erere | Source: ereनई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के बीच मैके में खेला गया दूसरा टेस्ट मैच महज दो दिनों में समाप्त होने के बाद क्रिकेट जगत में पिच को लेकर बहस तेज हो गई है। पूर्व भारतीय कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने इस टेस्ट की पिच पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पश्चिमी मीडिया और पिच रेटिंग व्यवस्था के कथित दोहरे रवैये पर सवाल उठाए हैं। गावस्कर का कहना है कि अगर ऑस्ट्रेलिया में कोई टेस्ट मैच दो दिन में समाप्त होता है तो पिच के बचाव में कई तर्क दिए जाते हैं, लेकिन भारत में ऐसा होने पर पिच, बीसीसीआई और भारतीय क्रिकेट पर तीखी टिप्पणियां शुरू हो जाती हैं।

सिर्फ 750 गेंदों में खत्म हुआ पूरा टेस्ट

मैके में ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के बीच खेला गया दूसरा टेस्ट कुल 750 गेंदों में समाप्त हो गया। यह क्रिकेट इतिहास का चौथा सबसे छोटा टेस्ट मैच बताया गया है। ऑस्ट्रेलिया ने बांग्लादेश को पारी और 51 रन से करारी शिकस्त दी। बांग्लादेश की टीम मैच की दोनों पारियों में 100 रन का आंकड़ा भी पार नहीं कर सकी।

दिलचस्प बात यह रही कि मुश्किल परिस्थितियों वाली इस पिच पर ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज भी आसानी से रन नहीं बना सके। ऑस्ट्रेलिया की ओर से केवल चार बल्लेबाज ही दहाई का आंकड़ा पार कर सके, जबकि कैमरन ग्रीन ने 67 रन की पारी खेली। दोनों टीमों के बल्लेबाजों के संघर्ष को देखते हुए पिच की प्रकृति को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

गावस्कर ने पूछा- ऑस्ट्रेलिया में पिच पर सवाल क्यों नहीं?

सुनील गावस्कर ने ‘स्पोर्टस्टार’ के लिए लिखे अपने कॉलम में इस पूरे मामले को पश्चिमी देशों के कथित दोहरे रवैये से जोड़ते हुए सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब ऑस्ट्रेलिया में कोई टेस्ट दो दिन के भीतर खत्म होता है तो पिच को जिम्मेदार ठहराने के बजाय अलग-अलग कारण बताए जाते हैं।

गावस्कर ने व्यंग्य करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में यह तर्क दिया जाता है कि क्यूरेटर ने मौसम के पूर्वानुमान को देखते हुए पिच पर ज्यादा घास छोड़ दी थी। कभी यह भी कहा जाता है कि बल्लेबाज अतिरिक्त उछाल से निपटने की तकनीक नहीं दिखा सके।

दोनों टीमों के बल्लेबाज नहीं चले तो पिच पर सवाल क्यों नहीं?

गावस्कर ने बल्लेबाजों की तकनीक को जिम्मेदार ठहराने वाले तर्क पर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि अगर केवल बांग्लादेश के बल्लेबाज संघर्ष करते और ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज बड़ी साझेदारियां बनाते तो बल्लेबाजों की तकनीक पर सवाल उठाने की बात समझ में आती।

लेकिन मैके टेस्ट में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज भी परिस्थितियों से परेशान नजर आए और उनकी ओर से केवल चार बल्लेबाज ही दहाई का आंकड़ा पार कर सके। ऐसे में गावस्कर के अनुसार पिच की स्थिति पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

पहले टेस्ट में हार के बाद पिच तैयार करने पर भी सवाल

सुनील गावस्कर ने यह दावा भी किया कि पहले टेस्ट में बांग्लादेश के हाथों ऑस्ट्रेलिया की करारी हार के बाद मैके में तेज और उछाल वाली पिच जानबूझकर तैयार की गई थी। उनके अनुसार, घरेलू टीम के लिए परिस्थितियों को अनुकूल बनाने की कोशिश की गई।

