रोहिणी आचार्य | Source: kalamlokपटना। RJD में एक बार फिर अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सारण के पार्टी प्रवक्ता हरेलाल यादव को छह वर्ष के लिए निष्कासित किए जाने के फैसले पर खुलकर नाराजगी जताई है। उन्होंने ‘x’ पर लंबी पोस्ट साझा करते हुए पार्टी के फैसले पर सवाल उठाए और कहा कि संगठन में अब सच बोलने वालों के लिए जगह नहीं बची है। साथ ही उन्होंने पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं पर भी गंभीर आरोप लगाए।

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उन्होंने आरोप लगाया कि हरेलाल यादव के खिलाफ हुई कार्रवाई कुछ ऐसे लोगों के प्रभाव में की गई है, जो संगठन को कमजोर करने का काम कर रहे हैं। रोहिणी ने कहा कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं का मनोबल इस तरह के फैसलों से प्रभावित होता है।


रोहिणी आचार्य ने अपनी पोस्ट में कहा कि हरेलाल यादव पर अनुशासनहीनता के आरोप लगाकर उन्हें पार्टी से बाहर करना दुर्भाग्यपूर्ण फैसला है। उनके अनुसार, जो कार्यकर्ता वर्षों से संगठन के लिए ईमानदारी और समर्पण के साथ काम कर रहे हैं, उनके खिलाफ इस तरह की कार्रवाई उचित नहीं कही जा सकती। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब पार्टी के भीतर सच बोलना भी अनुशासनहीनता माना जाएगा।


वरिष्ठ नेताओं पर लगाए गंभीर आरोप

अपनी पोस्ट में रोहिणी आचार्य ने RJD के वरिष्ठ नेताओं संजय यादव, सुनील सिंह और रमीज का नाम लेते हुए उन पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर कुछ लोग संगठन के हितों के बजाय अपने निजी एजेंडे पर काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक सारण जिले में ऐसे नेताओं का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे पार्टी को नुकसान पहुंच रहा है।


रोहिणी ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव के समय भी कुछ नेता पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहते हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। इसके विपरीत, पार्टी के प्रति समर्पित कार्यकर्ताओं को ही निशाना बनाया जाता है।


दबाई जा रही है जमीनी कार्यकर्ताओं की आवाज

रोहिणी आचार्य ने कहा कि जो कार्यकर्ता जनता के बीच रहकर संगठन को मजबूत करने का काम करते हैं, उन्हें ही कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि गलत निर्णयों पर सवाल उठाना अनुशासनहीनता है, तो पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक संवाद कैसे संभव होगा। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल की ताकत उसके जमीनी कार्यकर्ता होते हैं और उनकी आवाज को दबाने के बजाय सुना जाना चाहिए। रोहिणी आचार्य ने अपनी पोस्ट में कहा कि यदि पार्टी नेतृत्व वास्तव में अनुशासन को लेकर गंभीर है, तो सभी नेताओं के लिए एक समान मापदंड अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि संजय यादव जैसे नेताओं पर सवाल उठाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है, तो संबंधित नेताओं के आचरण की भी निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए।