बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए शुक्रवार का दिन भारी असमंजस, गुस्से और बेचैनी से भरा रहा। एक तरफ बिहार लोक सेवा आयोग ने उद्योग विभाग के परियोजना प्रबंधक भर्ती परीक्षा को अचानक स्थगित कर दिया, तो दूसरी तरफ टीआरई-4 शिक्षक भर्ती विज्ञापन जारी नहीं होने से नाराज अभ्यर्थियों का गुस्सा पटना की सड़कों पर फूट पड़ा। राजधानी में हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए, नारेबाजी हुई, मार्च निकला और आखिरकार हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा।
इन दोनों घटनाओं ने बिहार में भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था, युवाओं के भविष्य और सरकार की तैयारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अचानक परीक्षा स्थगित होने से बढ़ी अभ्यर्थियों की बेचैनी
बिहार लोक सेवा आयोग ने विज्ञापन संख्या 109/2025 के तहत होने वाली परियोजना प्रबंधक भर्ती परीक्षा को “अपरिहार्य प्रशासनिक कारणों” का हवाला देते हुए स्थगित कर दिया। यह परीक्षा 30 मई 2026 को प्रस्तावित थी और हजारों उम्मीदवार पिछले कई महीनों से इसकी तैयारी में जुटे हुए थे। जैसे ही आयोग की ओर से परीक्षा टलने की सूचना जारी हुई, अभ्यर्थियों के बीच निराशा और भ्रम का माहौल बन गया। कई छात्रों का कहना है कि परीक्षा की तारीख नजदीक आने के बाद अचानक स्थगन से उनकी पूरी तैयारी और मानसिक संतुलन प्रभावित हुआ है। आयोग ने हालांकि नई तारीख बाद में घोषित करने की बात कही है, लेकिन परीक्षा कब होगी, इसे लेकर कोई स्पष्टता नहीं दी गई।
टीआरई-4 विज्ञापन में देरी ने भड़काया छात्र आंदोलन
इसी बीच बिहार में टीआरई-4 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर पहले से नाराज अभ्यर्थियों का आक्रोश और तेज हो गया। हजारों छात्र पटना कॉलेज परिसर में जमा हुए और वहां से जेपी गोलंबर तक विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बिहार लोक सेवा आयोग के परीक्षा नियंत्रक ने अप्रैल में सार्वजनिक तौर पर कहा था कि तीन-चार दिनों के भीतर टीआरई-4 का विज्ञापन जारी कर दिया जाएगा, लेकिन अब मई का दूसरा सप्ताह शुरू होने के बावजूद कोई अधिसूचना जारी नहीं हुई। करीब 46 हजार से ज्यादा पदों वाली इस बहाली का इंतजार कर रहे युवाओं का कहना है कि लगातार देरी के कारण उनका भविष्य अधर में लटक गया है। कई अभ्यर्थियों ने आयु सीमा खत्म होने का डर भी जताया।
पटना की सड़कों पर तनाव, पुलिस और छात्रों में टकराव
प्रदर्शन के दौरान छात्र सरकार और आयोग के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ने लगे। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। जेपी गोलंबर और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।
स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश करने लगे। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया। कई छात्र इधर-उधर भागते नजर आए, जबकि कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया। पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय शर्मा खुद मौके पर मौजूद रहे। प्रशासन ने हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए वाटर कैनन और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की भी व्यवस्था की थी।
भर्ती प्रक्रिया पर बढ़ते सवाल, सरकार पर दबाव
बिहार में भर्ती परीक्षाओं को लेकर असंतोष कोई नया मुद्दा नहीं है। बीते कुछ वर्षों में पेपर लीक, परीक्षा स्थगन और भर्ती में देरी जैसे मुद्दों ने लगातार युवाओं के बीच नाराजगी बढ़ाई है।
अब परियोजना प्रबंधक परीक्षा टलने और टीआरई-4 में देरी ने इस असंतोष को और गहरा कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले रोजगार और भर्ती प्रक्रिया सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकती है।
हालांकि बिहार के नए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भरोसा दिलाया है कि टीआरई-4 भर्ती किसी भी हालत में नहीं रुकेगी और जल्द फैसला लिया जाएगा। लेकिन फिलहाल छात्र सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि आधिकारिक अधिसूचना और स्पष्ट समयसीमा चाहते हैं।
