erereer | Source: eमेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में दलित किसान नेता दिग्विजय भाटी और उनके साथी मोहित जाटव के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हलचल तेज हो गई है। आरोप है कि दोनों की एसएसपी कार्यालय के अंदर पिटाई की गई और बाद में उन्हें थाने भी ले जाया गया, जहां भी मारपीट किए जाने का दावा किया गया। दिग्विजय भाटी ने आरोप लगाया है कि एसएसपी अविनाश पांडेय ने पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर उनकी पिटाई की, जिससे उनकी आंख में गंभीर चोट लगी और खून निकलने लगा। मामले के तूल पकड़ने के बाद एडीजी भानु भास्कर ने सहारनपुर परिक्षेत्र के डीआईजी अभिषेक सिंह को पूरे प्रकरण की जांच सौंप दी है। हालांकि, लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के निष्कर्ष और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।

एसएसपी कार्यालय में मारपीट का आरोप, आंख में चोट लगने का दावा

भारतीय किसान यूनियन बीआर आंबेडकर के अध्यक्ष डॉ. दिग्विजय भाटी और उनके साथी मोहित जाटव ने एसएसपी अविनाश पांडेय तथा सिविल लाइंस थाने के प्रभारी अखिलेश गौड़ पर मारपीट का आरोप लगाया है। दोनों ने इस संबंध में वीडियो जारी कर अपनी बात रखी। दिग्विजय भाटी के अनुसार, वह मोहित जाटव के साथ एक गैंगस्टर मामले को लेकर एसएसपी से मिलने उनके कार्यालय पहुंचे थे। आरोप है कि इसी दौरान विवाद हुआ और उनके साथ मारपीट की गई।

दिग्विजय भाटी का दावा है कि पुलिसकर्मियों ने डंडे और बेल्ट से दोनों की पिटाई की। उन्होंने आरोप लगाया कि एसएसपी ने भी खुद मारपीट की। पिटाई के दौरान वह हाथ जोड़कर बचने की कोशिश करते रहे, लेकिन उनके साथ कथित तौर पर मारपीट जारी रही। इस घटना में उनकी आंख से खून निकलने की बात कही गई है।

एसएसपी से मिलने पहुंचे थे दोनों किसान नेता

दिग्विजय भाटी के मुताबिक, वह बुधवार को मोहित जाटव के साथ एसएसपी अविनाश पांडेय से मिलने उनके कार्यालय पहुंचे थे। मुलाकात का विषय गैंगस्टर के एक मुकदमे से जुड़ा था। उनके पहुंचने के समय एसएसपी कार्यालय में मौजूद नहीं थे और दोनों बाहर इंतजार कर रहे थे। आरोप के अनुसार, कुछ समय बाद एसएसपी कार्यालय पहुंचे।

दिग्विजय भाटी का कहना है कि एसएसपी के आने के करीब पांच मिनट बाद एक पुलिसकर्मी उन्हें अंदर बुलाने आया। वह पुलिसकर्मी के साथ एसएसपी के कार्यालय में गए। आरोप है कि वहां एसएसपी ने कथित तौर पर गाली देते हुए उनसे कहा कि वे नेता बनते हैं।

कार्यालय के बाद SOG कार्यालय ले जाने का दावा

दिग्विजय भाटी ने आरोप लगाया कि एसएसपी के निर्देश पर कार्यालय में मौजूद पुलिसकर्मियों ने दोनों की पिटाई शुरू कर दी। इसके बाद सिविल लाइंस इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ एसएसपी कार्यालय पहुंचे। आरोप है कि इंस्पेक्टर दोनों को लेकर पुलिस लाइन स्थित एसओजी कार्यालय गए और वहां भी उनके साथ मारपीट की गई।

इस मामले में पुलिस अधिकारियों की ओर से लगाए गए आरोपों के संबंध में अलग पक्ष भी सामने आया है। अमिताभ ठाकुर के अनुसार, मेरठ पुलिस दोनों को हिस्ट्रीशीटर बताते हुए स्कूटी से फिसलकर घायल होने की बात कह रही है। इन दावों के बीच अब जांच में घटनाक्रम और चोटों की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगना महत्वपूर्ण होगा।

थाने में बिगड़ी हालत, डॉक्टरों को बुलाने का दावा

आरोप लगाने वाले पक्ष के अनुसार, रात में दोनों को सिविल लाइंस थाने ले जाया गया। दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव का दावा है कि पिटाई के कारण उनकी आंखों से खून आने लगा। इसके बाद आंख और दिमाग के डॉक्टरों को थाने में बुलाया गया।

