नई दिल्ली। शेयर बाजार में निवेश करने वाले लाखों निवेशकों के बीच लंबे समय से यह चर्चा चल रही थी कि केंद्र सरकार इक्विटी निवेश पर लगने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स को समाप्त कर सकती है। अब इस विषय पर सरकार ने लोकसभा में अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट कर दिया है। वित्त मंत्रालय ने लिखित उत्तर में कहा है कि फिलहाल इक्विटी निवेश पर LTCG टैक्स समाप्त करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। इस बयान के साथ ही उन सभी अटकलों पर विराम लग गया है जिनमें इस टैक्स को हटाने की संभावना जताई जा रही थी।
लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री ने रखा सरकार का पक्ष
लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि वर्तमान समय में सरकार के पास इक्विटी निवेश पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स समाप्त करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार प्रत्येक वर्ष बजट प्रक्रिया और आवश्यकतानुसार कर कानूनों में संशोधन के दौरान कर संबंधी प्रावधानों की समीक्षा करती रहती है। इसका अर्थ यह है कि भविष्य में आर्थिक परिस्थितियों और नीतिगत आवश्यकताओं के अनुसार बदलाव संभव हो सकते हैं, लेकिन फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है।
क्या होता है LTCG टैक्स?
लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स वह कर है, जो किसी निवेशक द्वारा शेयर या इक्विटी आधारित निवेश को निर्धारित अवधि तक रखने के बाद बेचने पर प्राप्त लाभ पर लगाया जाता है। यह कर निवेश से होने वाले दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर लागू होता है और सरकार के राजस्व संग्रह का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यही कारण है कि इसे समाप्त करने का कोई निर्णय फिलहाल नहीं लिया गया है।
दो वित्त वर्षों में सरकार को मिला 2.01 लाख करोड़ रुपये का राजस्व
सरकार द्वारा साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान इक्विटी निवेश से प्राप्त लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स के माध्यम से करीब 2.01 लाख करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि यह कर सरकार की आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन चुका है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आकलन वर्ष (AY) 2025-26 में LTCG टैक्स के माध्यम से 1.29 लाख करोड़ रुपये का संग्रह हुआ, जबकि आकलन वर्ष (AY) 2024-25 में यह राशि 72,249 करोड़ रुपये थी। इस प्रकार टैक्स संग्रह में लगभग 79 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो शेयर बाजार में बढ़ती निवेश गतिविधियों और पूंजीगत लाभ को भी दर्शाती है।
घरेलू और विदेशी निवेशकों पर समान टैक्स व्यवस्था
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि सूचीबद्ध (Listed) इक्विटी निवेश पर लागू 12.5 प्रतिशत की LTCG टैक्स दर घरेलू (Retail) निवेशकों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (Foreign Portfolio Investors - FPI) दोनों पर समान रूप से लागू होती है। सरकार ने कहा कि इस मामले में किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया गया है और सभी निवेशकों के लिए एक समान कर व्यवस्था लागू है।
विदेशी निवेशकों को सरकारी बॉन्ड में मिली कर छूट
हालांकि, सरकार ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities या G-Secs) में निवेश को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। 1 अप्रैल 2026 से लागू नए प्रावधानों के अनुसार, सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को ब्याज आय तथा पूंजीगत लाभ दोनों पर आयकर से छूट प्रदान की गई है।
सरकार के अनुसार, इस निर्णय का उद्देश्य भारत की कर व्यवस्था को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना और पेंशन फंड, बीमा कंपनियों तथा सॉवरेन वेल्थ फंड जैसे बड़े विदेशी संस्थागत निवेशकों को भारतीय सरकारी बॉन्ड बाजार की ओर आकर्षित करना है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
विशेषज्ञों का मानना है कि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है, लेकिन यह सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत बन चुका है। ऐसे में निकट भविष्य में इसे पूरी तरह समाप्त किए जाने की संभावना फिलहाल कम दिखाई देती है। हालांकि, सरकार प्रत्येक बजट में कर व्यवस्था की समीक्षा करती है, इसलिए भविष्य में आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
