22 | Source: 11रात में गहरी नींद के बीच अचानक पिंडली, पैर या पंजे की मांसपेशियों में तेज दर्द के साथ ऐंठन पड़ना बेहद परेशान करने वाला अनुभव हो सकता है। कई बार दर्द इतना तेज होता है कि व्यक्ति नींद से उठकर बैठ जाता है और कुछ समय तक पैर को सामान्य करना भी मुश्किल हो जाता है। आमतौर पर ऐसी ऐंठन कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनट तक रह सकती है और बाद में धीरे-धीरे राहत मिल जाती है। हालांकि, अगर यह समस्या बार-बार हो रही है, दर्द बहुत ज्यादा है या इसके साथ दूसरे लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं, तो इसे केवल सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

रात के समय होने वाली इस समस्या को नाइट लेग क्रैम्प्स कहा जाता है। इसमें मांसपेशियां अचानक और अनैच्छिक रूप से सिकुड़ जाती हैं। यह समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ इसका जोखिम बढ़ सकता है। 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में बार-बार होने वाली ऐसी ऐंठन पर विशेष ध्यान देना जरूरी हो सकता है, क्योंकि कुछ मामलों में इसके पीछे शरीर में पानी की कमी, मांसपेशियों की थकान, नसों से जुड़ी परेशानी, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन या कोई स्वास्थ्य समस्या भी हो सकती है।

रात में सोते समय अचानक क्यों ऐंठ जाती है पिंडली?

रात में पैरों की मांसपेशियों में ऐंठन होने का एक ही कारण नहीं होता। कई बार इसका स्पष्ट कारण पता नहीं चल पाता। लंबे समय तक खड़े रहने, दिनभर अधिक शारीरिक मेहनत करने, मांसपेशियों के अत्यधिक इस्तेमाल, लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहने और उम्र बढ़ने जैसी स्थितियां रात में पैर की ऐंठन का जोखिम बढ़ा सकती हैं।

शरीर में पानी की कमी भी एक महत्वपूर्ण कारण हो सकती है। दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने, अधिक पसीना निकलने या शरीर से तरल पदार्थ की अधिक मात्रा बाहर निकलने की स्थिति में मांसपेशियों पर असर पड़ सकता है। कुछ विशेषज्ञ मांसपेशियों और नसों के बीच होने वाले नियंत्रण में बदलाव को भी रात में होने वाली ऐंठन से जोड़ते हैं।

क्या केवल मैग्नीशियम या पोटैशियम की कमी से ही पड़ता है पैर में क्रैम्प?

पैर में ऐंठन होने पर अक्सर लोग तुरंत मैग्नीशियम, पोटैशियम या कैल्शियम की कमी को इसका कारण मान लेते हैं। हालांकि हर व्यक्ति में रात के समय होने वाली मांसपेशियों की ऐंठन का कारण इलेक्ट्रोलाइट की कमी हो, यह जरूरी नहीं है। वैज्ञानिक जानकारी के अनुसार इसके कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं।

फिर भी शरीर में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन कुछ परिस्थितियों में ऐंठन का जोखिम बढ़ा सकता है। अधिक पसीना आना, उल्टी या दस्त होना, शरीर में पानी की कमी, अत्यधिक व्यायाम और कुछ किडनी संबंधी समस्याएं ऐसी स्थितियां हैं जिनमें शरीर के इलेक्ट्रोलाइट संतुलन पर असर पड़ सकता है।

यदि किसी व्यक्ति में इलेक्ट्रोलाइट की कमी का संदेह हो, तो चिकित्सक जरूरत के अनुसार रक्त जांच कराने के बाद उपचार या सप्लीमेंट की सलाह दे सकते हैं। बिना जांच के अपनी तरफ से मैग्नीशियम, पोटैशियम या कैल्शियम की खुराक शुरू करना उचित नहीं माना जाता।

50 की उम्र के बाद बार-बार ऐंठन हो तो इन बीमारियों पर भी रखें नजर

कभी-कभार पैर में ऐंठन होना आम समस्या हो सकती है, लेकिन अगर यह लगातार या बार-बार होने लगे तो इसके पीछे किसी स्वास्थ्य समस्या की भूमिका भी हो सकती है। कुछ बीमारियां पैरों में दर्द, मांसपेशियों की जकड़न या ऐंठन से जुड़ी हो सकती हैं।

मधुमेह में नसों की परेशानी बन सकती है वजह

मधुमेह लंबे समय तक नियंत्रित न रहने पर नसों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है। नसों से जुड़ी इस समस्या में पैरों में दर्द, असहजता और अन्य तरह की परेशानी महसूस हो सकती है। इसलिए मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति को बार-बार पैरों में ऐंठन होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना उपयोगी हो सकता है।

किडनी की समस्या में बिगड़ सकता है इलेक्ट्रोलाइट संतुलन

किडनी शरीर में पानी और कई महत्वपूर्ण खनिजों के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने पर शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बिगड़ सकता है। ऐसी स्थिति में मांसपेशियों से जुड़ी समस्याएं सामने आ सकती हैं और रात में पैर में अकड़न या ऐंठन की शिकायत हो सकती है।