गावस्कर ने भारतीय टीम प्रबंधन और ऑस्ट्रेलिया तथा इंग्लैंड जैसे क्रिकेट देशों की पिच तैयार करने की प्रक्रिया के बीच अंतर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय टीम प्रबंधन आम तौर पर यह स्पष्ट करता है कि उसे अपनी स्पिन गेंदबाजी के अनुकूल पिच चाहिए।

इसके विपरीत, गावस्कर के अनुसार ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसे पारंपरिक क्रिकेट पावरहाउस देशों में मीडिया के सामने यह धारणा बनाई जाती है कि क्यूरेटर अपनी मर्जी से पिच तैयार करता है, जबकि पर्दे के पीछे परिस्थितियों को टीम की जरूरत के अनुसार तैयार करवाया जाता है।

अब मैच रेफरी की रिपोर्ट पर टिकी नजर

मैके की पिच को लेकर अब मैच रेफरी की रिपोर्ट और रेटिंग का भी इंतजार किया जा रहा है। गावस्कर ने अपने कॉलम में कहा कि यह देखना दिलचस्प होगा कि मैच रेफरी मैके की पिच को लेकर क्या रिपोर्ट और रेटिंग देते हैं।

उन्होंने पिच रेटिंग व्यवस्था को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। गावस्कर का कहना है कि पुराने क्रिकेट पावरहाउस माने जाने वाले ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के मीडिया से वाहवाही पाने की कोशिश करने वाले मैच रेफरी यदि इस दो दिवसीय टेस्ट की पिच को प्रतिकूल रेटिंग नहीं देते हैं तो इसमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

भारत में तीन दिन का टेस्ट होते ही उठते हैं सवाल

गावस्कर ने अपने बयान में भारत और ऑस्ट्रेलिया में पिच को लेकर होने वाली चर्चाओं के अंतर पर खास तौर पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर भारत में कोई टेस्ट मैच तीन दिन में समाप्त हो जाता है तो पिच के साथ-साथ बीसीसीआई और भारतीय क्रिकेट पर भी तरह-तरह की अपमानजनक टिप्पणियां की जाती हैं।

उन्होंने इसी संदर्भ में कहा कि यह दोहरा रवैया इतना निर्लज्ज है कि दिमाग चकरा जाता है। गावस्कर की यह टिप्पणी मैके टेस्ट के सिर्फ दो दिन में समाप्त होने के बाद सामने आई है।

पिच और घरेलू परिस्थितियों का विवाद फिर चर्चा में

टेस्ट क्रिकेट में घरेलू परिस्थितियों का लाभ लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। तेज गेंदबाजों के अनुकूल पिच, अतिरिक्त उछाल, सीम और स्पिन के लिए मददगार परिस्थितियां किसी भी घरेलू टीम को फायदा पहुंचा सकती हैं। लेकिन जब कोई टेस्ट बेहद कम समय में समाप्त होता है तो पिच की गुणवत्ता और उसके उद्देश्य पर सवाल उठना भी स्वाभाविक है।

मैके टेस्ट में बांग्लादेश के बल्लेबाज दोनों पारियों में 100 रन तक नहीं पहुंच सके। दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज भी पिच पर सहज नहीं दिखे। यही कारण है कि इस मैच के बाद पिच को लेकर बहस और तेज हो गई है।

गावस्कर की टिप्पणी ने बहस को दिया नया मोड़

मैके टेस्ट की पिच पर सुनील गावस्कर की टिप्पणी ने क्रिकेट में पिचों के मूल्यांकन और अलग-अलग देशों के लिए अपनाए जाने वाले मानकों को लेकर बहस को नया मोड़ दे दिया है। उनका मुख्य सवाल यह है कि यदि दो दिन में टेस्ट खत्म होने पर ऑस्ट्रेलियाई पिच को अलग-अलग कारणों से उचित ठहराया जाता है, तो भारत में तीन दिन में मैच खत्म होने पर पिच की आलोचना क्यों की जाती है।

अब इस पूरे मामले में मैच रेफरी की रिपोर्ट और पिच रेटिंग पर नजर रहेगी। मैके की पिच को लेकर आने वाला आधिकारिक आकलन यह तय करने में अहम होगा कि इस सतह को किस श्रेणी में रखा जाता है।