
उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक भंडारे से जुड़ा मामला जबरदस्त चर्चा का विषय बना हुआ है।समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को भंडारे में पूड़ी खिलाने वाली दलित टीचर अंजलि और उनके परिवार की मुश्किलें अब बढ़ती नजर आ रही हैं। अंजलि का आरोप है कि उनके पिता उमेश कुमार को सिर्फ इसलिए सुपरवाइजर पद से हटाकर सफाईकर्मी बना दिया गया, क्योंकि उन्होंने अंबेडकर जयंती के मौके पर आयोजित भंडारे में अखिलेश यादव को प्रसाद खिलाया था। इस पूरे मामले ने अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है।
अंबेडकर जयंती पर हुआ था भंडारे का आयोजन
दरअसल, 14 अप्रैल को बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की जयंती पर अंजलि और उनके परिवार की ओर से भंडारे का आयोजन किया गया था। उसी दिन बैसाखी के अवसर पर अखिलेश यादव गुरुद्वारे में माथा टेकने पहुंचे थे। गुरुद्वारे से लौटते समय अंजलि ने उन्हें भंडारे में रुककर प्रसाद ग्रहण करने का आग्रह किया। अखिलेश यादव कुछ देर के लिए वहां रुके और सब्जी-पूड़ी खाई। इस दौरान अंजलि ने उन्हें अपने हाथों से पूड़ी परोसी। घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए थे।
सपा मुख्यालय पहुंचीं अंजलि, कही बड़ी बात
अब अंजलि का आरोप है कि इस घटना के बाद उनके पिता उमेश कुमार को प्रशासन ने सुपरवाइजर पद से हटाकर सफाईकर्मी बना दिया। बुधवार को अंजलि लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी मुख्यालय पहुंचीं और अखिलेश यादव से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दी। इस दौरान अंजलि का बयान काफी चर्चा में रहा, जब उन्होंने कहा “अखिलेश जी, आपके लिए ऐसी सौ नौकरियां कुर्बान हैं। मेरे पिता ने यही संदेश भेजा है।”
अंग्रेजी विषय से एमए कर चुकीं अंजलि ने आरोप लगाया कि सरकार ने राजनीतिक बदले की भावना से यह कार्रवाई की है। हालांकि छावनी परिषद प्रशासन का कहना है कि कर्मचारी उमेश कुमार ने बिना अनुमति रक्षा अधिकारियों को भंडारे में आमंत्रित किया था और प्रशासनिक नियमों के तहत कार्रवाई की गई है।
अखिलेश यादव ने सरकार पर साधा निशाना
इस पूरे विवाद पर अखिलेश यादव ने भी योगी सरकार को घेरा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि पीडीए समाज की एक महिला के पिता को सिर्फ इसलिए प्रताड़ित किया जा रहा है क्योंकि उन्होंने बाबासाहेब अंबेडकर की जयंती पर उनके यहां पूड़ी खा ली थी। अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “इतनी निकृष्ट राजनीति तो अंग्रेजों ने भी नहीं की थी।”
फतेहपुर के चाय वाले का मामला भी आया था सामने
अखिलेश यादव ने इससे पहले फतेहपुर में हुई एक अन्य घटना का भी जिक्र किया। दरअसल कुछ समय पहले फतेहपुर में एक चाय दुकानदार ने अखिलेश यादव को अपनी दुकान पर चाय पिलाई थी, जिसके बाद खाद्य विभाग की टीम ने उसकी दुकान पर छापा मारा था। आरोप था कि चाय एल्युमीनियम के बर्तन में बनाई जा रही थी। अगले दिन दुकानदार के साथ मारपीट की घटना भी सामने आई, जिसके बाद डर के कारण उसने अपनी दुकान बंद कर दी थी।
बाद में अखिलेश यादव ने उस दुकानदार को सपा मुख्यालय बुलाकर सम्मानित किया था और उसे पीतल के बर्तन भी भेंट किए थे, ताकि वह दोबारा अपना काम शुरू कर सके। अब अंजलि और उनके पिता का मामला सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी इसे राजनीतिक प्रताड़ना और पीडीए समाज के खिलाफ कार्रवाई के तौर पर पेश कर रही है, जबकि प्रशासन पूरे मामले को नियमों के तहत हुई कार्रवाई बता रहा है।
