erer | Source: ererहिंगोली: ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति सामने लाने निकले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दीपके ने शनिवार को महाराष्ट्र के अपने गृह जिले हिंगोली के औंधा क्षेत्र स्थित एक सरकारी स्कूल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति की जांच की और कई कमियों का दावा किया। दीपके ने स्कूल की पानी की टंकी पर चढ़कर वहां की स्थिति देखी तथा शौचालय में पानी की उपलब्धता की भी जांच की।

स्कूल में पानी, फिल्टर और शौचालय की व्यवस्था पर सवाल

अभिजीत दीपके ने स्कूल में छात्रों के लिए उपलब्ध पानी की व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने पानी की टंकी और उसके भीतर मौजूद पानी की स्थिति को देखा। इसके बाद उन्होंने क्षेत्र के संबंधित अधिकारी से फोन पर बातचीत कर स्कूल में पानी और फिल्टर की समस्या का मुद्दा उठाया।

दीपके ने अधिकारी से कहा कि स्कूल में फिल्टर लगा हुआ है, लेकिन उसके काम नहीं करने के कारण छात्र बोरवेल का पानी पीने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि स्कूल के शौचालय में पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। उनके मुताबिक बच्चों के लिए साफ और सुरक्षित पेयजल तथा शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होना जरूरी है।

CJP की ओर से सोशल मीडिया पर साझा किए गए संदेश में भी सरकारी स्कूल की पानी की टंकी की स्थिति का उल्लेख किया गया। इसमें बच्चों के लिए बेहतर और साफ पानी की व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया गया।

एक्सपायर मसालों के पैकेट मिलने का दावा

स्कूल निरीक्षण के दौरान अभिजीत दीपके ने बच्चों के लिए रखी खाद्य सामग्री की भी जांच की। उन्होंने मीडियाकर्मियों को मसालों के कुछ पैकेट दिखाए और दावा किया कि उन पर दर्ज इस्तेमाल की अवधि फरवरी में ही समाप्त हो चुकी थी। दीपके ने सवाल उठाया कि जब अगस्त समाप्त होने वाला है और सितंबर शुरू होने वाला है, तब भी ऐसी सामग्री स्कूल में कैसे रखी गई है।

उन्होंने कहा कि छात्रों को ऐसे पैकेट से तैयार भोजन दिया जा रहा है, जिनकी इस्तेमाल की अवधि फरवरी में समाप्त हो चुकी थी। दीपके ने सवाल किया कि क्या इसी तरह की सामग्री से मंत्रियों के बच्चों के लिए भोजन तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे गरीब परिवारों से आते हैं, इसलिए उनके भोजन की गुणवत्ता के साथ किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।

पहले भी जर्जर स्कूल और फर्श की स्थिति दिखाई थी

यह पहली बार नहीं है जब ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के दौरान अभिजीत दीपके ने सरकारी स्कूल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए हैं। एक दिन पहले उन्होंने एक अन्य सरकारी स्कूल की जर्जर इमारत की स्थिति दिखाई थी। उनके अनुसार स्कूल की इमारत में दरारें थीं। उन्होंने फर्श पर बिछी टाट-पट्टी हटाकर उसकी स्थिति भी दिखाई और दावा किया कि फर्श बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है।

इसी अभियान के दौरान एक स्कूल में मिड-डे मील की सामग्री की जांच किए जाने का भी दावा किया गया था। वहां कई ऐसे खाद्य पैकेट मिलने की बात सामने रखी गई थी, जिनकी इस्तेमाल की अवधि समाप्त हो चुकी थी।

87 छात्रों के लिए सिर्फ दो कक्षाएं होने का दावा

अभिजीत दीपके ने स्कूल की शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि स्कूल में कुल 87 छात्रों के लिए केवल दो कक्षाएं उपलब्ध हैं, जबकि चार कक्षाएं स्वीकृत हैं। उन्होंने इस स्थिति को छात्रों के लिए पर्याप्त सुविधाओं के अभाव से जोड़ते हुए सरकारी स्कूलों की आधारभूत व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।

