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अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद अब ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर IRIB के मुताबिक ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने बुधवार को कहा कि अमेरिकी हमलों के जवाब में उन्होंने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सेना के कई अहम ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाया। ईरान का दावा है कि इस अभियान में अमेरिका के 85 सैन्य ठिकानों पर हमला किया गया। इसके अलावा ईरान ने एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को मार गिराने का भी दावा किया है।

पहले अमेरिका ने किए बड़े हवाई हमले

इससे पहले होर्मुज में तीन व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों के बाद अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए थे। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह कार्रवाई दस दिन पहले किए गए हमलों की मुकाबले में चार से पांच गुना ज्यादा बड़ी थी। अमेरिका के एक अधिकारी ने एसोसिएटेड प्रेस से कहा कि ईरान अपनी बात पर अड़ा हुआ है। इसलिए अमेरिका ने उस पर दबाव बढ़ाने के लिए अपने हमले और तेज कर दिए , साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान के रुख में कोई बदलाव नहीं आया, इसलिए सैन्य दबाव बढ़ाया गया। इससे पहले अमेरिका ईरानी तेल पर नए प्रतिबंध भी लगा चुका था।

ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी सेना ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, तटीय निगरानी केंद्र, एंटी शिप क्रूज मिसाइल ठिकाने, बंदरगाहों की सुविधाएं और ड्रोन लॉन्च साइट्स को निशाना बनाया। ईरानी मीडिअनुसार मुताबिक, बंदर अब्बास, सिरिक और केशम द्वीप साथ कई इलाकों में जोरदार धमाके सुनाई दिए। समाचार एजेंसी AFP के मुताबिक, केशम द्वीप पर कम से कम 6, सिरिक में सात से नौ और बंदर अब्बास में करीब 10 धमाकों की आवाज सुनी गई।

हमलों के बीच समझौते पर खतरे का संकट

दोनों देशों के बीच लगातार हो रहे हमलों के कारण हाल ही में हुए समझौते (MoU) पर भी खतरा मंडराने लगा है। जिस तरह दोनों पक्ष एक दूसरे पर लगातार हमले कर रहे हैं, उससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

दोनों पक्ष एक दूसरे के सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं, ऐसे में हालात लगातार और बिगड़ते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह टकराव जल्द नहीं रुका तो पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है।