ere | Source: eerनागपुर। महाराष्ट्र के नागपुर स्थित सिम्बायोसिस लॉ स्कूल में एक प्रोफेसर पर छात्राओं को कथित तौर पर अनुचित संदेश भेजने और इस्लाम धर्म अपनाने के साथ कुरान पढ़ने के लिए कहने का आरोप लगा है। मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में हंगामे की स्थिति बन गई। शिकायत और विरोध के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने संबंधित प्रोफेसर को जांच पूरी होने तक छुट्टी पर भेज दिया है। प्रशासन ने आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की है। यह समिति नागपुर में सामने आए मामले के साथ-साथ हैदराबाद स्थित सिम्बायोसिस लॉ स्कूल में प्रोफेसर के पिछले कार्यकाल के दौरान उनके आचरण से जुड़े आरोपों की भी जांच करेगी। 18 अक्टूबर 2026, रविवार तक इस मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं हुई थी। फिलहाल आरोपों की जांच जारी है और प्रोफेसर के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

छात्रा के पिता को दिखाए गए संदेशों के बाद सामने आया मामला

मामले की शुरुआत तब हुई, जब एक छात्रा ने प्रोफेसर की ओर से भेजे गए कथित संदेश अपने पिता को दिखाए। इन संदेशों को लेकर छात्रा के पिता ने चिंता जताई और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के सदस्यों से संपर्क किया। इसके बाद संगठन के सदस्यों ने मामले को विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने उठाया और नागपुर के पुलिस कमिश्नर से भी मुलाकात की। शिकायत सामने आने के बाद मामला विश्वविद्यालय परिसर में चर्चा का विषय बन गया। छात्रा के परिवार और संगठन से जुड़े लोगों ने आरोपों को गंभीर बताते हुए प्रशासन से कार्रवाई की मांग की। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए जांच की प्रक्रिया शुरू की। विश्वविद्यालय के एक अधिकारी के अनुसार, प्रशासन ने शिकायत को गंभीरता से लिया है। आरोपों की जांच करने और आगे की कार्रवाई के संबंध में सिफारिश देने के लिए उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है। जांच पूरी होने और समिति की रिपोर्ट आने तक संबंधित प्रोफेसर को छुट्टी पर रखने का निर्णय लिया गया है। इस अवधि में उन्हें विश्वविद्यालय परिसर में आने की अनुमति नहीं होगी।

प्रोफेसर के पिछले कार्यकाल की भी होगी जांच

विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से गठित समिति की जांच केवल नागपुर परिसर में सामने आए आरोपों तक सीमित नहीं रहेगी। समिति हैदराबाद स्थित सिम्बायोसिस लॉ स्कूल में प्रोफेसर के पिछले कार्यकाल के दौरान उनके कथित आचरण से संबंधित आरोपों की भी पड़ताल करेगी। इस फैसले के बाद मामले की जांच का दायरा बढ़ गया है। समिति को आरोपों की जांच कर तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करनी है और आगे की कार्रवाई के लिए सिफारिशें देनी हैं। हालांकि, हैदराबाद से जुड़े आरोपों की प्रकृति और उनके संबंध में सामने आए विस्तृत तथ्यों की जानकारी उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं दी गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच पूरी होने तक प्रोफेसर को छुट्टी पर रखने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य मामले की जांच के दौरान आरोपों की पड़ताल करना और उसके बाद उचित कार्रवाई तय करना है। फिलहाल, समिति की रिपोर्ट आने से पहले प्रोफेसर के खिलाफ आरोपों को सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।

प्रदर्शनकारियों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच हुई बातचीत

नागपुर पुलिस के जोन-5 के पुलिस कमिश्नर नित्यानंद झा के मुताबिक, शनिवार सुबह करीब 11:30 बजे विभिन्न संगठनों से जुड़े 15 से 17 लोग विश्वविद्यालय परिसर पहुंचे थे। इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच बातचीत कराई। बातचीत के बाद प्रोफेसर को छुट्टी पर भेजने का निर्णय लिया गया। इसके बाद शनिवार शाम करीब 6:45 बजे शिकायतकर्ता छात्रा और उसके पिता के साथ 15 से 20 लोगों का एक अन्य समूह भी परिसर पहुंचा। उस समय विश्वविद्यालय की जांच समिति लगभग 100 से 120 छात्रों के साथ खुली चर्चा कर रही थी। इस चर्चा का उद्देश्य मामले से संबंधित परिस्थितियों और छात्रों की चिंताओं को सामने लाना था। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल के बीच एक और बैठक कराई। इस बैठक में छह से सात लोगों का प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ, जिसमें शिकायतकर्ता छात्रा भी मौजूद थीं। बातचीत के दौरान मामले की जांच और प्रशासन की ओर से उठाए गए कदमों पर चर्चा हुई।

जांच समिति ने उचित कार्रवाई का दिया भरोसा

बैठक के दौरान विश्वविद्यालय की समिति ने शिकायतकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि सभी आरोपों की जांच की जाएगी। समिति ने यह भी कहा कि निर्धारित समय के भीतर जांच पूरी कर उचित कार्रवाई के संबंध में निर्णय लिया जाएगा। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस ने छात्रों को मामले में हुई प्रगति की जानकारी दी। नागपुर पुलिस के जोन-5 के पुलिस कमिश्नर नित्यानंद झा के अनुसार, पूरे घटनाक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था से जुड़ी कोई समस्या सामने नहीं आई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच बातचीत कराने में भूमिका निभाई, जिसके बाद मामले को लेकर आगे की प्रक्रिया विश्वविद्यालय प्रशासन की जांच समिति के माध्यम से जारी है। प्रशासन की ओर से उठाए गए कदमों में प्रोफेसर को छुट्टी पर भेजना, उच्चस्तरीय समिति का गठन करना और शिकायतकर्ताओं से बातचीत करना शामिल है। अब जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

प्राथमिकी दर्ज नहीं, जांच पूरी होने के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई

18 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई थी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने विभागीय स्तर पर आरोपों की जांच शुरू कर दी है। समिति नागपुर में छात्रा की शिकायत और हैदराबाद में प्रोफेसर के पिछले कार्यकाल से संबंधित आरोपों की पड़ताल करेगी। इस मामले में जांच रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि उसी के आधार पर आरोपों की पुष्टि, संबंधित तथ्यों का मूल्यांकन और आगे की कार्रवाई को लेकर सिफारिश की जाएगी। फिलहाल, विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रोफेसर को छुट्टी पर भेजकर जांच पूरी होने तक परिसर से दूर रखने का फैसला किया है।