Tभारत जल्द ही अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखने जा रहा है। इस बार इतिहास भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) नहीं बल्कि एक निजी कंपनी रचने वाली है हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) का विकसित किया गया 'विक्रम-1' भारत का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट है, जो अपनी पहली परीक्षण उड़ान के लिए पूरी तरह तैयार है। यह मिशन न केवल भारत के बढ़ते निजी स्पेस सेक्टर के लिए अहम है बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में देश की नई पहचान भी बना सकता है 


कब होगा 'विक्रम-1' का लॉन्च?

स्काईरूट एयरोस्पेस के अनुसार 'विक्रम-1' की पहली परीक्षण उड़ान 12 जुलाई से 4 अगस्त के बीच निर्धारित की गई है। इस मिशन को 'आगमन (Agnibaan Mission Agaman) नाम दिया गया है लॉन्च की अंतिम तारीख श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में अंतिम तकनीकी परीक्षण, मौसम, सुरक्षा मंजूरी और रेंज क्लीयरेंस के आधार पर तय की जाएगी 


क्या है 'विक्रम-1' की खासियत?

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ विक्रम साराभाई के नाम पर बनाए गए इस रॉकेट को पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित किया गया है। यह कार्बन कॉम्पोजिट संरचना और 3D-प्रिंटेड रॉकेट इंजन से लैस है जिससे इसका वजन कम और क्षमता अधिक हो जाती है 

करीब सात मंजिला ऊंचा यह बहु-चरणीय (Multi-stage) लॉन्च व्हीकल 350 किलोग्राम तक का पेलोड लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित करने में सक्षम है


अंतरिक्ष में जाएगा हीरा और सोना

इस मिशन की सबसे अनोखी बात यह है कि पहली बार कोई भारतीय रॉकेट अंतरिक्ष में हीरा और सोने से जुड़े विशेष पेलोड भी लेकर जाएगा

Cosmos Diamonds का 'Cosmic Blooms' नामक डायमंड आर्ट पीस और कलाकार अजय कुमार मटेवाड़ा का तैयार किया गया Micro Art भी इस मिशन का हिस्सा होगा। इस माइक्रो आर्ट में 18 कैरेट सोने से बना एक बेहद छोटा रॉकेट और भारत के तीन महान वैज्ञानिकों, सर सी.वी. रमन, डॉ. विक्रम साराभाई और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की सूक्ष्म आकृतियां शामिल हैं


भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मिशन?

दुनियाभर में छोटे उपग्रहों (Small Satellites) को लॉन्च करने की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में विक्रम-1 भारत को कम लागत और तेजी से सैटेलाइट लॉन्च करने की क्षमता देगा इससे भारत वैश्विक स्पेस लॉन्च मार्केट में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा सकेगा।

साथ ही, निजी कंपनियों के अंतरिक्ष क्षेत्र में आने से ISRO बड़े वैज्ञानिक मिशनों, जैसे चंद्रयान, गगनयान और भविष्य की अंतरग्रहीय परियोजनाओं पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेगा, जबकि निजी कंपनियां वाणिज्यिक और छोटे सैटेलाइट मिशनों की जिम्मेदारी संभालेंगी।


भारत के निजी स्पेस सेक्टर के लिए नया दौर

स्काईरूट एयरोस्पेस, जिसकी स्थापना ISRO के पूर्व वैज्ञानिक पवन कुमार चंदना और नागा भारत डाका ने की थी आज भारत की अग्रणी निजी स्पेस टेक कंपनियों में शामिल है। विक्रम-1 की सफल उड़ान भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि साबित हो सकती है और भविष्य में देश को वैश्विक स्पेस इकोनॉमी में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का रास्ता खोल सकती है