपरिक सर्जरी जोखिम भरी मानी जाती थी।

एम्स के डॉक्टरों ने बताया कि इस तकनीक में अत्याधुनिक इमेजिंग और न्यूनतम इनवेसिव (Minimal Invasive) प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया जाता है। इससे ऑपरेशन के दौरान खून की कमी, दर्द और रिकवरी का समय काफी कम हो जाता है।

इस उपलब्धि ने न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा समुदाय का भी ध्यान आकर्षित किया है। कई विदेशी विशेषज्ञों ने इस तकनीक को “गेम चेंजर” बताते हुए इसकी प्रशंसा की है।

डॉक्टरों के अनुसार, इस नई प्रक्रिया से रीढ़ की चोट, ट्यूमर, स्लिप डिस्क और जन्मजात विकारों जैसे गंभीर मामलों में भी बेहतर परिणाम मिल रहे हैं। इससे मरीजों की जीवन गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है।

एक वरिष्ठ सर्जन ने बताया कि पहले जिन मरीजों को लंबे समय तक बिस्तर पर रहना पड़ता था, वे अब कुछ ही दिनों में चलने-फिरने लगते हैं। यह तकनीक मरीजों को जल्दी सामान्य जीवन में लौटने में मदद कर रही है।

एम्स में इस तकनीक के सफल परीक्षण के बाद अब इसे व्यापक स्तर पर लागू करने की योजना बनाई जा रही है। इससे देश के अन्य अस्पतालों में भी इस पद्धति को अपनाने का रास्ता खुल सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह नवाचार भारत को चिकित्सा क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने वाला कदम है। साथ ही यह मेडिकल टूरिज्म को भी बढ़ावा दे सकता है।

मरीजों और उनके परिजनों में इस नई तकनीक को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है। कई लोग इसे एक नई जिंदगी की शुरुआत के रूप में देख रहे हैं।