अनंतनाग में बादल फटने के बाद पहलगाम क्षेत्र में बाढ़ से प्रभावित होटल | Source: Chrome

अनंतनाग में बादल फटने के बाद पहलगाम क्षेत्र में बाढ़ से प्रभावित होटल।Source : Chrome

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में शनिवार रात महज एक घंटे के भीतर बादल फटने की दो घटनाओं ने हालात बिगाड़ दिए। पहलगाम और शंगुस क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ से होटल, घर और खेत पानी और मलबे की चपेट में आ गए। प्रशासन ने राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया है, जबकि मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे तक भारी बारिश की संभावना जताते हुए लोगों और पर्यटकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

एक घंटे में दो जगह फटा बादल

जानकारी के अनुसार, पहली घटना शंगुस के चटरगुल के ऊपरी पहाड़ी क्षेत्र में हुई, जहां बादल फटने के बाद आरिपथ नाले का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। पहाड़ों से आए तेज बहाव के साथ कीचड़, बड़े पत्थर और पेड़ों का मलबा नीचे की ओर पहुंचा, जिससे आसपास के खेत और सेब के बाग प्रभावित हो गए।करीब 60 मिनट के भीतर दूसरी घटना पहलगाम के ओवेरा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी क्षेत्र में हुई। यहां ओवेरा नाले में अचानक आई बाढ़ का पानी आसपास के होटल, रिसॉर्ट और कई घरों में घुस गया, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

होटलों और रिहायशी इलाकों में घुसा पानी

बाढ़ के तेज बहाव के कारण कई रिहायशी क्षेत्रों और पर्यटन स्थलों पर मलबा जमा हो गया। होटल परिसर और घरों में पानी भरने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि राहत की बात यह रही कि अब तक किसी जनहानि की सूचना नहीं मिली है, लेकिन संपत्ति और कृषि क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है।

खेती और सेब के बागों को भारी नुकसान

बादल फटने के बाद आई बाढ़ का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा। तेज बहाव के साथ आए मलबे ने खेतों और सेब के बागों को नुकसान पहुंचाया। स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ ही मिनटों में पूरा इलाका पानी से भर गया और खड़ी फसलें प्रभावित हो गईं।

प्रशासन ने शुरू किया राहत और बचाव अभियान

घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंच गए। ओवेरा नाले के आसपास स्थित होटलों में ठहरे पर्यटकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। साथ ही भूस्खलन से प्रभावित सड़कों से मलबा हटाने का काम भी जारी है।

मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

मौसम विभाग ने कश्मीर घाटी में अगले 24 घंटे तक तेज बारिश की संभावना जताई है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों को आरिपथ और ओवेरा नाले समेत अन्य जलस्रोतों से दूर रहने की सलाह दी है। साथ ही अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।