
तेलंगाना के निज़ामाबाद में टीचर आमिर खान के बाद अरूबा के अनुयायी विवाद से कथित मारपीट का मामला।Source : Social media
तेलंगाना के निज़ामाबाद जिले से सामने आई एक घटना ने शिक्षा, भाषा और राजनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक निजी स्कूल में उर्दू पढ़ाए जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा हो रही है और अलग-अलग राजनीतिक दल अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। निज़ामाबाद जिले के एक निजी स्कूल में कुछ बीजेपी नेताओं ने उर्दू पढ़ाए जाने पर आपत्ति जताते हुए स्कूल पहुंचकर विरोध किया। आरोप है कि इसी दौरान शिक्षक आमिर खान के साथ मारपीट की गई और उन्हें थप्पड़ मारा गया। यह भी दावा किया जा रहा है कि घटना के समय पुलिस मौके पर मौजूद थी। हालांकि, घटना को लेकर दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए हैं और पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है। इस घटना के बाद भाषा, शिक्षा और राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
यह घटना तेलंगाना के निज़ामाबाद जिले के आर्मूर स्थित भारत चंद्रा स्कूल की है। बताया जा रहा है कि स्कूल में उर्दू पढ़ाए जाने की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय बीजेपी नगर अध्यक्ष बालू अपने कुछ समर्थकों के साथ स्कूल पहुंचे। वहां उन्होंने स्कूल प्रबंधन से उर्दू पढ़ाए जाने को लेकर सवाल उठाए।आरोप है कि बीजेपी नेताओं का कहना था कि स्कूल में बच्चों को उर्दू भाषा के साथ-साथ उर्दू गीत, कलमा और उर्दू लिखना भी सिखाया जा रहा है। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई। विवाद बढ़ने पर कथित तौर पर शिक्षक आमिर खान के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट हुई। आरोप है कि इसी दौरान उन्हें थप्पड़ भी मारा गया। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
घटना की जानकारी मिलने के बाद आर्मूर थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसके आधार पर अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं।पुलिस ने बीजेपी नगर अध्यक्ष बालू और उनके साथ मौजूद अन्य लोगों के खिलाफ स्कूल में जबरन घुसने, मारपीट करने, धमकी देने और कानून-व्यवस्था भंग करने जैसी धाराओं में मामला दर्ज किया है। वहीं दूसरी ओर, स्कूल के प्रधानाचार्य आमिर खान, उर्दू शिक्षिका हुमा और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ भी बिना अनुमति उर्दू पढ़ाने समेत कुछ अन्य आरोपों में केस दर्ज किया गया है। फिलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है और पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
घटना के बाद बढ़ी सियासी हलचल
इस घटना के बाद मामला सिर्फ स्कूल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक मुद्दा बन गया। सोशल मीडिया पर घटना के वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं। कई सामाजिक संगठनों और लोगों ने शिक्षक के साथ कथित मारपीट की निंदा की है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं कुछ लोग यह सवाल भी उठा रहे हैं कि निजी स्कूलों में उर्दू पढ़ाने के नियम क्या हैं और इस मामले में स्कूल ने सभी जरूरी प्रक्रियाओं का पालन किया था या नहीं।फिलहाल पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
