प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धनपटना/बक्सर। बक्सर के डुमरांव प्रखंड स्थित नथुनी अहिर के डेरा मध्य विद्यालय में नाबालिग छात्राओं के कथित शोषण के मामले में आरोपी प्रधानाध्यापक के नाम की राजकीय शिक्षा सम्मान-2026 के लिए अनुशंसा किए जाने को लेकर बिहार कांग्रेस ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने कहा कि पॉक्सो एक्ट के तहत आरोपी प्रधानाध्यापक का चयन होना गंभीर प्रशासनिक चूक है। उन्होंने चयन प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की है।

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन

डॉ. वर्धन ने कहा कि तत्कालीन एवं वर्तमान जिला शिक्षा पदाधिकारी, चयन समिति के सदस्य तथा संबंधित प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) से यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि आरोपी प्रधानाध्यापक के नाम की अनुशंसा किन मानकों और किस आधार पर की गई। उन्होंने इस पूरे मामले में विभागीय जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि चयन प्रक्रिया में किसी तरह के व्यक्तिगत लाभ या अनियमितता की भी पड़ताल होनी चाहिए।

कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि मामले में आरोपी दोनों शिक्षकों में अब तक केवल मुख्य आरोपी अरविंद कुमार की गिरफ्तारी हुई है। उन्होंने दूसरे आरोपी शिक्षक वीरेंद्र प्रसाद की भी तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। साथ ही आरोपित शिक्षकों की सेवा समाप्त करने की मांग राज्य सरकार और शिक्षा विभाग से की।

उन्होंने यह भी दावा किया कि आरोपी शिक्षक वीरेंद्र प्रसाद के खिलाफ वर्ष 2023 में हुई विभागीय जांच में शिक्षक प्रशिक्षण प्रमाणपत्र में फर्जीवाड़े की बात सामने आई थी। इसके बावजूद उनकी सेवा समाप्त नहीं किए जाने पर भी उन्होंने शिक्षा विभाग से जवाब मांगा और इस पहलू की जांच की मांग की।

डॉ. वर्धन ने कहा कि बक्सर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके वर्तमान शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के कार्यकाल में जिले से पॉक्सो मामले में आरोपी प्रधानाध्यापक का राजकीय शिक्षा सम्मान के लिए चयन होना शिक्षा व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि चयन को बाद में आदेश जारी कर निरस्त कर दिया गया।

उन्होंने सरकार से मांग की कि मामले की पीड़ित नाबालिग बच्चियों और उनके परिजनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। साथ ही कथित तौर पर वायरल वीडियो के प्रसार को रोकने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि पूरे मामले में आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ विभागीय स्तर पर भी कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।