पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना से ठीक पहले सियासी माहौल गरमा गया है। राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता Suvendu Adhikari ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि काउंटिंग ड्यूटी में संविदा और अस्थायी कर्मचारियों की तैनाती से चुनाव की निष्पक्षता पर असर पड़ सकता है।


सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि कुछ विधानसभा क्षेत्रों में वोटों की गिनती के लिए नियमित सरकारी कर्मचारियों के बजाय कॉन्ट्रैक्ट और कैजुअल स्टाफ को लगाया जा रहा है। उनके मुताबिक, यह व्यवस्था लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है और इससे “गोपनीय जानकारी लीक होने” का खतरा बढ़ जाता है।


उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे कर्मचारी प्रशासनिक रूप से स्थायी ढांचे का हिस्सा नहीं होते, जिससे उन पर दबाव बनाना आसान हो सकता है। उन्होंने इसे “लोकतंत्र के लिए खतरा” बताते हुए चुनाव आयोग से मांग की कि मतगणना जैसे संवेदनशील कार्य में केवल स्थायी और जवाबदेह सरकारी कर्मचारियों को ही लगाया जाए।


विपक्ष के इन आरोपों के बीच Election Commission of India ने प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर भरोसा दिलाया है। आयोग का कहना है कि मतगणना केंद्रों पर केंद्रीय और राज्य दोनों स्तर के अधिकारी तैनात किए गए हैं और निगरानी के लिए अतिरिक्त ऑब्जर्वर भी लगाए गए हैं, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सुरक्षित बनी रहे।


राज्य में पहले भी चुनाव के दौरान हिंसा और विवाद के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में इस बार काउंटिंग से पहले उठे इस मुद्दे ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है। सत्तारूढ़ दल जहां इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर सवाल मान रहा है।