कन्नौज: उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले के जवाहर नवोदय विद्यालय अनौगी में छात्रों के विरोध का मामला सामने आया है। यहां कक्षा 10वीं, 11वीं और 12वीं के करीब 100 छात्रों ने स्कूल में मिलने वाले खाने की गुणवत्ता समेत कई दूसरी समस्याओं को लेकर विरोध किया। छात्रों ने खाना खाने से इनकार कर दिया और खुद को हॉस्टल के कमरों में बंद कर लिया। मामला सामने आने के बाद प्रशासन में भी हलचल मच गई।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, छात्रों का आरोप है कि हॉस्टल के मेस में लंबे समय से खाने की गुणवत्ता ठीक नहीं है। इसके अलावा छात्रों ने साफ-सफाई, पीने के पानी और स्कूल की कुछ व्यवस्थाओं को लेकर भी नाराजगी जताई। कुछ छात्रों ने शिक्षकों और प्रधानाचार्य के व्यवहार को लेकर भी शिकायत की है। हालांकि, इन आरोपों पर स्कूल प्रशासन का पक्ष भी सामने आया है और प्रधानाचार्य ने कुछ आरोपों को निराधार बताया है।

बताया जा रहा है कि छात्रों ने अपनी शिकायतें पहले भी स्कूल प्रबंधन के सामने रखने की कोशिश की थी। जब उन्हें लगा कि उनकी समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है, तो उन्होंने सामूहिक रूप से विरोध करने का फैसला किया। इसके बाद छात्रों ने भोजन का बहिष्कार किया और हॉस्टल के कमरों में खुद को बंद कर लिया।

मामले की जानकारी प्रशासन तक पहुंची तो अधिकारियों ने तुरंत हस्तक्षेप किया। जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री भी विद्यालय पहुंचे और छात्रों से बातचीत की। उन्होंने छात्रों की शिकायतें सुनीं और समस्याओं को दूर करने का भरोसा दिया। प्रशासन की ओर से स्कूल की व्यवस्थाओं और मेस के खाने की गुणवत्ता को लेकर जांच और जरूरी कार्रवाई की बात कही गई है।

छात्रों का कहना था कि वे चाहते हैं कि उनकी बात सिर्फ सुनी ही न जाए, बल्कि उस पर काम भी किया जाए। इसी वजह से वे तब तक विरोध पर बैठे रहे, जब तक कोई वरिष्ठ अधिकारी उनसे बात करने नहीं पहुंचा। प्रशासन के आश्वासन के बाद छात्रों ने अपना विरोध खत्म किया और भोजन भी किया।

इस पूरे मामले का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसके बाद यह घटना तेजी से चर्चा में आ गई। वीडियो में छात्रों को अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठाते देखा जा सकता है। वीडियो प्रशासन तक पहुंचने के बाद अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया और स्कूल पहुंचकर छात्रों से बातचीत की।

जवाहर नवोदय विद्यालय में रहने वाले छात्रों के लिए मेस का खाना रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा होता है। ऐसे में खाने की गुणवत्ता को लेकर शिकायत सामने आना गंभीर मामला है। छात्रों की शिकायतों की सही तरीके से जांच होना जरूरी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि खाने और दूसरी व्यवस्थाओं में वास्तव में कहां कमी है।

फिलहाल प्रशासन ने छात्रों को उनकी समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि जांच के बाद क्या कदम उठाए जाते हैं और मेस की व्यवस्था में कितना सुधार होता है। छात्रों का यह विरोध फिलहाल खत्म हो गया है, लेकिन उनकी शिकायतों का स्थायी समाधान होना ही इस पूरे मामले का सबसे अहम हिस्सा होगा।