प्रधानमंत्री जी,
त्रिपुरा के एंजेल चकमा की हत्या पर आप चुप क्यों हैं? आपने निंदा क्यों नहीं की? आपने एजेंल के परिवार से मुलाकात क्यों नहीं की? उसके भाई से बात क्यों नहीं की? कायदे से आपको राष्ट्र के नाम संबोधन करना था, संसद का विशेष सत्र बुलाना था और इस घटना के पीछे की विचारधारा की निंदा करनी थी।एजेंल की हत्या कानून व्यवस्था की समस्या नहीं है कि चार लोगों की गिरफ़्तारी से इंसाफ़ हो जाएगा। मुख्य आरोपी फ़रार है, वह कभी न कभी पकड़ा जाएगा लेकिन मुख्य आरोपी तो वह विचारधारा है जो हर दिन किसी न किसी शहर में हत्यारों का गैंग तैयार कर रही है। उस विचारधारा को कौन गिरफ़्तार करेगा? वह विचारधारा आज भी फ़रार है और अपराधी तैयार कर रही है। जिसके दम पर कोई खुलेआम तलवार बांट रहा है, कोई चर्च में घुस कर हिंसा कर रहा है, कोई सैंटा की टोपी पलट रहा है और कोई मस्जिद के आगे गालियों वाला गाना बजा रहा है। इनमें से कई आपकी पार्टी में नज़र आते हैं और कइयों के साथ आपकी पार्टी और सरकार खड़ी नज़र आती है। इसी विचारधारा ने एजेंल चकमा की हत्या की है। इसके नाम पर बने संगठनों ने ऐसे लोगों का हौसला बढ़ाया है।आपकी चुप्पी भी इनका हौसला बढ़ा रही है।
2014 से गोदी मीडिया, आई टी सेल, आपकी पार्टी के नेता इसी नफ़रती विचारधारा को हवा देते रहे हैं। जो सरकार अख़लाक़ के हत्यारों की सज़ा माफ़ करवाने वाली है, कैसे भरोसा किया जाए कि एंजेल चकमा के हत्यारों को सज़ा मिल ही जाएगी? क्या अंकिता भंडारी को इंसाफ़ मिला? जब तक आप विचारधारा के ख़िलाफ़ नहीं बोलेंगे तब तक एजेंल, अख़लाक़, अंकिता और राम नारायण बघेल को इंसाफ़ नहीं मिलेगा। केरला में रामनारायण बघेल को बांग्लादेशी बता कर मार दिया गया। कपड़ों से पहचाने की भाषा आप लेकर आए राजनीति में।किसी को पाकिस्तानी, किसी को घुसपैठिया बोलने की भाषा किस विचारधारा के पाले से आती है, आप जानते हैं। देश जानता है। बिना घुसपैठिए का ज़िक्र किए आपके गृहमंत्री एक भाषण नहीं दे पाते हैं और हिसाब तक नहीं देते कि पंद्रह साल में कितने घुसपैठियों को निकाला, पकड़ा और पहचाना? ज़ाहिर है इससे उस भीड़ का हौसला बढ़ा है जो कभी मांस के नाम पर, कभी भाषा और धर्म के नाम पर किसी को अपना शिकार बना लेती है। देशभक्ति का सर्टिफिकेट बांटने और पूछने की राजनीति सिस्टम में घुस गई है। चुनाव आयोग भी घुसपैठिया की भाषा बोलने लगा है।
एंजेल चकमा की हत्या मामूली घटना नहीं है। पूर्वोत्तर के लोगों ने आँख मूंद कर भरोसा किया, आपकी पार्टी को बार-बार सत्ता दी । पूर्वोत्तर को केवल पुल नहीं चाहिए, जिस पर चल कर आप विकास की राजनीति का फोटो खिंचवाते हैं। पुल और फ्लाईवर इस देश में तब भी बन जाएगा जब कोई प्रधानमंत्री नहीं होगा, जब कोई सरकार नहीं होगी। यह ठेकेदारों का बनाया हुआ देश के भीतर एक ऐसा देश है जहाँ कमीशनखोरी के लिए फ्लाईओवर अपने आप बनता रहता है और रहेगा। आप पूर्वोत्तर के छात्रों को बुलाइये, पूछिए कि क्या उन्हें मोमो, चिंकी, चाइनीज़ का ताना सुनना पड़ा है? इतना ही नहीं, एजेंल चकमा की हत्या में शामिल उन लड़कों से भी बात कीजिए, पता लगाइये कि उनके दिमाग़ मे चिंकी और मोमो की बात कहाँ से आई, आपको जवाब मिल जाएगा। हत्या में शामिल किस तरह की सोच रखते थे, पता कीजिए।केवल गिरफ्तारी इस हत्या की सज़ा नहीं है।
आप एक सांसद हैं, क्या यह शर्म की बात नहीं कि लोकसभा में आपके सहयोगी सांसद गौरव गोगोई को लिखना पड़ रहा है कि वे भारतीय हैं, चाइनीज़ नहीं। कब तक पूर्वोत्तर के लोग बार बार इसी पर लौटते रहेंगे कि उत्तर भारत में उन्हें चिंकी और चाइनीज़ कहा जाता है। आपके पास किसी को भी अन्य बना देने की फैक्ट्री है, उस फैक्ट्री को बंद कर दीजिए। उससे केवल सड़ा माल निकल रहा है, जिसकी दुर्गन्ध हाउसिंग सोसायटी के आवारा अंकिलों को ही भाती है। प्रधानमंत्री जी, इतनी चुप्पी ठीक नहीं है, बोलिए।
-रवीश कुमार
Discussion (0)
Join the discussion by logging in to your account.
SIGN INBe the first to share your thoughts!
news@kalamlok.com
हमारी वेबसाइट एक ऑनलाइन न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो आपको देश-विदेश की ताजा खबरें, विश्लेषण, और जानकारी प्रदान करती है। हमारा उद्देश्य आपको सटीक, निष्पक्ष, और समयबद्ध जानकारी पहुंचाना है। विशेषताएं: - ताजा खबरें - विश्लेषण और समीक्षा - वीडियो न्यूज़ - फोटो गैलरी - ब्लॉग और आर्टिकल - न्यूज़ आर्काइव श्रेणियाँ: - राष्ट्रीय खबरें - अंतरराष्ट्रीय खबरें - व्यवसाय - खेल - मनोरंजन - तकनीक - नौकरी हमारी वेबसाइट पर आप: - ताजा खबरें पढ़ सकते हैं - वीडियो देख सकते हैं - फोटो गैलरी देख सकते हैं - ब्लॉग और आर्टिकल पढ़ सकते हैं - न्यूज़ आर्काइव देख सकते हैं - नौकरी की सटीक जानकारी ले सकते हैं संपर्क: ईमेल: qalamlok@gmail.com