गॉल: भारत और श्रीलंका के बीच खेले जा रहे टेस्ट मुकाबले में तीसरे दिन का खेल बेहद रोमांचक और उतार-चढ़ाव वाला रहा। भारतीय टीम ने अपनी शानदार गेंदबाजी के दम पर श्रीलंका की पहली पारी 284 रन पर समेट दी और पहली पारी के आधार पर 178 रन की महत्वपूर्ण बढ़त हासिल कर ली। इसके बावजूद तीसरे दिन भारत पूरी तरह अपनी पकड़ मजबूत नहीं कर सका। श्रीलंका के मध्यक्रम ने भारतीय गेंदबाजों के सामने शानदार प्रतिरोध करते हुए फॉलोऑन का खतरा टाल दिया। अब मुकाबले के चौथे दिन कप्तान शुभमन गिल के सामने सबसे बड़ी चुनौती तेजी से रन बनाकर श्रीलंका के सामने इतना बड़ा लक्ष्य रखने की होगी, जिसे हासिल करना उसके लिए बेहद मुश्किल हो।
तीसरे दिन भारतीय गेंदबाजों ने शुरुआत में मचाया कहर
तीसरे दिन भारतीय टीम ने गेंदबाजी में शानदार शुरुआत की। भारतीय स्पिनरों ने श्रीलंकाई बल्लेबाजों को लगातार दबाव में रखा और एक समय श्रीलंका के पांच विकेट महज 90 रन पर गिर गए थे। मानव सुथार ने बेहतरीन गेंदबाजी करते हुए चार विकेट हासिल किए, जबकि रविंद्र जडेजा ने तीन बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा। दोनों स्पिनरों की प्रभावी गेंदबाजी के कारण श्रीलंकाई बल्लेबाजी लड़खड़ाती नजर आई।
भारत को उस समय मुकाबले पर पूरी तरह नियंत्रण हासिल करने का मौका दिखाई दे रहा था। शुरुआती झटकों के बाद श्रीलंका के लिए बड़ी साझेदारी करना बेहद जरूरी था, लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने शुरुआत में जिस तरह दबाव बनाया, उससे मेजबान टीम मुश्किल स्थिति में पहुंच गई थी।
90 रन पर पांच विकेट, फिर अचानक बदल गया मैच
हालांकि, इसके बाद मुकाबले की तस्वीर अचानक बदल गई। 90 रन के स्कोर पर पांच विकेट गंवाने के बाद श्रीलंका के सोनल दिनुषा और निरोशन डिकवेला ने भारतीय गेंदबाजों के खिलाफ मोर्चा संभाल लिया। दोनों बल्लेबाजों ने छठे विकेट के लिए 146 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी कर भारत की मजबूत पकड़ को काफी हद तक कमजोर कर दिया।
सोनल दिनुषा ने 100 रन की शानदार पारी खेली, जबकि निरोशन डिकवेला ने 80 रन बनाए। इस साझेदारी ने श्रीलंका को उस स्थिति से बाहर निकाल दिया, जहां टीम पर फॉलोऑन का खतरा मंडरा रहा था। भारत के लिए यह साझेदारी तीसरे दिन के खेल का सबसे बड़ा झटका साबित हुई।
कैच छूटना और दबाव न बना पाना भारत की बड़ी कमजोरी
भारत की गेंदबाजी ने जहां कई मौकों पर शानदार प्रदर्शन किया, वहीं साझेदारी के दौरान टीम की फील्डिंग और दबाव बनाए रखने की क्षमता पर सवाल खड़े हुए। केएल राहुल द्वारा निरोशन डिकवेला का कैच छोड़ना भी भारत के लिए महंगा साबित हुआ। उस समय विकेट हासिल करने से भारत श्रीलंका की पारी को जल्दी समेटने की स्थिति में आ सकता था।
श्रीलंकाई बल्लेबाजों को लगातार दबाव में रखने में नाकामी के कारण 90 रन पर पांच विकेट गंवाने वाली टीम 284 रन तक पहुंच गई। यही वजह रही कि भारत को 178 रन की बढ़त से ही संतोष करना पड़ा। हालांकि यह बढ़त मजबूत है, लेकिन टेस्ट मैच में जीत सुनिश्चित करने के लिए भारत को अब दूसरी पारी में बेहद सोच-समझकर बल्लेबाजी करनी होगी।
अब चौथे दिन शुभमन गिल के सामने सबसे बड़ी चुनौती
चौथे दिन भारतीय टीम की रणनीति मैच का रुख पूरी तरह बदल सकती है। भारत के पास पहली पारी के आधार पर 178 रन की बढ़त मौजूद है। ऐसे में कप्तान शुभमन गिल को बल्लेबाजों के साथ मिलकर आक्रामक रणनीति अपनानी होगी। भारत की कोशिश दूसरी पारी में तेजी से रन बनाने और श्रीलंका के सामने बड़ा लक्ष्य रखने की होगी।
