पश्चिम बंगाल की सियासत में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मचे कथित सियासी घमासान की खूब चर्चा हो रही है। पार्टी के कुछ नेताओं और सांसदों को लेकर लगातार बगावत की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। इसी बीच अब TMC सांसद सायनी घोष का नाम भी चर्चाओं में आ गया है। दावा किया जा रहा है कि वह उन सांसदों में शामिल हैं जिन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अलग संसदीय गुट बनाने और NDA को समर्थन देने की इच्छा जताई है। हालांकि इन दावों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे बंगाल की राजनीति में हलचल जरूर तेज हो गई है। अब सभी की नजर TMC नेतृत्व और सायनी घोष की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।
क्या है पूरा मामला?
पूरा विवाद TMC सांसद काकोली घोष दस्तिदार के उस दावे से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने कहा कि पार्टी के करीब 20 लोकसभा सांसद मौजूदा नेतृत्व से नाराज हैं और उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद में अलग समूह के तौर पर बैठने की इच्छा जताई है। काकोली घोष दस्तिदार का दावा है कि यह गुट NDA को समर्थन देने के पक्ष में है और संसद में अलग राजनीतिक रुख अपनाना चाहता है।हालांकि इस दावे के सामने आते ही बंगाल की राजनीति में हलचल मच गई और TMC के भीतर संभावित टूट की चर्चाएं तेज हो गईं। अगर बागी गुट का दावा सही साबित होता है, तो यह तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा। वहीं पार्टी नेतृत्व इन दावों को खारिज कर रहा है और TMC को पूरी तरह एकजुट बता रहा है। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में यह सियासी विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।
सायनी घोष का नाम क्यों चर्चा में है?
TMC में कथित बगावत की खबरों के बीच अब जादवपुर से लोकसभा सांसद सायनी घोष का नाम भी राजनीतिक चर्चाओं का हिस्सा बन गया है। सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं कि वह भी उन सांसदों में शामिल हैं जो पार्टी नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं। यही वजह है कि उनका नाम अचानक सुर्खियों में आ गया है।
हालांकि अब तक न तो सायनी घोष ने इन अटकलों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है और न ही तृणमूल कांग्रेस की ओर से यह पुष्टि की गई है कि वह किसी बागी गुट का हिस्सा हैं। ऐसे में फिलहाल उनके NDA के समर्थन में जाने या बागी खेमे में शामिल होने की खबरों को केवल अटकलों के तौर पर ही देखा जा रहा है। जब तक कोई आधिकारिक बयान या ठोस प्रमाण सामने नहीं आता, तब तक इन दावों की पुष्टि नहीं मानी जा सकती।
TMC का क्या कहना है?
TMC नेतृत्व ने बागी सांसदों के दावों को चुनौती दी है। पार्टी नेताओं कल्याण बनर्जी और कीर्ति आजाद ने सवाल उठाया है कि क्या वास्तव में 20 सांसद बागी गुट के साथ हैं। पार्टी का दावा है कि TMC अब भी एकजुट है और बागी खेमे द्वारा पेश किए जा रहे आंकड़े वास्तविकता से मेल नहीं खाते।
राजनीतिक असर क्या हो सकता है?
अगर काकोली घोष दस्तिदार का दावा सही साबित होता है और वास्तव में 20 सांसद NDA के समर्थन में खड़े होते हैं, तो यह TMC के इतिहास की सबसे बड़ी संसदीय बगावत मानी जाएगी। इससे ममता बनर्जी के नेतृत्व और पार्टी की संसदीय ताकत दोनों पर बड़ा असर पड़ सकता है। हालांकि कई सांसदों ने बागी गुट में शामिल होने से इनकार भी किया है, जिससे तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है।
