ere | Source: ereनई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच गकेबरहा में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका के कप्तान टेंबा बावुमा ने दबाव के बीच शानदार शतक लगाकर अपनी टीम को बड़ी राहत दी। शुरुआती विकेट तेजी से गिरने के बाद दक्षिण अफ्रीकी टीम मुश्किल में नजर आ रही थी, लेकिन बावुमा ने धैर्य और सूझबूझ के साथ बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों का सामना किया। उनके टेस्ट करियर का यह पांचवां शतक है। खास बात यह रही कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में यह उनका पहला शतक है। मार्को यानसेन के साथ उनकी महत्वपूर्ण साझेदारी ने दक्षिण अफ्रीका को संकट से उबारने में अहम भूमिका निभाई।

स्कॉट बोलैंड की घातक गेंदबाजी से संकट में दक्षिण अफ्रीका

दूसरे टेस्ट के शुरुआती दो दिन बारिश से प्रभावित रहे। इस दौरान ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज स्कॉट बोलैंड ने अपनी सटीक लाइन और लेंथ से दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाजों को लगातार परेशान किया। उनकी गेंदबाजी के सामने मेजबान टीम के बल्लेबाज खुलकर रन नहीं बना सके और नियमित अंतराल पर विकेट गिरते रहे। दक्षिण अफ्रीका की पारी एक समय बेहद मुश्किल स्थिति में पहुंच गई थी। टीम ने महज 40 रन के स्कोर पर चार विकेट गंवा दिए थे। शुरुआती झटकों के कारण बल्लेबाजी क्रम दबाव में आ गया और ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाज मुकाबले पर अपनी पकड़ मजबूत करते दिखाई दिए। स्कॉट बोलैंड की गेंदबाजी ने दक्षिण अफ्रीका के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी थी।

110 रन पर छह विकेट गिरने से बढ़ी मुश्किल

तीसरे दिन दक्षिण अफ्रीका के कप्तान टेंबा बावुमा 41 रन के निजी स्कोर से आगे खेलने उतरे। टीम को उनसे बड़ी पारी की उम्मीद थी, लेकिन दूसरे छोर से विकेट गिरने का सिलसिला पूरी तरह थमा नहीं था। सुबह के सत्र में वियान मुल्डर 13 रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका का स्कोर 110 रन पर छह विकेट हो गया। इस स्थिति में टीम पर दबाव काफी बढ़ गया था। ऑस्ट्रेलिया की गेंदबाजी के सामने दक्षिण अफ्रीका को एक ऐसी साझेदारी की जरूरत थी, जो न केवल विकेट बचाए, बल्कि स्कोर को भी तेजी से आगे बढ़ाए। कप्तान बावुमा ने इसी चुनौती को स्वीकार करते हुए संभलकर बल्लेबाजी जारी रखी।

टेंबा बावुमा और मार्को यानसेन की साझेदारी ने बदला मुकाबला

दक्षिण अफ्रीका को मुश्किल परिस्थिति से निकालने की जिम्मेदारी टेंबा बावुमा और ऑलराउंडर मार्को यानसेन ने संभाली। दोनों बल्लेबाजों ने सातवें विकेट के लिए 132 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की। इस साझेदारी ने ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाजों पर दबाव बनाया और दक्षिण अफ्रीका को मुकाबले में वापसी का मौका दिया। मार्को यानसेन ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए 85 रन बनाए। उन्होंने खराब शुरुआत के बाद टीम के स्कोर को मजबूती देने में अहम योगदान दिया। दूसरी ओर, बावुमा ने संयम के साथ बल्लेबाजी की और खराब गेंदों को सीमा रेखा के पार पहुंचाने के साथ विकेट बचाने पर भी ध्यान दिया। दोनों की साझेदारी ने मैच की परिस्थितियों को बदल दिया। जहां एक समय दक्षिण अफ्रीकी टीम बड़े स्कोर तक पहुंचने के लिए संघर्ष कर रही थी, वहीं इस साझेदारी के बाद टीम ने ऑस्ट्रेलिया के सामने चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा करने की दिशा में कदम बढ़ाए।

90वें ओवर में चौका लगाकर बावुमा ने पूरा किया शतक

टेंबा बावुमा ने अपनी पारी के दौरान धैर्य, एकाग्रता और परिस्थितियों के अनुसार बल्लेबाजी का शानदार उदाहरण पेश किया। उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों के दबाव में अपना विकेट बचाए रखा और टीम की पारी को आगे बढ़ाया। खबर लिखे जाने तक बावुमा ने 90वें ओवर में शानदार पुल शॉट खेलकर चौका लगाया और अपना शतक पूरा किया। यह उनके टेस्ट करियर का पांचवां शतक था। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में उनका यह पहला शतक भी है, जिससे इस पारी का महत्व और बढ़ गया। बावुमा की इस पारी ने दिखाया कि मुश्किल हालात में कप्तान की जिम्मेदारी केवल रन बनाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि टीम को संभालना और दूसरे बल्लेबाजों के साथ मिलकर साझेदारी तैयार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।

318 रन पर सात विकेट, दक्षिण अफ्रीका ने की वापसी

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 91 ओवर पूरे होने तक दक्षिण अफ्रीका का स्कोर सात विकेट पर 318 रन था। टेंबा बावुमा 105 रन बनाकर क्रीज पर मौजूद थे, जबकि मार्को यानसेन 85 रन की महत्वपूर्ण पारी खेलकर आउट हो चुके थे। दक्षिण अफ्रीका के लिए शुरुआती झटकों के बाद इस स्कोर तक पहुंचना महत्वपूर्ण रहा। टीम ने 40 रन पर चार विकेट गंवाने के बाद संघर्ष किया और फिर बावुमा तथा यानसेन की साझेदारी की मदद से वापसी की। हालांकि, मैच का अंतिम परिणाम और दोनों टीमों की स्थिति आगे के खेल पर निर्भर करेगी।

कप्तानी पारी से बावुमा ने दिया मजबूत संदेश

टेंबा बावुमा का शतक दक्षिण अफ्रीका के लिए केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि संकट से उबरने की एक अहम कोशिश भी रहा। स्कॉट बोलैंड की घातक गेंदबाजी के कारण दबाव में आई टीम को कप्तान ने संभाला और मार्को यानसेन के साथ मिलकर ऑस्ट्रेलिया की बढ़त को चुनौती दी।