मुकाबले की मौजूदा स्थिति को देखते हुए भारत के लिए कम से कम 350 से 400 रन का लक्ष्य खड़ा करना अहम हो सकता है। इसके लिए भारतीय बल्लेबाजों को रन बनाने की गति तेज रखनी होगी, ताकि श्रीलंका को दूसरी पारी के लिए पर्याप्त समय न मिले और भारतीय गेंदबाजों को मैच जीतने का पूरा अवसर मिल सके।
स्पिनरों के लिए चौथी पारी हो सकती है निर्णायक
भारत की जीत की उम्मीदों का एक बड़ा आधार उसकी स्पिन गेंदबाजी भी है। तीसरे दिन मानव सुथार और रविंद्र जडेजा ने जिस तरह श्रीलंकाई बल्लेबाजों को परेशान किया, उससे संकेत मिलता है कि मैच आगे बढ़ने के साथ स्पिनरों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है।
चौथे और पांचवें दिन पिच से स्पिन गेंदबाजों को मदद मिलने की स्थिति में श्रीलंका के बल्लेबाजों के लिए चौथी पारी में बड़ा लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं होगा। ऐसे में भारत को अपनी दूसरी पारी में पर्याप्त रन बनाने के साथ-साथ श्रीलंका पर चौथी पारी का दबाव डालने की रणनीति अपनानी होगी।
तीसरे दिन भारत कहां पास और कहां फेल?
तीसरे दिन भारत के प्रदर्शन को देखें तो गेंदबाजी के शुरुआती चरण और श्रीलंका के निचले क्रम को जल्दी समेटने में टीम पूरी तरह सफल रही। मानव सुथार के चार विकेट और रविंद्र जडेजा के तीन विकेट भारत के लिए बड़ी उपलब्धि रहे। भारतीय गेंदबाजों ने श्रीलंका को 284 रन पर रोककर 178 रन की बढ़त भी हासिल की।
लेकिन दूसरी तरफ भारत साझेदारियां तोड़ने और अहम मौकों पर कैच पकड़ने के मामले में पीछे रह गया। 90 रन पर पांच विकेट लेने के बाद भी श्रीलंका को 146 रन की साझेदारी करने देना भारत के लिए चिंता का विषय रहा। डिकवेला का कैच छूटना भी इसी कड़ी में अहम रहा।
चौथे दिन का फैसला तय करेगा मैच का नतीजा
अब मुकाबले की दिशा काफी हद तक चौथे दिन भारत की बल्लेबाजी पर निर्भर करेगी। अगर शुभमन गिल की अगुवाई में भारतीय बल्लेबाज तेजी से रन बनाते हैं और श्रीलंका के सामने 350 से 400 रन के आसपास का लक्ष्य रखने में सफल रहते हैं, तो भारतीय गेंदबाजों के पास मैच जीतने का मजबूत मौका होगा।
दूसरी ओर, भारत अगर रन बनाने में ज्यादा समय लेता है या जल्दी विकेट गंवा देता है, तो श्रीलंका को चौथी पारी में मुकाबला बचाने या लक्ष्य का पीछा करने के लिए अधिक समय मिल सकता है। इसलिए कप्तान शुभमन गिल के लिए आक्रामकता और सावधानी के बीच सही संतुलन बनाना बेहद महत्वपूर्ण होगा।
भारत के लिए जीत की कुंजी क्या होगी?
भारत के लिए सबसे जरूरी बात यह होगी कि पहली पारी की 178 रन की बढ़त को बेकार न जाने दिया जाए। दूसरी पारी में तेजी से रन बनाकर बड़ा लक्ष्य तैयार करना, श्रीलंकाई बल्लेबाजों पर दबाव बनाना और चौथी पारी में स्पिनरों को अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध कराना भारत की जीत की रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है।
तीसरे दिन भारतीय टीम ने शानदार गेंदबाजी से अपनी स्थिति मजबूत की, लेकिन श्रीलंका की 146 रन की साझेदारी ने मुकाबले को पूरी तरह एकतरफा होने से रोक दिया। अब चौथे दिन शुभमन गिल और भारतीय बल्लेबाजों के पास इस बढ़त को निर्णायक स्थिति में बदलने का मौका होगा।
