
पटना। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अपनी संपत्ति, आय, निवेश कंपनी और शैक्षणिक योग्यता को लेकर उठ रहे सवालों पर विस्तार से जवाब दिया है। नामांकन पत्र में घोषित चल-अचल संपत्ति और शैक्षणिक योग्यता को लेकर चर्चा के बीच प्रशांत किशोर ने एक डिजिटल इंटरव्यू में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी सभी जानकारियां कानून के अनुसार सार्वजनिक की हैं।
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए दाखिल नामांकन पत्र के अनुसार, प्रशांत किशोर और उनकी पत्नी डॉ. जाह्नवी दास की कुल चल-अचल संपत्ति 208 करोड़ रुपये से अधिक घोषित की गई है। हलफनामे में दी गई इसी जानकारी के बाद उनकी आय, कंपनी और शैक्षणिक योग्यता को लेकर विभिन्न प्रकार के सवाल उठाए जा रहे थे।
वेदास वेंचर क्या करती है?
प्रशांत किशोर की व्यक्तिगत संपत्ति का बड़ा हिस्सा वेदास वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड में उनकी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी से जुड़ा हुआ है। हलफनामे के अनुसार इस हिस्सेदारी का मूल्यांकन 95.26 करोड़ रुपये किया गया है।
प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया कि वेदास वेंचर कोई राजनीतिक परामर्श (पॉलिटिकल कंसल्टिंग) कंपनी नहीं है। उनके अनुसार यह एक निवेश कंपनी है, जिसका मुख्य कार्य शेयर, बॉन्ड और डिबेंचर जैसे वित्तीय साधनों में निवेश का प्रबंधन करना है। उन्होंने कहा कि कंपनी का व्यवसाय पूरी तरह निवेश आधारित है और इसका संचालन कानूनी प्रावधानों के अनुरूप किया जाता है।
जन सुराज को दिया 85 करोड़ रुपये का डोनेशन
प्रशांत किशोर ने स्वीकार किया कि इसी कंपनी के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान उनकी राजनीतिक पार्टी जन सुराज को 85 करोड़ रुपये का डोनेशन दिया गया। इसके अलावा जन सुराज फाउंडेशन को 50 लाख रुपये का योगदान भी दिया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में इस निवेश कंपनी से होने वाली कमाई का 90 प्रतिशत हिस्सा जन सुराज आंदोलन को समर्पित करने का उनका संकल्प है। उनके अनुसार कंपनी से होने वाली आय का उपयोग सामाजिक और राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।
आय और टैक्स को लेकर भी दिया जवाब
करीब 200 करोड़ रुपये की घोषित आय को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रशांत किशोर ने कहा कि उन्होंने अपनी आय को छिपाने के बजाय स्वयं कानूनी रूप से घोषित किया है। उन्होंने कहा कि इस आय पर उन्होंने 35 करोड़ रुपये का GST और 30 प्रतिशत आयकर भी जमा किया है।
उनका कहना था कि यदि किसी व्यक्ति की आय वैध है और उस पर नियमानुसार कर का भुगतान किया गया है, तो उसे छिपाने का कोई कारण नहीं होता। उन्होंने दोहराया कि उनकी पूरी आय और संपत्ति की जानकारी कानून के अनुसार शपथ पत्र में दर्ज की गई है।
मास्टर्स डिग्री पर उठे सवालों का भी दिया जवाब
नामांकन पत्र में दर्ज शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी राजनीतिक विरोधियों ने सवाल उठाए थे। आरोप लगाया गया कि हलफनामे में दर्शाई गई मास्टर्स डिग्री वास्तव में केवल पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा है।
इस पर प्रशांत किशोर ने कहा कि उन्होंने वर्ष 2001 से 2003 के बीच प्रशासनिक स्टाफ कॉलेज, हैदराबाद (ASCI) से मास्टर ऑफ हेल्थकेयर मैनेजमेंट (MHA) का पाठ्यक्रम पूरा किया। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी (अमेरिका) और हिंदुजा अस्पताल के सहयोग से संचालित किया गया था।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत के कई प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान, जैसे आईआईएम अहमदाबाद और ASCI, तकनीकी रूप से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा प्रदान करते हैं, लेकिन शैक्षणिक और व्यावहारिक दृष्टि से इन्हें मास्टर्स डिग्री के समकक्ष मान्यता प्राप्त होती है। उनके अनुसार उनके मूल प्रमाणपत्र पर जो उल्लेखित है, वही उन्होंने कानूनी रूप से अपने शपथ पत्र में दर्ज किया है।
अन्य शैक्षणिक योग्यता भी बताई
प्रशांत किशोर ने अपनी अन्य शैक्षणिक योग्यताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने वर्ष 1993 में पटना साइंस कॉलेज से इंटरमीडिएट (12वीं) की शिक्षा प्राप्त की थी। इसके बाद 1996 से 1999 के बीच लखनऊ यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) की डिग्री हासिल की।
