Parliament Monsoon Session: PM मोदी के फास्ट ट्रैक कोर्ट वाले भरोसे के बाद भी नहीं टूटा गतिरोध, चौथे दिन भी ठप रही संसद | Source: PTIसंसद के मानसून सत्र में जारी गतिरोध गुरुवार को भी खत्म नहीं हो सका। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने और दोषियों को जल्द सजा दिलाने का भरोसा दिए जाने के बावजूद विपक्ष और प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कायम रहे। नतीजतन, मानसून सत्र के चौथे दिन भी लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही लगातार हंगामे की भेंट चढ़ गई।

Parliament Monsoon Session: PM मोदी के फास्ट ट्रैक कोर्ट वाले भरोसे के बाद भी नहीं टूटा गतिरोध, चौथे दिन भी ठप रही संसदSource : PTI

संसद की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। विपक्ष की मांग रही कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें और सरकार इस पूरे मामले में जवाबदेही तय करे। दूसरी ओर सरकार ने कहा कि वह इस मुद्दे पर संसद में चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष लगातार हंगामा कर सदन नहीं चलने दे रहा। गतिरोध के चलते दोनों सदनों की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी और अंततः पूरे दिन के लिए रोक दी गई। 

इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार सार्वजनिक रूप से छात्र आंदोलन और पेपर लीक विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और पेपर लीक के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि दोषियों को कड़ी और शीघ्र सजा सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। 

हालांकि, प्रधानमंत्री की इस घोषणा के बाद भी प्रदर्शनकारी और विपक्ष संतुष्ट नहीं दिखे। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे समूहों और विपक्षी दलों ने कहा कि केवल फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते और पूरे मामले की जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इसी वजह से संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह विरोध प्रदर्शन जारी रहे। 

संसद के बाहर भी छात्र आंदोलन का असर लगातार दिखाई दे रहा है। दिल्ली सहित कई राज्यों में प्रदर्शन जारी हैं और विपक्ष इन मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाए हुए है। सरकार का कहना है कि वह चर्चा के जरिए समाधान चाहती है, जबकि विपक्ष पहले जवाबदेही और कार्रवाई की मांग पर अड़ा हुआ है। फिलहाल दोनों पक्षों के अपने-अपने रुख पर कायम रहने से संसद का गतिरोध समाप्त होता नहीं दिख रहा और चौथे दिन भी कोई विधायी कामकाज नहीं हो सका।