थायरॉयड की गड़बड़ी से भी हो सकती है मांसपेशियों में जकड़न

हाइपोथायरॉयडिज्म यानी थायरॉयड हार्मोन का पर्याप्त मात्रा में उत्पादन न होना शरीर के कई सामान्य कार्यों को प्रभावित कर सकता है। इस स्थिति में कुछ लोगों को मांसपेशियों में जकड़न और ऐंठन जैसी शिकायतें हो सकती हैं। यदि पैर में बार-बार ऐंठन के साथ थायरॉयड से जुड़े अन्य लक्षण भी मौजूद हों, तो चिकित्सक से जांच और सलाह लेना जरूरी है।

पैरों में रक्त प्रवाह कम होने पर भी बढ़ सकती है परेशानी

परिधीय धमनी रोग में पैरों तक रक्त का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। इससे पैरों में दर्द या ऐंठन जैसी समस्या महसूस हो सकती है। विशेष रूप से बार-बार होने वाले लक्षणों को केवल उम्र का असर मानने के बजाय उनके कारण की चिकित्सकीय जांच कराना महत्वपूर्ण हो सकता है।

नसों पर दबाव से भी हो सकती है पैर में ऐंठन

रीढ़ की हड्डी या पैरों की नसों से जुड़ी कुछ समस्याओं में नसों पर दबाव पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में पैरों में दर्द, असहजता या ऐंठन जैसी शिकायतें सामने आ सकती हैं। अगर पैर की ऐंठन के साथ नसों से जुड़े दूसरे लक्षण भी दिखाई दें, तो चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी हो सकता है।

आधी रात को अचानक पिंडली ऐंठ जाए तो तुरंत क्या करें?

रात में अचानक पैर में क्रैम्प पड़ने पर सबसे पहले घबराने के बजाय प्रभावित मांसपेशी को धीरे-धीरे खींचने की कोशिश की जा सकती है। यदि पिंडली में ऐंठन हो तो पंजे को धीरे-धीरे अपनी ओर खींचना मांसपेशी को फैलाने में मदद कर सकता है।

मांसपेशी की हल्की मालिश भी की जा सकती है। बहुत ज्यादा दबाव डालने के बजाय धीरे-धीरे मालिश करने से मांसपेशियों के तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है। कुछ कदम धीरे-धीरे चलने की कोशिश करना भी उपयोगी हो सकता है, क्योंकि इससे प्रभावित मांसपेशी को सामान्य स्थिति में आने में मदद मिल सकती है।

कुछ लोगों को गर्म सिकाई से भी राहत मिलती है। गर्म तौलिया या उचित तरीके से इस्तेमाल किया गया हीट पैड प्रभावित मांसपेशी को आराम देने में मदद कर सकता है। यदि शरीर में पानी की कमी इसकी वजह हो, तो पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी हो जाता है?

अगर पैर में ऐंठन कभी-कभार होती है और थोड़ी देर में अपने आप ठीक हो जाती है, तो आमतौर पर इसे लेकर अत्यधिक चिंता करने की जरूरत नहीं होती। लेकिन जब क्रैम्प्स बार-बार होने लगें, बहुत ज्यादा दर्द हो, लंबे समय तक बने रहें या रोजमर्रा की नींद प्रभावित करने लगें, तब चिकित्सक से सलाह लेना बेहतर है।

इसी तरह यदि किसी व्यक्ति को मधुमेह, किडनी की बीमारी, थायरॉयड संबंधी समस्या या नसों से जुड़ी परेशानी पहले से है और उसके पैरों में लगातार ऐंठन हो रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। चिकित्सक लक्षणों और स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर आवश्यक जांच की सलाह दे सकते हैं और समस्या के वास्तविक कारण की पहचान कर सकते हैं।

सिर्फ उम्र का असर समझकर न छोड़ें पैरों की बार-बार होने वाली ऐंठन

रात में पिंडली या पैर में ऐंठन आम समस्या हो सकती है, लेकिन हर बार इसे सामान्य मानना सही नहीं है। मांसपेशियों की थकान, पानी की कमी और दिनभर की गतिविधियों से लेकर इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन तथा कुछ स्वास्थ्य समस्याएं इसके पीछे हो सकती हैं। खासकर 50 वर्ष से अधिक उम्र में अगर यह परेशानी बार-बार सामने आती है, तो इसके कारण पर ध्यान देना जरूरी है।

संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, नियमित और उचित शारीरिक गतिविधि तथा मांसपेशियों की स्ट्रेचिंग कुछ लोगों में इस समस्या को कम करने में मदद कर सकती है। हालांकि, बार-बार होने वाली या अत्यधिक दर्दनाक ऐंठन के मामले में केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सक से उचित सलाह लेना अधिक महत्वपूर्ण है।