नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज और पूर्व टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव ने राष्ट्रीय टी20 टीम से बाहर किए जाने को लेकर पहली बार खुलकर अपनी बात रखी है। सूर्यकुमार के मुताबिक, टीम की घोषणा होने से करीब 2-3 दिन पहले चयनकर्ताओं ने उन्हें फोन करके पहले ही बता दिया था कि इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज के लिए टीम में उनका नाम नहीं होगा। इस बातचीत के बाद भी उन्होंने चयनकर्ताओं से अपने चयन के लिए किसी तरह की गुजारिश नहीं की।
सूर्यकुमार ने यह भी बताया कि शुरुआत में जब उन्हें टीम में जगह नहीं मिलने की जानकारी मिली तो उन्होंने मुस्कुराकर इसे स्वीकार किया, लेकिन बाद में यह फैसला उनके लिए भावनात्मक रूप से परेशान करने वाला बन गया। उन्होंने कहा कि 2026 में टी20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि वह आगे भी भारतीय टीम को कम से कम अगले दो साल तक नेतृत्व दे पाएंगे।
टीम से बाहर होने की खबर पर पहले मुस्कुराए, फिर परेशान हुए
पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा के YouTube चैनल पर बातचीत के दौरान सूर्यकुमार यादव ने बताया कि जब उन्हें पता चला कि उनका नाम टीम में नहीं है तो उनकी पहली प्रतिक्रिया मुस्कुराने की थी। उन्होंने कहा कि क्रिकेट करियर के दौरान जब भी उन पर दबाव आया या परिस्थितियां उनके मुताबिक नहीं रहीं, उन्होंने खुद को शांत रखने और मुस्कुराने की कोशिश की।
सूर्यकुमार ने कहा कि ऐसे मुश्किल समय में वह पहले भी खुद को रिलैक्स रखने की कोशिश करते रहे हैं। उनका मानना है कि मुश्किल परिस्थितियों में भी सकारात्मक रहना उन्हें बेहतर प्रदर्शन के मौके देता रहा है। हालांकि, इस बार की स्थिति उनके लिए अप्रत्याशित थी।
‘मुझे लगा था टीम को दो साल और आगे ले जाऊंगा’
सूर्यकुमार यादव ने कहा कि 2026 में टी20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि वह भारतीय टीम के साथ आगे भी जुड़े रहेंगे। उन्हें लगा था कि आने वाले दो वर्षों में टीम को आगे ले जाने का मौका मिलेगा। उन्होंने ओलंपिक्स और भविष्य में होने वाले एक और टी20 वर्ल्ड कप को भी संभावित चुनौतियों के तौर पर देखा था।
लेकिन सूर्यकुमार ने यह भी स्वीकार किया कि किसी एक व्यक्ति की सोच और दूसरे व्यक्ति की सोच हमेशा एक जैसी नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि चयनकर्ताओं को अपने फैसले का सम्मान करना जरूरी है। अगर उन्हें लगा कि टीम के लिए आगे बढ़ना और बदलाव करना बेहतर निर्णय है, तो उन्होंने वही फैसला लिया।
‘अगर टीम किसी और के नेतृत्व में अच्छा करती है तो कोई दिक्कत नहीं’
सूर्यकुमार यादव ने साफ किया कि उन्होंने चयनकर्ताओं के फैसले पर कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी। उनका कहना था कि यह चयन समिति का फैसला था और उन्होंने उसे स्वीकार किया।
उन्होंने कहा कि यदि टीम किसी दूसरे कप्तान के नेतृत्व में अच्छा प्रदर्शन कर सकती है तो उन्हें इससे कोई परेशानी नहीं है। उनके मुताबिक, एक खिलाड़ी के तौर पर उनका लक्ष्य क्रिकेट खेलते रहना है और जब भी टीम को उनकी जरूरत महसूस हो, वह उपलब्ध रहने के लिए तैयार हैं।
चयनकर्ताओं के फोन ने क्यों बढ़ाई सूर्या की बेचैनी?
सूर्यकुमार ने माना कि चयनकर्ताओं से आया फोन उनके लिए बाद में परेशानी का कारण बनने लगा। इसकी एक बड़ी वजह यह थी कि उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया था। उन्होंने बताया कि उनके नेतृत्व में भारत ने करीब दो साल तक कोई टी20 सीरीज नहीं गंवाई थी।
उन्होंने यह भी याद किया कि उनकी कप्तानी में भारत ने टी20 वर्ल्ड कप और एशिया कप जीता था। ऐसे में उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि जब टीम का प्रदर्शन अच्छा चल रहा है तो बदलाव की जरूरत क्यों महसूस की गई।
‘दो साल में एक भी सीरीज नहीं हारी, फिर बदलाव क्यों?’
