लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश की राजनीति में बेहद सक्रिय चेहरों में गिने जाते हैं। लगातार यात्राएं, जनसभाएं, बैठकों और राजनीतिक कार्यक्रमों के बीच भी उनकी फिटनेस अक्सर चर्चा का विषय बनी रहती है। 53 वर्ष की उम्र में भी उनकी सक्रियता देखकर लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर वह खुद को इतना फिट और ऊर्जावान कैसे रखते हैं। अखिलेश यादव की फिटनेस का कोई बेहद जटिल फॉर्मूला नहीं है, बल्कि उनकी दिनचर्या में शामिल कुछ साधारण आदतें और खास तौर पर पारंपरिक कसरत का एक तरीका इसके पीछे बताया जाता है।
सुबह की शुरुआत सादगी से, शरीर और दिमाग दोनों पर ध्यान
अखिलेश यादव अपनी दिनचर्या की शुरुआत अपेक्षाकृत सरल तरीके से करने पर जोर देते हैं। सुबह का समय उनके लिए शारीरिक गतिविधियों के साथ-साथ दिन की तैयारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहता है। वह सुबह उठने के बाद टहलने जैसी गतिविधियों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा रखते हैं। ताजी हवा में पैदल चलने से शरीर को सक्रिय रखने के साथ मन को भी सुकून मिलने में मदद मिलती है।
राजनीतिक जीवन में व्यस्त कार्यक्रम होने के बावजूद नियमित शारीरिक गतिविधि के लिए समय निकालना उनकी दिनचर्या का अहम हिस्सा माना जाता है। यही वजह है कि लंबे समय तक चलने वाले कार्यक्रमों के बीच भी उनकी सक्रियता नजर आती है।
योग से लेकर व्यायाम तक, कई गतिविधियों पर भरोसा
अखिलेश यादव कई मौकों पर शारीरिक व्यायाम को स्वस्थ जीवन के लिए जरूरी बता चुके हैं। वह योग और कसरत के साथ अपनी फिटनेस बनाए रखने की कोशिश करते हैं। उनकी पसंदीदा शारीरिक गतिविधियों में साइकिल चलाना, दौड़ना और पैदल चलना भी शामिल बताया जाता है।
नियमित व्यायाम का उद्देश्य केवल शरीर को मजबूत बनाना ही नहीं, बल्कि लंबे समय तक सक्रिय बने रहना भी है। व्यस्त राजनीतिक कार्यक्रमों के बीच ऐसी गतिविधियां शरीर को चुस्त रखने में मदद कर सकती हैं।
खाने की थाली में भी सादगी का फॉर्मूला
फिटनेस के लिए केवल व्यायाम ही नहीं, बल्कि खान-पान भी महत्वपूर्ण माना जाता है। अखिलेश यादव के बारे में उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उन्हें साधारण भारतीय भोजन पसंद है। उनकी थाली में दाल, चावल, रोटी, सब्जियां और सलाद जैसी सामान्य चीजें शामिल रहती हैं।
बाहर लगातार कार्यक्रम होने पर खान-पान का नियमित रूटीन प्रभावित होना स्वाभाविक है, लेकिन इसके बावजूद संतुलित और अपेक्षाकृत सादा भोजन रखने की कोशिश की जाती है। पर्याप्त पानी पीने की आदत को भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा बताया जाता है।
लेकिन फिटनेस का सबसे चौंकाने वाला राज है ‘मुगदर’
अखिलेश यादव की फिटनेस से जुड़ी सबसे दिलचस्प बात उनकी पारंपरिक कसरत है। कुंभ के दौरान गंगा स्नान के लिए पहुंचे अखिलेश यादव से जब उनकी फिटनेस को लेकर सवाल पूछा गया था, तब उन्होंने बताया था कि वह ‘मुगदर’ भांजते हैं। यही जवाब अब उनकी फिटनेस चर्चा का सबसे खास हिस्सा बन गया है।
मुगदर पारंपरिक भारतीय व्यायाम का एक उपकरण है, जिसका इस्तेमाल विशेष रूप से अखाड़ों में कसरत के लिए किया जाता रहा है। इसे हाथों से घुमाने की प्रक्रिया में कंधों, बाजुओं, पीठ और शरीर के ऊपरी हिस्से की मांसपेशियों पर मेहनत होती है।
अखाड़ों की पुरानी कसरत को बनाया फिटनेस का हिस्सा
मुगदर को आम तौर पर भारी लकड़ी के पारंपरिक व्यायाम उपकरण के रूप में जाना जाता है। पहलवान और पारंपरिक कसरत करने वाले लोग इसे नियंत्रित तरीके से घुमाकर शरीर के ऊपरी हिस्से को मजबूत करने का अभ्यास करते हैं।
अखिलेश यादव द्वारा मुगदर भांजने की बात इसलिए भी लोगों का ध्यान खींचती है क्योंकि आधुनिक जिम उपकरणों के दौर में भी उन्होंने पारंपरिक भारतीय व्यायाम को अपनी फिटनेस दिनचर्या से जोड़ा हुआ है। हालांकि, मुगदर जैसे भारी उपकरण से अभ्यास करने के लिए सही तकनीक और प्रशिक्षण जरूरी होता है।
53 की उम्र में फिटनेस का संदेश
अखिलेश यादव की फिटनेस दिनचर्या से एक बात साफ दिखाई देती है कि व्यस्त जीवन में भी शारीरिक गतिविधि के लिए समय निकाला जा सकता है। पैदल चलना, साइकिल चलाना, योग, व्यायाम और पारंपरिक कसरत जैसी गतिविधियों को नियमित जीवन का हिस्सा बनाकर शरीर को सक्रिय रखने की कोशिश की जा सकती है।
- हालांकि हर व्यक्ति की शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है। इसलिए मुगदर जैसी भारी कसरत को बिना प्रशिक्षण के शुरू करने के बजाय विशेषज्ञ की देखरेख में ही करना बेहतर माना जाता है। अखिलेश यादव के फिटनेस रूटीन की सबसे खास बात यही है कि इसमें आधुनिक व्यायाम के साथ भारतीय पारंपरिक कसरत की झलक भी देखने को मिलती है।