बाद में सपा विधायक अतुल प्रधान के थाने पहुंचने की बात सामने आई। विधायक दोनों को अपने साथ लेकर गए। इसके बाद समाजवादी पार्टी की ओर से एसएसपी के खिलाफ कार्रवाई और एफआईआर की मांग को लेकर आंदोलन की घोषणा की गई।

मामला गरमाया तो ADG ने DIG को सौंपी जांच

मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर तूल तब पकड़ा जब समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष एवं सांसद चंद्रशेखर आजाद ने इसे सार्वजनिक रूप से उठाया। इसके बाद एडीजी भानु भास्कर ने मामले की जांच सहारनपुर के डीआईजी अभिषेक सिंह को सौंप दी।

एडीजी ने यह भी माना कि एसएसपी कार्यालय के अंदर विवाद के बाद मारपीट हुई है। अब डीआईजी स्तर पर पूरे घटनाक्रम, संबंधित आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जाएगी।

मामला NHRC तक भी पहुंचा

इस प्रकरण में मानवाधिकार आयोग का दरवाजा भी खटखटाया गया है। आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व आईजी अमिताभ ठाकुर ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। उनका कहना है कि आयोग ने शिकायत को दर्ज कर लिया है।

अमिताभ ठाकुर ने आरोप लगाया कि दोनों को एसएसपी कार्यालय बुलाकर पीटा गया। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस की ओर से दोनों को हिस्ट्रीशीटर बताते हुए स्कूटी से गिरने के कारण घायल होने की बात कही जा रही है।

अमिताभ ठाकुर ने उठाए विभागीय जांच की निष्पक्षता पर सवाल

अमिताभ ठाकुर ने अपनी शिकायत में कहा है कि एडीजी मेरठ जोन की ओर से मामले की जांच सहारनपुर परिक्षेत्र के डीआईजी को सौंपी गई है। हालांकि, उन्होंने गंभीर मानवाधिकार आरोपों वाले मामले में विभागीय जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि पीड़ितों और आम लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए मानवाधिकार आयोग का स्वतंत्र हस्तक्षेप जरूरी है। इसी मांग के साथ उन्होंने आयोग से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है।

एसएसपी अविनाश पांडेय पहले भी रहे हैं चर्चा में

एसएसपी अविनाश पांडेय का नाम इससे पहले भी विवादों में सामने आया था। खबर के अनुसार, उन पर पहले भी दलित नेताओं के साथ कथित थप्पड़बाजी और मारपीट के आरोप लगे थे। उस घटना का वीडियो भी सामने आने की बात कही गई थी।

मौजूदा मामले के सामने आने से पहले गुरुवार देर रात आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए गए। इसी क्रम में अविनाश पांडेय को मेरठ से हटाकर लखनऊ मुख्यालय में तैनात किया गया। खबर के अनुसार, जिन नौ आईपीएस अधिकारियों का तबादला किया गया, उनमें अविनाश पांडेय को कोई जिला नहीं दिया गया और उन्हें लखनऊ मुख्यालय बुलाया गया।

इस तबादले को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं सामने आई हैं, लेकिन इसे मौजूदा मामले में दंडात्मक कार्रवाई मानने की पुष्टि आधिकारिक रूप से नहीं की गई है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया से बढ़ा दबाव

मामले को लेकर सपा विधायक अतुल प्रधान ने दिग्विजय भाटी के साथ मीडिया के सामने आरोपों को दोहराया। समाजवादी पार्टी की ओर से एफआईआर की मांग और आंदोलन की घोषणा की गई। दूसरी ओर, आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष एवं सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी मामले को उठाया।

इस राजनीतिक प्रतिक्रिया के बाद प्रशासनिक स्तर पर जांच का आदेश दिया गया है। अब डीआईजी अभिषेक सिंह की जांच में यह देखा जाएगा कि एसएसपी कार्यालय में वास्तव में क्या हुआ, दोनों पक्षों के बीच विवाद किस वजह से हुआ और चोटें किन परिस्थितियों में आईं।

जांच के नतीजे से साफ होगा पूरा घटनाक्रम

फिलहाल इस पूरे मामले में आरोप और प्रत्यारोप दोनों सामने हैं। दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव ने पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि पुलिस की ओर से बताए गए कथित अलग घटनाक्रम का भी उल्लेख सामने आया है। ऐसे में जांच के दौरान उपलब्ध वीडियो, चिकित्सकीय दस्तावेज, संबंधित अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान जैसे साक्ष्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं। हालांकि, इन साक्ष्यों के बारे में अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।