दीपके ने आरोप लगाया कि ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। उनका कहना है कि अभियान का उद्देश्य ऐसे स्कूलों की वास्तविक स्थिति सामने लाना और सरकार से इन समस्याओं पर जवाबदेही तय करने की मांग करना है।

15 अगस्त से शुरू हुआ ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान

CJP ने 15 अगस्त से ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत संगठन की ओर से ग्रामीण इलाकों में मौजूद सरकारी स्कूलों का दौरा कर वहां की बुनियादी सुविधाओं की स्थिति सामने लाने की कोशिश की जा रही है।

अभियान के दौरान पानी, शौचालय, विद्यालय भवन, कक्षाओं और छात्रों को दिए जाने वाले भोजन जैसी सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। अभिजीत दीपके अपने गृह जिले के विभिन्न स्कूलों में पहुंचकर वहां की व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर रहे हैं और सामने आने वाली समस्याओं को सार्वजनिक कर रहे हैं।

सोनम वांगचुक के अनशन पर अभिजीत दीपके का बड़ा बयान

स्कूल अभियान के बीच अभिजीत दीपके ने सोनम वांगचुक के अनशन को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक को ‘मैनिपुलेट’ किए जाने की बात कही जाती है। दीपके ने सवाल उठाया कि क्या सोनम वांगचुक अपने बेटे की उम्र के किसी व्यक्ति से प्रभावित या नियंत्रित हो सकते हैं।

उन्होंने बताया कि वह स्वयं सोनम वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील कर रहे थे। उनके मुताबिक, इस पर सोनम वांगचुक ने उनसे पूछा कि वे अनशन तोड़ने का दबाव क्यों डाल रहे हैं। दीपके ने कहा कि सोनम वांगचुक ने अपनी जान दांव पर लगाकर देश को जागरूक किया और इस आंदोलन को एक बड़े स्तर तक पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

‘आंदोलन सोनम सर से भी बड़ा हो गया, लेकिन श्रेय उन्हें ही’

अभिजीत दीपके ने कहा कि समय के साथ यह आंदोलन सोनम वांगचुक से भी बड़ा हो गया, लेकिन इस स्तर तक आंदोलन को पहुंचाने का सबसे बड़ा श्रेय सोनम वांगचुक को जाता है। उन्होंने उनके योगदान को आंदोलन के शुरुआती दौर से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।

दीपके के अनुसार, उनका उद्देश्य सोनम वांगचुक के अनशन को कमजोर करना नहीं था, बल्कि वे चाहते थे कि वह अपनी जान जोखिम में न डालें। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी चाहते थे कि सोनम वांगचुक अनशन समाप्त कर दें।

‘उठाकर ले जाया गया, मिलने तक नहीं दिया गया’

अभिजीत दीपके ने साक्षात्कार में दावा किया कि जब सोनम वांगचुक को उठाकर ले जाया गया, तब उन्हें उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने इस स्थिति के लिए ‘किडनैप’ शब्द का इस्तेमाल किया। दीपके ने कहा कि कुछ लोगों की ओर से यह कहा जा रहा था कि सरकार से जुड़े लोगों ने सोनम वांगचुक का अनशन तुड़वा दिया।

उन्होंने कहा कि यदि सोनम वांगचुक ने अनशन समाप्त किया तो यह अच्छा हुआ, क्योंकि सवाल यह भी था कि क्या उन्हें अपनी जान गंवानी चाहिए थी। दीपके के मुताबिक, वे भी चाहते थे कि सोनम वांगचुक अनशन तोड़ दें।

सरकारी स्कूलों की सुविधाओं पर बहस तेज करने की कोशिश

अभिजीत दीपके के सरकारी स्कूलों के दौरे और सोनम वांगचुक के अनशन को लेकर दिए गए बयान ने दो अलग-अलग मुद्दों को चर्चा में ला दिया है। एक ओर ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के जरिए सरकारी विद्यालयों में पानी, शौचालय, भवन, कक्षाओं और भोजन जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सोनम वांगचुक के अनशन को लेकर दीपके ने अपने रुख और उससे जुड़ी परिस्थितियों पर बात की है।