नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली की ओर एक बार फिर किसानों का बड़ा जत्था बढ़ने लगा है। पंजाब, हरियाणा और कई अन्य राज्यों से हजारों किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों, बसों और अन्य वाहनों के साथ शंभू तथा खनौरी बॉर्डर पर पहुंच गए हैं। 'देश बचाओ मोर्चा' के बैनर तले दिल्ली के किसान घाट पर प्रस्तावित महापंचायत को लेकर किसानों में भारी उत्साह दिखाई दे रहा है। वहीं प्रशासन ने संभावित भीड़ को देखते हुए सीमा क्षेत्रों पर सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं और हरियाणा की ओर से शंभू बॉर्डर को पूरी तरह सील कर दिया गया है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता बना आंदोलन की बड़ी वजह
इस बार किसानों का आंदोलन न्यूनतम समर्थन मूल्य या कृषि कानूनों को लेकर नहीं, बल्कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते को लेकर केंद्रित है। किसान संगठनों का कहना है कि यदि यह समझौता लागू होता है तो भारतीय कृषि और डेयरी क्षेत्र पर गंभीर आर्थिक असर पड़ सकता है।
किसान नेताओं का दावा है कि अमेरिका में किसानों और डेयरी उद्योग को भारी सरकारी सहायता और सब्सिडी मिलती है। ऐसे में वहां के सस्ते कृषि एवं डेयरी उत्पाद भारतीय बाजार में आने लगे तो देश के छोटे और सीमांत किसानों के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाएगा। इससे कृषि आय, डेयरी व्यवसाय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
डेयरी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर खतरे की आशंका
किसान संगठनों का कहना है कि भारत का डेयरी क्षेत्र करोड़ों ग्रामीण परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार है। यदि विदेशी डेयरी उत्पाद बड़ी मात्रा में भारतीय बाजार में पहुंचे तो दूध उत्पादकों, पशुपालकों और इससे जुड़े छोटे कारोबारियों की आय पर सीधा असर पड़ेगा। इसके साथ ही खाद्य प्रसंस्करण और कृषि आधारित लघु उद्योग भी प्रभावित हो सकते हैं।
किसानों की मांग है कि प्रस्तावित व्यापार समझौते को लागू करने से पहले उससे जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं और किसान संगठनों सहित सभी संबंधित पक्षों से विस्तृत चर्चा की जाए।
शंभू और खनौरी बॉर्डर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम
किसानों के दिल्ली मार्च को देखते हुए हरियाणा प्रशासन ने शंभू और खनौरी बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया है। कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की गई है तथा बड़ी संख्या में पुलिस और सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर क्षेत्र में प्रतिबंधात्मक आदेश भी लागू किए हैं।
सीमा पर भारी वाहनों, सीमेंट बैरियर और अन्य अवरोधकों के माध्यम से किसानों की आवाजाही रोकने की तैयारी की गई है। इसके कारण दिल्ली-जालंधर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ है और कई मार्गों पर वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से भेजा जा रहा है।
किसान नेताओं की हिरासत से बढ़ा तनाव
महापंचायत में शामिल होने जा रहे भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के प्रमुख गुरनाम सिंह चढ़ूनी को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद आंदोलनकारी किसानों में नाराजगी बढ़ गई है। इसके विरोध में कई स्थानों पर किसानों ने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
किसान संगठनों का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोकने के लिए प्रशासन अनावश्यक सख्ती बरत रहा है, जबकि प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
बॉर्डर पर ही मोर्चा लगाने की चेतावनी
किसान नेता सरवण सिंह पंढेर ने कहा कि किसान शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली जाकर अपनी बात रखना चाहते हैं। यदि उन्हें सीमा पर रोका गया तो वे वहीं स्थायी मोर्चा लगाकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाएंगे। उनका कहना है कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और किसी प्रकार के टकराव से बचने का प्रयास किया जाएगा।
महापंचायत में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा सहित कई राज्यों के किसानों के शामिल होने की संभावना है।
किसान घाट पर महापंचायत की तैयारी
दिल्ली स्थित किसान घाट पर एक दिवसीय किसान महापंचायत आयोजित करने की योजना बनाई गई है। किसान संगठनों का उद्देश्य प्रस्तावित व्यापार समझौते के संभावित प्रभावों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना और केंद्र सरकार से इस विषय पर पुनर्विचार की मांग करना है।
किसानों ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने से पहले देश के किसानों, डेयरी उत्पादकों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। आने वाले दिनों में यह आंदोलन राष्ट्रीय राजनीति और कृषि नीति के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है।
