मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के आदेश पर अमेरिकी सेना ने पिछले 24 घंटों में ईरान पर तीसरा सबसे बड़ा हमला किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इस सप्ताह तीन दिनों के भीतर ईरान के 300 से अधिक सैन्य ठिकानों को सटीकता से निशाना बनाया गया है। इनमें से 140 से अधिक ठिकानों पर हमले पिछले 24 घंटों में किए गए। यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई है।
अमेरिकी हमले का मुख्य कारण
अमेरिकी सेना की इस कार्रवाई की मुख्य वजह शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में साइप्रस के ध्वज वाले कमर्शियल शिप 'M/V GFS Galaxy' पर हुआ ईरानी हमला है। इस जहाज पर 11 भारतीय नागरिक भी सवार थे, जिनमें से 10 को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि 1 भारतीय क्रू मेंबर अभी भी लापता है। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का एकमात्र उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में नागरिक जहाजों पर हो रहे हमलों को रोकना और ईरान की हमलावर क्षमता को पूरी तरह ध्वस्त करना है।
तबाह हुए ईरान के 300 से अधिक ठिकाने
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के आधिकारिक बयान के मुताबिक, लड़ाकू विमानों, युद्धपोतों और आधुनिक ड्रोनों की मदद से ईरान के रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। नष्ट किए गए ठिकानों में प्रमुख रूप से ईरानी मिसाइल लॉन्च साइट्स, ड्रोन अड्डे, तटीय रडार केंद्र, वायु रक्षा प्रणाली (Air Defense Systems) और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की 60 से अधिक त्वरित हमलावर नावें (Fast Boats) शामिल हैं।
खाड़ी देशों में ईरान का भीषण जवाबी हमला
इस बड़े अमेरिकी हमले के बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर ताबड़तोड़ मिसाइलें और सुसाइड ड्रोन दागे हैं। ईरान ने कुवैत, बहरीन, जॉर्डन, कतर और यूएई में स्थित अमेरिकी मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने का दावा किया है। कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी बेस के पास धमाके सुने गए हैं और कई खाड़ी देश इस समय हाई अलर्ट पर हैं।
वैश्विक बाजार और भारत पर मंडराता संकट
इस सैन्य टकराव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर दिखने लगा है, जहां कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतों में 3% से अधिक का उछाल आ चुका है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है, तो वैश्विक तेल और गैस की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो सकती है। भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल आयात करता है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर महंगाई का बड़ा दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा, खाड़ी देशों में रह रहे करीब 80-90 लाख भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं।
