यूरोप में जारी भीषण हीटवेव अब स्विट्जरलैंड के हजारों साल पुराने ग्लेशियरों के अस्तित्व पर गंभीर खतरा बनकर उभर रही है। लगातार बढ़ते तापमान, कम बर्फबारी और जलवायु परिवर्तन के असर से ग्लेशियर पहले के मुकाबले कहीं अधिक तेजी से पिघल रहे हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस साल सर्दियों में जमा हुई लगभग पूरी बर्फ जून के अंत तक खत्म हो जाएगी। इसके बाद होने वाली हर पिघलन सीधे ग्लेशियरों की स्थायी बर्फ को नुकसान पहुंचाएगी, जिससे उनका आकार लगातार घटता जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि 2022 के बाद यह दूसरा सबसे शुरुआती 'ग्लेशियर लॉस डे' हो सकता है। आमतौर पर यह स्थिति अगस्त के मध्य में आती थी, लेकिन इस बार जून के आखिर में ही इसके आने की आशंका जताई जा रही है। वैज्ञानिक इसे जलवायु परिवर्तन की तेज होती रफ्तार का बड़ा संकेत मान रहे हैं। उनका कहना है कि अगर आने वाले वर्षों में तापमान इसी तरह बढ़ता रहा, तो स्विट्जरलैंड के कई ग्लेशियर पूरी तरह गायब हो सकते हैं। इसका असर केवल वहां के पर्यावरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जल संसाधनों, जैव विविधता और पूरी दुनिया के जलवायु संतुलन पर भी पड़ेगा।
क्या होता है 'ग्लेशियर लॉस डे'?
'ग्लेशियर लॉस डे' उस दिन को कहा जाता है, जब सर्दियों में ग्लेशियरों पर जमी पूरी बर्फ पिघल जाती है। इसके बाद होने वाली हर पिघलन सीधे ग्लेशियर की स्थायी बर्फ को कम करने लगती है। आमतौर पर यह स्थिति अगस्त के मध्य में आती थी, लेकिन इस बार जून के आखिर में ही इसके आने की आशंका जताई गई है।
हीटवेव और कम बर्फबारी से बढ़ा संकट
ग्लेशियर मॉनिटरिंग इन स्विट्जरलैंड (GLAMOS) के प्रमुख मैथियास हस के अनुसार, पूरे आल्प्स क्षेत्र में बर्फ और हिमखंड तेजी से पिघल रहे हैं। उन्होंने बताया कि केवल 10 दिनों में रोन (Rhone) ग्लेशियर की बर्फ लगभग एक मीटर तक घट गई। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस साल सामान्य से करीब 25 प्रतिशत कम बर्फबारी हुई, जबकि मई में असामान्य गर्मी के कारण बर्फ समय से पहले पिघलने लगी।
सहारा की धूल ने भी बढ़ाई पिघलने की रफ्तार
विशेषज्ञों के मुताबिक, मार्च में सहारा रेगिस्तान से आई धूल ग्लेशियरों पर जम गई, जिससे बर्फ की सफेद सतह गहरी हो गई। इसके कारण बर्फ ने अधिक धूप और गर्मी को अवशोषित किया, जिससे पिघलने की प्रक्रिया और तेज हो गई। वैज्ञानिक इसे इस साल ग्लेशियरों के तेजी से सिकुड़ने की एक अहम वजह मान रहे हैं।
170 वर्षों से घट रहे ग्लेशियर, भविष्य को लेकर चेतावनी
वैज्ञानिकों के अनुसार, स्विट्जरलैंड के ग्लेशियर पिछले लगभग 170 वर्षों से लगातार पीछे हट रहे हैं, लेकिन हाल के दशकों में यह प्रक्रिया और तेज हो गई है। वर्ष 2000 से 2024 के बीच देश के ग्लेशियरों का कुल आयतन करीब 38 प्रतिशत घट चुका है। पिछले 50 वर्षों में स्विट्जरलैंड लगभग 1,200 ग्लेशियर खो चुका है और अब वहां करीब 1,300 ग्लेशियर ही बचे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तापमान इसी तरह बढ़ता रहा, तो इस सदी के अंत तक स्विट्जरलैंड में केवल कुछ बड़े ग्लेशियर ही शेष रह सकते हैं।
