
महाराष्ट्र के पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व गृह मंत्री माणिकराव ठाकरे
पटना। जातिगत जनगणना को लेकर बिहार कांग्रेस ने केंद्र सरकार की प्रक्रिया और प्रश्नावली पर सवाल उठाए हैं। शनिवार को सदाकत आश्रम स्थित स्व. राजीव गांधी सभागार में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में एआईसीसी के गोवा, दमन-दीव और दादरा एवं नगर हवेली प्रभारी तथा महाराष्ट्र के पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व गृह मंत्री माणिकराव ठाकरे ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की मौजूदा व्यवस्था में OBC और EBC वर्ग की वास्तविक भागीदारी का स्पष्ट आंकड़ा सामने आने में दिक्कत हो सकती है।
ठाकरे ने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से जातिगत जनगणना की मांग करती रही है। बिहार में महागठबंधन सरकार के दौरान राहुल गांधी के दबाव के बाद जातिगत जनगणना की पहल हुई थी। वहीं, तेलंगाना में कांग्रेस सरकार द्वारा कराया गया जातिगत सर्वेक्षण केंद्र के लिए एक मॉडल हो सकता है।
65 प्रतिशत आरक्षण का मुद्दा
ठाकरे ने बिहार में आरक्षण की सीमा 65 प्रतिशत तक बढ़ाने की तत्कालीन महागठबंधन सरकार की पहल का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की उदासीनता के कारण मामला अदालत तक पहुंचा, जबकि भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार इसे संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल कराने की पहल कर सकती थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में एनडीए सरकार बनने के बाद जातिगत जनगणना से जुड़ी सिफारिशों को आगे नहीं बढ़ाया गया।
जनगणना की टाइमलाइन पर सवाल
कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से जातिगत जनगणना कराने की घोषणा का स्वागत किया, लेकिन इसकी पूरी समयसीमा सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने बताया कि पहाड़ी और बर्फबारी वाले क्षेत्रों में 1 सितंबर से प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जबकि देश के बाकी हिस्सों में अगले वर्ष फरवरी से जनगणना शुरू होने की बात कही गई है।
जातिगत जनगणना से क्या होगा?
ठाकरे ने जातिगत जनगणना के कई संभावित लाभ गिनाए:-
- सामाजिक स्थिति का आंकड़ा: अलग-अलग जातियों की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।
- लक्षित योजनाएं: जरूरतमंद और पिछड़े वर्गों के लिए अधिक प्रभावी कल्याणकारी योजनाएं तैयार की जा सकेंगी।
- बजट का बेहतर आवंटन: वंचित वर्गों की वास्तविक स्थिति के आधार पर सरकारी योजनाओं और बजट का निर्धारण किया जा सकेगा।
- विकास की सही तस्वीर: समाज के अंतिम पायदान पर खड़े आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की पहचान कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी।
- आरक्षण की समीक्षा: OBC, EBC और दलितों की वास्तविक संख्या के आधार पर आरक्षण और अन्य अधिकारों की समीक्षा में मदद मिल सकती है।
- संस्थाओं में भागीदारी: अलग-अलग सामाजिक वर्गों की देश की संस्थाओं और निर्णय लेने वाली व्यवस्थाओं में वास्तविक हिस्सेदारी का आकलन किया जा सकेगा।
राहुल गांधी के उठाए मुद्दे
ठाकरे ने राहुल गांधी द्वारा जातिगत जनगणना को लेकर उठाए गए मुद्दों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस की मांगों को सामने रखा :-
- कांग्रेस का कहना है कि जातिगत जनगणना कराई जानी चाहिए और आरक्षण में 50 प्रतिशत की सीमा को भी हटाया जाना चाहिए।
- सरकार से पूछा गया है कि जातिगत जनगणना कब तक पूरी होगी और इसकी पूरी टाइमलाइन क्या है।
- तेलंगाना के जातिगत सर्वेक्षण मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर अपनाने योग्य मॉडल बताया गया है।
- कांग्रेस ने कहा है कि जनगणना की प्रश्नावली का डिजाइन बेहद महत्वपूर्ण है और इसे तैयार करने में विशेषज्ञों तथा राजनीतिक दलों की राय ली जानी चाहिए।
- केवल OBC, दलित और आदिवासी आबादी की संख्या जानना पर्याप्त नहीं है। यह भी पता चलना चाहिए कि देश की संस्थाओं और पावर स्ट्रक्चर में इन वर्गों की कितनी भागीदारी है।
- कांग्रेस के घोषणापत्र में किए गए वादे के मुताबिक संविधान के अनुच्छेद 15(5) के तहत निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण लागू करने की मांग भी दोहराई गई।
- कांग्रेस ने जातिगत जनगणना को सामाजिक न्याय के साथ-साथ विकास की नई व्यवस्था तैयार करने का आधार बनाने की बात कही है।
OBC के विकल्प को लेकर कांग्रेस की आपत्ति
माणिकराव ठाकरे ने केंद्र की ओर से जारी करीब 40 सवालों वाली प्रश्नावली में OBC से जुड़े प्रावधानों पर विशेष आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि SC और ST के कॉलम को लेकर कांग्रेस को आपत्ति नहीं है, लेकिन OBC के मामले में केवल जाति का नाम दर्ज करने की व्यवस्था है। यह स्पष्ट करने का विकल्प नहीं है कि संबंधित व्यक्ति OBC श्रेणी में आता है या नहीं।
कांग्रेस का सवाल है कि यदि OBC की पहचान के लिए स्पष्ट व्यवस्था नहीं होगी तो उनकी कुल संख्या और वास्तविक हिस्सेदारी कैसे निर्धारित की जाएगी।
ठाकरे ने खुले विकल्प यानी Open-ended Question को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि एक ही जाति के अलग-अलग नाम या क्षेत्रीय नाम दर्ज होने से आंकड़ों में अंतर आ सकता है।
कांग्रेस ने मांग की है कि जातियों की पहचान के लिए ड्रॉप-डाउन मेन्यू या कोई वैज्ञानिक और पारदर्शी व्यवस्था अपनाई जाए। ठाकरे के अनुसार, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मौजूदा प्रश्नावली में OBC का स्पष्ट विकल्प और ड्रॉप-डाउन लिस्ट शामिल करने की मांग की है।
ORGI और सामाजिक न्याय मंत्रालय के बीच समन्वय पर सवाल
ठाकरे ने ऑफिस ऑफ द रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (ORGI) और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (MoSJE) के बीच OBC जातीय सूचियों को लेकर पर्याप्त समन्वय नहीं होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जातीय सूचियों में मौजूद विसंगतियों को दूर किए बिना सटीक आंकड़े जुटाना मुश्किल हो सकता है।
उन्होंने मांग की कि राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों के साथ चर्चा कर प्रश्नावली में जरूरी बदलाव किए जाएं तथा बिहार और तेलंगाना के जाति सर्वेक्षणों के अनुभवों को ध्यान में रखा जाए।
शिक्षक दिवस पर राधाकृष्णन को किया नमन
संवाददाता सम्मेलन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने पूर्व राष्ट्रपति एवं शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के तैलचित्र पर माल्यार्पण किया। शिक्षक दिवस के अवसर पर बिहार के सभी शिक्षकों को शुभकामनाएं भी दी गईं।
कार्यक्रम का संचालन बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने किया। इस दौरान एआईसीसी के बिहार प्रभारी सचिव शाहनवाज आलम, मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़, कपिलदेव प्रसाद यादव, ब्रजेश प्रसाद मुनन समेत अन्य नेता मौजूद रहे।