सूर्यकुमार यादव ने अपनी निराशा का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने लगभग डेढ़ महीने घर पर बैठकर इस फैसले के बारे में सोचा। उनके मन में बार-बार यही सवाल आ रहा था कि आखिर ऐसा कैसे हो सकता है।
उन्होंने स्वीकार किया कि आईपीएल में उनका प्रदर्शन उनकी अपनी उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा था। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि हालात को स्वीकार करने में समय लगा। परिवार और दोस्तों ने उन्हें इस दौर में संभाला और समझाया कि यह जिंदगी और खेल का हिस्सा है।
सूर्यकुमार ने बताया कि जब परिवार और दोस्त अपने-अपने काम से वापस चले जाते हैं और व्यक्ति घर में अकेला रह जाता है, तब ऐसी परिस्थितियों के बारे में ज्यादा सोचने का मौका मिलता है। उनके लिए भी यह दौर इसी तरह का रहा।
टीम घोषित होने से तीन दिन पहले आया था चयनकर्ताओं का फोन
सूर्यकुमार यादव ने बातचीत में सबसे अहम खुलासा उस फोन कॉल को लेकर किया, जो टीम की घोषणा से कुछ दिन पहले आया था। उन्होंने बताया कि चयन समिति ने टीम घोषित होने से करीब 2-3 दिन पहले उनसे संपर्क किया और उन्हें बताया कि आगे बढ़ने का समय आ गया है।
सूर्यकुमार के अनुसार, चयनकर्ताओं ने उन्हें स्पष्ट रूप से बता दिया था कि इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज के लिए उनका नाम टीम में नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इस जानकारी पर उन्होंने कोई बहस या अनुरोध नहीं किया।
‘मैंने कोई रिक्वेस्ट नहीं की’
सूर्यकुमार ने कहा कि जब चयनकर्ताओं ने उन्हें अपने फैसले के बारे में बताया तो उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और न ही टीम में शामिल किए जाने की मांग की। उन्होंने माना कि चयनकर्ताओं ने जो फैसला लिया होगा, उन्हें लगा होगा कि वह टीम के लिए बेहतर है।
उन्होंने कहा कि वह इस फैसले को व्यक्तिगत रूप से लेने के बजाय टीम के नजरिए से देखना चाहते हैं। उनके मुताबिक, चयन समिति ने अपना फैसला लिया और उन्हें उसका सम्मान करना चाहिए।
श्रेयस अय्यर की कप्तानी पर नहीं उठाया सवाल
सूर्यकुमार यादव ने नई टीम के नेतृत्व को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि उन्होंने श्रेयस अय्यर के साथ काफी क्रिकेट खेला है और वह उन्हें एक अच्छा खिलाड़ी, अच्छा इंसान और अच्छा कप्तान भी मानते हैं।
सूर्यकुमार ने कहा कि उनके मन में यह सवाल नहीं था कि श्रेयस अय्यर को कप्तान क्यों बनाया गया। उनकी निराशा की वजह अलग थी। उन्हें इस बात का दुख था कि जिस टीम ने उनके नेतृत्व में लंबे समय तक अच्छा प्रदर्शन किया और बड़े टूर्नामेंट जीते, उसमें अचानक बदलाव क्यों किया गया।
‘यह मेरी गलती नहीं है’
सूर्यकुमार ने कहा कि चयनकर्ताओं के फैसले को स्वीकार करने में उन्होंने इसलिए भी कोई विवाद नहीं खड़ा किया क्योंकि उनके अनुसार यह उनकी गलती नहीं थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा क्रिकेट को लेकर एक सकारात्मक रवैया रखने की कोशिश की है और किसी भी परिस्थिति में खेलना जारी रखना उनका उद्देश्य रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि चयनकर्ताओं ने जब उन्हें फोन करके अपना फैसला बताया तो उन्होंने इसे स्वीकार किया। उनके अनुसार, यदि भविष्य में टीम प्रबंधन को लगता है कि उन्हें फिर से टीम की जरूरत है, तो वह उपलब्ध रहेंगे।
सूर्यकुमार का संदेश- ‘मैं क्रिकेट खेलता रहूंगा’
सूर्यकुमार यादव ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय टीम से बाहर होने के बावजूद उन्होंने क्रिकेट से दूरी बनाने का फैसला नहीं किया है। उन्होंने कहा कि वह क्रिकेट खेलते रहेंगे और जब भी उन्हें लगेगा कि परिस्थितियां सही हैं तथा टीम को उनकी जरूरत है, वह मैदान पर लौटने के लिए तैयार रहेंगे।
उनके इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि टीम से बाहर किए जाने के फैसले के बावजूद सूर्यकुमार ने भविष्य के लिए दरवाजा खुला रखा है। उन्होंने चयनकर्ताओं के फैसले को चुनौती देने के बजाय अपने खेल पर ध्यान देने की बात कही।
