यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। पिछले कुछ दिनों में हूती समूह की ओर से ड्रोन और मिसाइलों से हमले किए गए हैं। इन हमलों के बाद यमन में भी लड़ाई तेज हुई है और सऊदी अरब में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है।
9 अगस्त को यमन के सरकारी सैन्य अधिकारियों ने बताया कि हूती लड़ाकों ने लाल सागर के महत्वपूर्ण शहर मोखा (Mocha) पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। यमनी सेना के मुताबिक, इस हमले में 7 लोगों की मौत हुई और करीब 30 लोग घायल हुए। सेना का दावा है कि हमले में कई ड्रोन भी इस्तेमाल किए गए, जिनमें से 11 को हवाई सुरक्षा प्रणाली ने मार गिराया।
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने दावा किया कि इन हमलों का निशाना सऊदी सैनिकों की मौजूदगी और हथियारों के भंडार थे। वहीं यमन की सरकारी सेना का कहना है कि हमले का असर नागरिक इलाकों और दूसरी महत्वपूर्ण जगहों पर भी पड़ा।
यह तनाव सिर्फ यमन तक सीमित नहीं है। जुलाई में हूतियों ने सऊदी अरब के अबहा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को भी मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाने का दावा किया था। यह हमला सना एयरपोर्ट पर सऊदी नेतृत्व वाले हमले के बाद किया गया था।
इसके बाद हूतियों ने सऊदी अरब के यानबू और जिजान इलाके में तेल से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाने का भी दावा किया। इससे सऊदी अरब के लिए सबसे बड़ी चिंता उसके तेल और दूसरी महत्वपूर्ण सुविधाओं की सुरक्षा को लेकर है।
सऊदी अरब और यमन के बीच यह तनाव नया नहीं है। दोनों पक्षों के बीच 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से एक युद्धविराम हुआ था, जिसके बाद लंबे समय तक बड़े स्तर की लड़ाई कम रही। लेकिन जुलाई 2026 में हुए हमलों के बाद स्थिति फिर बिगड़ती दिखाई दे रही है। मानवाधिकार संगठन Human Rights Watch ने भी दोनों पक्षों से नागरिकों और जरूरी सुविधाओं को नुकसान से बचाने की अपील की है।
ड्रोन हूती समूह के लिए एक अहम हथियार बन चुके हैं। इनका इस्तेमाल दूर बैठे किसी ठिकाने को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है। यही वजह है कि सऊदी अरब और उसके आसपास के देशों के लिए ड्रोन हमले एक बड़ी सुरक्षा चुनौती बने हुए हैं।
ब्रिटेन की सरकार की सऊदी अरब संबंधी सुरक्षा सलाह के मुताबिक, जुलाई 2026 से हूतियों की ओर से सऊदी बुनियादी ढांचे, एयरपोर्ट और दूसरे महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने का खतरा फिर बढ़ा है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह तनाव फिर से बड़े युद्ध में बदल सकता है। सऊदी अरब अपनी सीमाओं और महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा बढ़ा रहा है, जबकि हूती भी हमले जारी रखने की बात कर रहे हैं।
अगर मिसाइल और ड्रोन हमले इसी तरह जारी रहते हैं, तो इसका असर सिर्फ यमन और सऊदी अरब तक सीमित नहीं रहेगा। लाल सागर का इलाका पहले से ही दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्तों में शामिल है। यहां तनाव बढ़ने से तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी असर पड़ सकता है।
फिलहाल हालात पर पूरी दुनिया की नजर है। एक तरफ सैन्य कार्रवाई बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ क्षेत्र में तनाव कम करने की कोशिशें भी चल रही हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि दोनों पक्ष पीछे हटते हैं या संघर्ष का दायरा और बढ़ता है।
