
पीएम मोदी और अन्ना हजारे।Source : Chrome
देशभर में छात्रों के विरोध प्रदर्शन और दिल्ली में हुई पुलिस कार्रवाई के बीच सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सरकार से संवाद की अपील की है। उन्होंने कहा कि जनता की आवाज दबाने के बजाय सरकार को प्रदर्शन कर रहे युवाओं से बातचीत करनी चाहिए और जवाबदेही तय करने से पीछे नहीं हटना चाहिए।
पीएम मोदी को लिखा पत्र
अन्ना हजारे ने कहा कि प्रधानमंत्री देश के सर्वोच्च जनप्रतिनिधि हैं, इसलिए छात्रों और युवाओं की चिंताओं से उन्हें अवगत कराना जरूरी था। उन्होंने अपने पत्र में सरकार से अपील की कि विरोध कर रहे छात्रों की बात सुनी जाए और उनकी समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से निकाला जाए।
'इस्तीफा लेने से सरकार नहीं गिरती'
अन्ना हजारे ने कहा कि यदि किसी मंत्री की जवाबदेही तय होती है और उससे इस्तीफा लिया जाता है, तो इससे सरकार कमजोर नहीं होती बल्कि उसकी कार्यप्रणाली अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनती है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मुद्दे को राजनीतिक नजरिए से नहीं बल्कि युवाओं के भविष्य से जुड़े सवाल के रूप में देखना चाहिए।
पेपर लीक और बेरोजगारी पर जताई चिंता
अपने पत्र में अन्ना हजारे ने कहा कि देश का युवा लगातार पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में देरी और बेरोजगारी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि आंदोलनों को दबाने के बजाय युवाओं की परेशानियों को गंभीरता से समझा जाए।
मौन आंदोलन कर जताया समर्थन
दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास दो घंटे का मौन आंदोलन भी किया। इस दौरान उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का समर्थन करते हुए कहा कि लोकतंत्र में संवाद ही सबसे प्रभावी रास्ता है।
सरकार से सकारात्मक पहल की अपील
अन्ना हजारे ने अपने संदेश में सरकार से आग्रह किया कि प्रदर्शनकारियों के असंतोष को कानून-व्यवस्था का मुद्दा मानने के बजाय समाज की पीड़ा और अपेक्षाओं के रूप में देखा जाए। उन्होंने विश्वास बहाल करने और सकारात्मक बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया।
