जानें कि सिंथेटिक ओपिऑयड के खिलाफ अमेरिका की रणनीति खुफिया-आधारित कानून प्रवर्तन को सार्वजनिक स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के साथ कैसे जोड़ती है।

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सौजन्य: स्पैन मैगज़ीन:

सैयद सुलेमान अख्तर:

अवैध सिंथेटिक दवाओं, विशेषकर फेंटानिल जैसे सिंथेटिक ओपिऑयड, ने वैश्विक स्तर पर मादक पदार्थों की तस्करी और नशे की समस्या को नई चुनौती दी है। पारंपरिक मादक पदार्थों की तुलना में इनका उत्पादन तेजी से किया जा सकता है और इन्हें अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति शृंखलाओं के माध्यम से आसानी से विभिन्न देशों तक पहुंचाया जाता है। यही वजह है कि अमेरिका ने इस खतरे से निपटने के लिए केवल कानून प्रवर्तन पर निर्भर रहने के बजाय खुफिया तंत्र, सार्वजनिक स्वास्थ्य, पुनर्वास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को एक साथ जोड़ने वाली व्यापक रणनीति अपनाई है। आईवीएलपी (IVLP) कार्यक्रम के तहत अमेरिका पहुंचे पत्रकार प्रांजित डेका और नीति विशेषज्ञ अयाज अहमद वानी ने इस मॉडल को करीब से देखा और उसके विभिन्न पहलुओं को समझा।

राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ जुड़ा सिंथेटिक ड्रग्स का खतरा

अयाज अहमद वानी के अनुसार, अमेरिका में सिंथेटिक ओपिऑयड अब केवल नशे की समस्या नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी बड़ा मुद्दा बन चुके हैं। फेंटानिल जैसे ड्रग्स से हर साल बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो रही है। इसी वजह से अमेरिकी एजेंसियां सीमा सुरक्षा, खुफिया जानकारी, वित्तीय जांच, प्रतिबंध, संपत्ति जब्ती और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए तस्करी नेटवर्क को तोड़ने का प्रयास करती हैं। वहीं पत्रकार प्रांजित डेका के मुताबिक, अमेरिकी एजेंसियां सिंथेटिक ड्रग्स को स्थानीय अपराध नहीं, बल्कि वैश्विक आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा मानकर कार्रवाई करती हैं।

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कानून प्रवर्तन के साथ उपचार और पुनर्वास पर भी फोकस

अमेरिका की रणनीति केवल तस्करों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। वहां नशे की लत को एक स्वास्थ्य समस्या मानते हुए उपचार और पुनर्वास पर भी बराबर जोर दिया जाता है। मिशिगन में ‘एंजल पहल’ जैसे कार्यक्रम लोगों को बिना कानूनी कार्रवाई के डर के इलाज लेने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। वहीं ड्रग कोर्ट के जरिए अहिंसक अपराधियों को जेल भेजने के बजाय उपचार और पुनर्वास का अवसर दिया जाता है। इसके अलावा स्वास्थ्यकर्मी, कानून प्रवर्तन एजेंसियां और सामुदायिक संगठन मिलकर नशे की रोकथाम, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और दवा-सहायता प्राप्त उपचार (Medication-Assisted Treatment) के माध्यम से लोगों को मुख्यधारा में वापस लाने का प्रयास करते हैं।

समन्वित रणनीति और वैश्विक सहयोग की जरूरत

अमेरिका की यात्रा के दौरान प्रतिभागियों ने देखा कि नीति-निर्माता, कानून प्रवर्तन एजेंसियां और सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थान अलग-अलग नहीं, बल्कि एक समन्वित तंत्र के रूप में काम करते हैं। फेडरल और राज्य स्तर के फ्यूजन सेंटरों में विभिन्न एजेंसियां वास्तविक समय में सूचनाएं साझा कर तस्करी नेटवर्क की निगरानी करती हैं। दोनों विशेषज्ञों का मानना है कि भारत सहित कई देशों के सामने भी सिंथेटिक ड्रग्स, प्रीकर्सर केमिकल्स और सीमा पार तस्करी जैसी चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में मजबूत अंतर-एजेंसी समन्वय, सूचना साझा करने की व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सार्वजनिक स्वास्थ्य आधारित दृष्टिकोण ही इस समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने का सबसे बेहतर रास्ता साबित हो सकता है।