बिहार के सिवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान AK-47 से फायरिंग का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। इस मामले में बिहार सरकार ने अदालत में अपना पक्ष रखा है। सरकार का कहना है कि पुलिसकर्मी ने प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोली चलाने के लिए नहीं, बल्कि हवा में चेतावनी देने के लिए चार राउंड फायर किए थे। सरकार ने यह भी कहा कि जिन तीन प्रदर्शनकारियों के घायल होने की बात सामने आई है, उन्हें AK-47 की गोली नहीं लगी थी।

यह वही मामला है जिसका वीडियो जुलाई में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। वीडियो में एक पुलिसकर्मी AK-47 से फायर करता दिखाई दे रहा था। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई पर कई सवाल उठे और मामला राजनीतिक मुद्दा भी बन गया।
यह पूरा मामला 25 जुलाई 2026 को हुए छात्र प्रदर्शन से जुड़ा है। छात्र NEET पेपर लीक और पुलिस कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। बिहार बंद के दौरान सिवान समेत कई जगहों पर प्रदर्शन हुए।
सिवान में प्रदर्शन के दौरान स्थिति बिगड़ गई। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ। पुलिस का कहना है कि भीड़ की तरफ से पत्थर और पानी की बोतलें फेंकी गईं, जिसमें कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए। इसके बाद भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया गया।
इसी दौरान एक पुलिसकर्मी के हाथ में AK-47 दिखाई दी और उसने फायरिंग की। वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल सबसे ज्यादा उठा कि आखिर छात्रों के प्रदर्शन के बीच इतनी खतरनाक राइफल से गोली चलाने की जरूरत क्यों पड़ी।सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा?
अब बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इस सवाल का जवाब दिया है। सरकार के मुताबिक, जिस पुलिसकर्मी ने AK-47 से फायरिंग की, वह प्रदर्शनकारियों की भीड़ में घिर गया था। सरकार ने कहा कि उसने अपनी सुरक्षा और भीड़ को चेतावनी देने के लिए हवा में चार गोलियां चलाईं।
सरकार ने यह भी दावा किया कि पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल नहीं किया। उसके मुताबिक, प्रदर्शन कई जगह हिंसक हो गया था और पुलिसकर्मियों पर भी हमला हुआ था।
हालांकि, इस दलील के बावजूद AK-47 से फायरिंग का मामला सवालों के घेरे में बना हुआ है। खासकर इसलिए क्योंकि पुलिसकर्मी के पास मौजूद हथियार और उसके इस्तेमाल का वीडियो सामने आ चुका है।
वीडियो वायरल होने के बाद बिहार पुलिस ने संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की थी। AK-47 चलाते दिखाई देने वाले कांस्टेबल अभिषेक कुमार पटेल को निलंबित कर दिया गया था। पुलिस अधिकारियों ने साफ किया था कि इस तरह हथियार का इस्तेमाल करने की घटना की जांच की जाएगी।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने शुरुआती तौर पर बताया था कि AK-47 से फायरिंग हवा में की गई थी और यह बिना आदेश के हुई थी। मामले में पुलिस ने अलग-अलग तरह की फायरिंग की भी जानकारी दी थी।
घटना के बाद राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी। याचिका में छात्र प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिस ज्यादती की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई।
अब बिहार सरकार के हलफनामे के बाद मामले में एक नया मोड़ आया है। सरकार का कहना है कि पुलिसकर्मी ने जानबूझकर छात्रों को निशाना बनाकर गोली नहीं चलाई। दूसरी तरफ, इस घटना को लेकर उठे सवालों का अंतिम जवाब जांच और अदालत की आगे की सुनवाई में ही साफ होगा।
फिलहाल सिवान का AK-47 मामला सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं है। यह पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के तरीके और बल प्रयोग की सीमा को लेकर भी बड़ी बहस बन चुका है।
