स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीजेपी और आरएसएस पर निशाना साधते हुए विभाजन विभीषिका दिवस को लेकर सवाल उठाए थे। अब उनके इस बयान पर यूपी के उपमुख्यमंत्री और बीजेपी नेता केशव प्रसाद मौर्य ने पलटवार किया है। मौर्य ने अखिलेश यादव की सोच पर ही सवाल खड़े कर दिए।


दरअसल, 15 अगस्त को सपा कार्यालय में स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने बीजेपी और आरएसएस पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि बीजेपी और आजादी एक-दूसरे के विलोम हैं। अखिलेश ने यह भी कहा कि बीजेपी और उसके सहयोगी स्वतंत्रता दिवस की तैयारी करने के बजाय विभाजन विभीषिका दिवस मना रहे थे और उनके लिए विभाजन ही उत्सव है।


अखिलेश के इसी बयान पर केशव प्रसाद मौर्य ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव विभाजन की पीड़ा को कभी महसूस नहीं कर सकते। मौर्य के मुताबिक, जिन परिवारों ने देश के बंटवारे का दर्द झेला है, उनकी तकलीफ को समझना आसान नहीं है। उन्होंने अखिलेश पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप भी लगाया।


केशव मौर्य ने कहा कि बीजेपी के लिए देश सबसे पहले है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने के लिए काम करती है। उनका कहना था कि विभाजन विभीषिका दिवस मनाने का उद्देश्य लोगों को इतिहास की उस त्रासदी की याद दिलाना है, ताकि भविष्य में धर्म या किसी दूसरे आधार पर देश को दोबारा बांटने की कोशिश न हो।


मौर्य ने अखिलेश यादव के बयान पर सीधा हमला करते हुए कहा, "अखिलेश यादव की सोच ही गंदी है।" उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के लिए देश पहले है, जबकि अखिलेश यादव के लिए परिवार और वोट बैंक पहले है। इस बयान के बाद यूपी की सियासत में दोनों दलों के बीच जुबानी जंग और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।


केशव मौर्य ने अखिलेश के उस बयान पर भी जवाब दिया जिसमें उन्होंने बीजेपी और आजादी को एक-दूसरे का विलोम बताया था। मौर्य ने कहा कि अखिलेश यादव को बीजेपी का इतिहास पढ़ना चाहिए और अपना ज्ञान बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बीजेपी का उद्देश्य देश की एकता और अखंडता को मजबूत करना है।


इस पूरे विवाद में एक तरफ अखिलेश यादव बीजेपी की विचारधारा और विभाजन विभीषिका दिवस मनाने के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी तरफ बीजेपी नेता इसे इतिहास और देश की एकता से जोड़कर जवाब दे रहे हैं। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर शुरू हुई यह राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है।


उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां पहले से ही तेज हैं। ऐसे में अखिलेश यादव और बीजेपी नेताओं के बीच बयानबाजी को चुनावी राजनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने मुद्दों के जरिए जनता तक अपनी बात पहुंचाने में जुटे हैं।